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Jitiya Vrat: जितिया व्रत अगर गलती से टूट जाए तो कैसे पूरा होगा उपवास? जानें नियम और महत्व

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
नीरज के. पटेल
सार

Jitiya Vrat Puja: जितिया व्रत गलती से टूट जाए तो सबसे जरूरी है कि मन में नकारात्मक भावना न रखें। श्रद्धा के साथ भगवान का स्मरण करें, क्षमा प्रार्थना करें और अपनी क्षमता के अनुसार व्रत की पूजा पूरी करें। 
 

Jitiya Vrat
Jitiya Vrat Broken Rule: जितिया व्रत यानी जीवित्पुत्रिका व्रत संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी जीवन की कामना से रखा जाता है। इस व्रत में माताएं निर्जला उपवास करती हैं और भगवान जीमूतवाहन की पूजा करती हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, यह व्रत बहुत कठिन माना जाता है, इसलिए इसे पूरी श्रद्धा और नियम के साथ करने का प्रयास किया जाता है। हालांकि, कई बार अनजाने में पानी पी लेने, कुछ खा लेने या किसी अन्य कारण से व्रत टूट जाता है। ऐसे में घबराने या खुद को दोष देने के बजाय श्रद्धा और नियमपूर्वक आगे की पूजा करनी चाहिए।

अगर जितिया व्रत गलती से टूट जाए और व्रती से अनजाने में कुछ खा या पी लिया जाए, तो सबसे पहले भगवान जीमूतवाहन का स्मरण करना चाहिए। मन में अपनी गलती के लिए क्षमा प्रार्थना करें और संकल्प लें कि आगे व्रत के नियमों का पालन पूरी श्रद्धा से करेंगी। धार्मिक मान्यताओं में पूजा और व्रत में भावना को विशेष महत्व दिया गया है। इसलिए अनजाने में हुई गलती को लेकर बहुत अधिक चिंता नहीं करनी चाहिए।

दोबारा कैसे करें व्रत का संकल्प?

व्रत टूटने के बाद स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद भगवान सूर्य, भगवान जीमूतवाहन और अपने इष्ट देव का ध्यान करें। पूजा स्थल पर दीपक जलाकर व्रत का संकल्प दोबारा लिया जा सकता है। मन में संतान के सुख, स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना करें। इसके बाद जितना संभव हो, उतने नियमों का पालन करते हुए व्रत की पूजा पूरी करें।

क्या दोबारा निर्जला व्रत रखना चाहिए?

यदि गलती से व्रत टूट गया है, तो उसी दिन दोबारा निर्जला व्रत रखने का निर्णय अपनी शारीरिक स्थिति को ध्यान में रखकर ही करना चाहिए। लंबे समय तक बिना पानी के रहने से स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है। खासकर गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों या किसी बीमारी से पीड़ित महिलाओं को निर्जला उपवास रखने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना उचित है। धार्मिक आस्था के साथ स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी जरूरी है।

जितिया व्रत में भगवान जीमूतवाहन की पूजा

जितिया व्रत में भगवान जीमूतवाहन की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। पूजा के दौरान उन्हें फल, फूल, अक्षत, धूप और दीप अर्पित किए जाते हैं। व्रती भगवान जीमूतवाहन की कथा सुनती हैं और संतान की लंबी आयु एवं अच्छे स्वास्थ्य की प्रार्थना करती हैं। कई स्थानों पर स्थानीय परंपराओं के अनुसार पूजा की विधि में अंतर भी देखने को मिलता है।

व्रत टूटने पर क्षमा प्रार्थना का महत्व

अगर व्रत अनजाने में टूट गया है, तो भगवान से क्षमा मांगना और श्रद्धा के साथ पूजा करना महत्वपूर्ण माना जाता है। आप मन ही मन प्रार्थना कर सकती हैं कि हे भगवान जीमूतवाहन, अज्ञानवश हुई भूल को क्षमा करें और मेरी संतान को सुख, स्वास्थ्य और दीर्घायु प्रदान करें। इसके बाद व्रत की शेष पूजा और कथा विधि-विधान से पूरी करें।

जितिया व्रत का धार्मिक महत्व

जितिया व्रत माताओं के लिए विशेष आस्था का पर्व माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान जीमूतवाहन की पूजा और व्रत करने से संतान की रक्षा और दीर्घायु की कामना पूरी होती है। यह पर्व मां और संतान के बीच प्रेम और ममता का प्रतीक भी माना जाता है। व्रत का मुख्य उद्देश्य श्रद्धा, संयम और संतान के कल्याण की भावना है।

गलती से व्रत टूटने पर घबराएं नहीं

जितिया व्रत गलती से टूट जाए तो सबसे जरूरी है कि मन में नकारात्मक भावना न रखें। श्रद्धा के साथ भगवान का स्मरण करें, क्षमा प्रार्थना करें और अपनी क्षमता के अनुसार व्रत की पूजा पूरी करें। अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में व्रत से जुड़े नियम अलग हो सकते हैं, इसलिए अपनी पारिवारिक परंपरा और स्थानीय मान्यता का पालन करना उचित माना जाता है। व्रत का वास्तविक भाव श्रद्धा, संयम और संतान के मंगल की कामना से जुड़ा है। 

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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।

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