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Sawan Somvar: क्यों खास है सावन का सोमवार , जानिए रहस्य

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
कोमल शर्मा
सार

Sawan Somvar Ka Mahatav : क्या आपने कभी सोचा है कि पूरे साल में आने वाले सभी सोमवारों में सावन का सोमवार ही इतना खास क्यों माना जाता है? आखिर ऐसा कौन-सा रहस्य है कि लाखों श्रद्धालु इस दिन व्रत रखते हैं, मंदिरों में लंबी-लंबी कतारें लगती हैं

Sawan Somvar Ka Mahatav
Sawan Somvar Ka Mahatav : क्या आपने कभी सोचा है कि पूरे साल में आने वाले सभी सोमवारों में सावन का सोमवार ही इतना खास क्यों माना जाता है? आखिर ऐसा कौन-सा रहस्य है कि लाखों श्रद्धालु इस दिन व्रत रखते हैं, मंदिरों में लंबी-लंबी कतारें लगती हैं और "हर-हर महादेव" के जयकारों से पूरा वातावरण गूंज उठता है आपको बता दें कि सावन  सोमवार के दिन  भगवान शिव की कृपा पाने के लिए  लोग व्रत रखते हैं और उनकी आराधना करते हैं। चलिए इस लेख में हम आपको बताते हैं कि सावन सोमवार का क्या महत्व है।

क्यों खास है सावन का सोमवार ? 

हिंदू धर्म में सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे श्रेष्ठ माना गया है। मान्यता है कि इस पूरे महीने भगवान शिव अपने भक्तों पर विशेष कृपा बरसाते हैं। इसलिए जो व्यक्ति सच्चे मन से उनकी पूजा करता है, उसकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। लेकिन यहां एक और सवाल उठता है जब पूरा सावन ही शुभ है, तो सोमवार को ही सबसे अधिक महत्व क्यों दिया जाता है?  चलिए आपको कथा के माध्यम से बताते हैं कि सावन सोमवार  का क्या महत्व है 

सोमवार और भगवान शिव का रहस्य

सोमवार का संबंध चंद्र देव  से माना जाता है। कथा के अनुसार, चंद्र देव को एक बार श्राप मिला, जिसके कारण उनका तेज और शक्ति लगातार कम होने लगी। परेशान होकर उन्होंने भगवान शिव की कठोर तपस्या की।भगवान शिव उनकी भक्ति से प्रसन्न हुए और उन्हें अपने मस्तक पर स्थान दिया। तभी से भगवान शिव को चंद्रशेखर भी कहा जाता है। यही कारण है कि सोमवार का दिन भगवान शिव को अत्यंत प्रिय माना जाता है।अब सोचिए जब भगवान शिव का प्रिय दिन और उनका प्रिय महीना एक साथ आ जाए, तो उस दिन का महत्व कितना बढ़ जाता होगा। यही वजह है कि सावन का हर सोमवार बेहद शुभ माना जाता है।


 

समुद्र मंथन से जुड़ा रहस्य

सावन के सोमवार का महत्व एक और प्रसिद्ध कथा से भी जुड़ा हुआ है। जब देवताओं और असुरों ने समुद्र मंथन किया, तब सबसे पहले हलाहल नाम का भयंकर विष निकला। उस विष से पूरी सृष्टि संकट में पड़ गई। तब भगवान शिव ने संसार की रक्षा के लिए उस विष को अपने कंठ में धारण कर लिया।विष के प्रभाव को शांत करने के लिए देवताओं ने भगवान शिव का जल से अभिषेक किया। कहा जाता है कि यह घटना सावन के समय हुई थी। तभी से सावन में शिवलिंग पर जल, दूध और बेलपत्र चढ़ाने की परंपरा शुरू हुई। इसलिए इस महीने जलाभिषेक का विशेष महत्व माना जाता है।

सावन सोमवार का व्रत क्यों रखा जाता है?

जीवन में सुख-शांति आती है।
परिवार में खुशहाली बनी रहती है।
मन की इच्छाएं पूरी होने की मान्यता है।
विवाह में आ रही बाधाएं दूर होने की बात कही जाती है।
दांपत्य जीवन में प्रेम और विश्वास बढ़ता है।
 मानसिक तनाव कम होता है और मन में सकारात्मक ऊर्जा आती है।

 सावन सोमवार की पूजा कैसे करें?

सावन सोमवार के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र पहनें।
 इसके बाद भगवान शिव का जल या गंगाजल से अभिषेक करें।
 यदि संभव हो तो दूध, दही, शहद, घी और शक्कर से पंचामृत अभिषेक भी किया जा सकता है।
इसके बाद बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल, सफेद चंदन और भस्म अर्पित करें। 
"ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जाप करें और शिव चालीसा या रुद्राष्टक का पाठ करें।
पूजा के अंत में भगवान शिव से सच्चे मन से प्रार्थना करें। कहा जाता है कि शिव केवल भाव देखते हैं, दिखावा नहीं।
शास्त्रों के अनुसार, भगवान शिव को केवल उपवास से नहीं बल्कि सच्चे व्यवहार से भी प्रसन्न किया जा सकता है।
यदि कोई व्यक्ति व्रत रखकर भी दूसरों से बुरा व्यवहार करता है, झूठ बोलता है या किसी का दिल दुखाता है, तो पूजा का वास्तविक फल नहीं मिलता। इसलिए सावन में जितना महत्व पूजा का है, उतना ही महत्व अच्छे कर्म, दया, सत्य और सेवा का भी है।

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(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)

 

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