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Sawan Poornima:सावन पूर्णिमा की तिथि क्यों मानी जाती है खास ? जानिए धार्मिक और पौराणिक महत्व

जीवांजलि, धर्म डेस्कPublished by:
कोमल शर्मा
सार

Sawan Poornima: क्या आपने कभी सोचा है कि सावन पूर्णिमा को हिंदू धर्म में इतना विशेष क्यों माना जाता है? आखिर इस दिन ऐसा क्या होता है कि एक ही तिथि पर कई पवित्र पर्व मनाए जाते हैं

:सावन  पूर्णिमा
Sawan Poornima: क्या आपने कभी सोचा है कि सावन पूर्णिमा को हिंदू धर्म में इतना विशेष क्यों माना जाता है? आखिर इस दिन ऐसा क्या होता है कि एक ही तिथि पर कई पवित्र पर्व मनाए जाते हैं और देशभर के मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ती है? क्या यह केवल एक पूर्णिमा है, या इसके पीछे कोई गहरा आध्यात्मिक रहस्य भी छिपा है?आइए जानते हैंसावन पूर्णिमा का महत्व, इससे जुड़ी मान्यताएं, पूजा-विधि और इस दिन किए जाने वाले शुभ कार्यों के बारे में।

 सावन पूर्णिमा क्या है?

हिंदू पंचांग के अनुसार श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को सावन पूर्णिमा कहा जाता है। यह दिन भगवान शिव, भगवान विष्णु और चंद्रदेव की कृपा प्राप्त करने के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। सावन का पूरा महीना ही शिवभक्ति के लिए समर्पित होता है, लेकिन पूर्णिमा आने पर इसकी पवित्रता और अधिक बढ़ जाती है।

सावन पूर्णिमा पर मनाए जाने वाले त्योहार 

 रक्षाबंधन
श्रावणी उपाकर्म
 यज्ञोपवीत संस्कार
ऋषि तर्पण
नारियल पूर्णिमा
झूलन पूर्णिमा 

सावन पूर्णिमा का धार्मिक महत्व

मान्यता है कि इस दिन किया गया स्नान, दान, जप और पूजा कई गुना अधिक फल प्रदान करते हैं। शास्त्रों के अनुसार पूर्णिमा के दिन चंद्रमा अपनी पूर्ण कलाओं में होता है, जिससे मन और बुद्धि पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।सावन पूर्णिमा के दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से जीवन में सुख, समृद्धि और मानसिक शांति प्राप्त होती है। वहीं भगवान विष्णु की आराधना करने से परिवार में खुशहाली और धन-धान्य की वृद्धि होती है। ऐसा भी माना जाता है कि इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने से अनेक जन्मों के पापों का नाश होता है और व्यक्ति को पुण्य की प्राप्ति होती है।

सावन पूर्णिमा और भगवान शिव का संबंध

सावन महीना स्वयं भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। इसलिए इस माह की पूर्णिमा का विशेष महत्व बताया गया है।मान्यता है कि इस दिन शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और भस्म अर्पित कर "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जाप करने से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं।

सावन पूर्णिमा पर भगवान शिव की पूजा के लाभ 

 जीवन की बाधाएं दूर होती हैं।
विवाह में आ रही रुकावटें समाप्त होती हैं।
 आर्थिक संकट कम होते हैं।
परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।
मन को आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त होती है।

 रक्षाबंधन का विशेष महत्व

सावन पूर्णिमा का सबसे प्रसिद्ध पर्व रक्षाबंधन है। इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधती हैं और उनके सुखी एवं दीर्घायु जीवन की कामना करती हैं।बदले में भाई जीवनभर अपनी बहन की रक्षा करने का संकल्प लेते हैं। यह केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास और पारिवारिक संबंधों को मजबूत करने वाला पवित्र पर्व है।

श्रावणी उपाकर्म का महत्व

वैदिक परंपरा में इस दिन श्रावणी उपाकर्म किया जाता है। विशेष रूप से ब्राह्मण और वेदों का अध्ययन करने वाले लोग इस दिन अपना यज्ञोपवीत बदलते हैं और ऋषियों का स्मरण करते हैं।यह परंपरा ज्ञान, अनुशासन और आध्यात्मिक जीवन के नए आरंभ का प्रतीक मानी जाती है।

 नारियल पूर्णिमा का महत्व

भारत के पश्चिमी तटीय क्षेत्रों में इस दिन नारियल पूर्णिमा मनाई जाती है।समुद्र से जुड़े लोग समुद्र देवता को नारियल अर्पित कर सुरक्षित जीवन और समृद्धि की प्रार्थना करते हैं। मछुआरे इस दिन नए मौसम की शुरुआत भगवान की कृपा से करते हैं।

 झूलन पूर्णिमा

वैष्णव परंपरा में सावन पूर्णिमा को भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी के झूलन उत्सव का समापन भी माना जाता है।मंदिरों में सुंदर झांकियां सजाई जाती हैं और ठाकुर जी को फूलों के झूले में विराजमान कर विशेष पूजा की जाती है। भक्त भजन-कीर्तन करते हैं और भगवान से प्रेम तथा भक्ति का आशीर्वाद मांगते हैं।

सावन पूर्णिमा पर क्या करें?

 प्रातः ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान करें।
 संभव हो तो गंगा या किसी पवित्र नदी में स्नान करें।
 भगवान शिव का जलाभिषेक करें।
 शिवलिंग पर बेलपत्र, भांग, धतूरा और पुष्प अर्पित करें।
भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करें।
चंद्रदेव को अर्घ्य दें।
गरीबों और जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और दान दें।
 गाय को हरा चारा खिलाएं।
"ॐ नमः शिवाय" या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें।
परिवार के साथ रक्षाबंधन का पर्व श्रद्धापूर्वक मनाएं।

 सावन पूर्णिमा पर क्या नहीं करना चाहिए?

 किसी का अपमान या अनादर न करें।
क्रोध और कटु वचन से बचें।
 नशे और तामसिक भोजन का सेवन न करें।
 झूठ बोलने और छल-कपट से दूर रहें।
 बिना कारण किसी जीव को कष्ट न पहुंचाएं।
पूजा के समय मन को शांत और एकाग्र रखें।

 सावन पूर्णिमा का आध्यात्मिक महत्व

पूर्णिमा का संबंध मन और चेतना से माना जाता है। चंद्रमा की पूर्ण कलाएं मन को स्थिर और सकारात्मक बनाने में सहायक मानी जाती हैं।सावन पूर्णिमा हमें यह संदेश देती है कि जैसे चंद्रमा पूर्ण होकर पूरे संसार को प्रकाश देता है, उसी प्रकार मनुष्य को भी अपने भीतर प्रेम, करुणा, क्षमा और सेवा की भावना विकसित करनी चाहिए। यह दिन केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि आत्मचिंतन, सकारात्मक सोच और ईश्वर से जुड़ने का भी श्रेष्ठ अवसर माना जाता है।

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(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)

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