विज्ञापन
Home  dharm  saint stories  swami gyananand ji maharaj ne bataya man ki ankh kholne ka kya hai aasan tarika

Spiritual Knowledge: मन की आंख खोलने का क्या है साधन? स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज ने बताया आसान तरीका

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
स्वामी श्री ज्ञानानंद जी महाराज
सार

Positive Thinking: मन की आंख खुलने के बाद व्यक्ति में यह क्षमता आ जाती है कि वह हर स्थिति में सही और गलत का फर्क समझ सके। वह किसी के बहकावे में नहीं आता और अपने विवेक से निर्णय लेता है। 
 

Swami Gyananand Ji Maharaj
Spiritual Awareness in Life: मन की आंख का अर्थ है हमारी अंदरूनी समझ, सोचने-समझने की शक्ति और सही-गलत की पहचान करने की क्षमता। यह कोई बाहरी आंख नहीं होती, बल्कि यह हमारी चेतना का हिस्सा है जो हमें जीवन के सही रास्ते की ओर ले जाती है। जब यह आंख खुली होती है, तो व्यक्ति हर परिस्थिति को गहराई से समझ पाता है और जल्दबाजी या भ्रम में निर्णय नहीं लेता।

अगर मन की आंख खुली नहीं है, तो जीवन अधूरा रह जाता है। व्यक्ति बाहरी दुनिया तो देख सकता है, लेकिन सच्चाई को नहीं समझ पाता। वह अच्छे और बुरे में फर्क नहीं कर पाता और अक्सर गलत रास्ते पर चल पड़ता है। जीवन में दो ही रास्ते होते हैं- अच्छाई का और बुराई का, जिन्हें शास्त्रों में ‘श्रेय’ और ‘प्रेय’ कहा गया है। इन दोनों में से सही रास्ता चुनने के लिए अंदर की दृष्टि का जागृत होना बहुत जरूरी है।

सही रास्ता कौन दिखाता है?

जब मनुष्य खुद से सही निर्णय लेने में सक्षम नहीं होता, तब उसे मार्गदर्शन की आवश्यकता होती है। यह मार्गदर्शन उसे अच्छे विचारों, संतों के वचनों और सत्संग से मिलता है। जो व्यक्ति विचारों से अंधा होता है, यानी जिसे सही और गलत का ज्ञान नहीं होता, वह भी अगर सही बातें सुनता है, तो धीरे-धीरे उसकी समझ विकसित होने लगती है।

सत्संग का महत्व

सत्संग का अर्थ है सच्चे और अच्छे विचारों का संग। जब व्यक्ति सत्संग में जाता है और अच्छे विचारों को सुनता है, तो उसके अंदर की नकारात्मकता धीरे-धीरे खत्म होने लगती है। मन पर पड़े अज्ञान के पर्दे हटने लगते हैं। यही कारण है कि कहा गया है- “सुन-सुन अंधे पायें राज।” इसका मतलब है कि जो व्यक्ति समझ से अंधा है, वह भी सही बातों को सुनकर ज्ञान प्राप्त कर सकता है।

विचारों की शुद्धि कैसे होती है?

जब हम लगातार अच्छे विचार सुनते हैं और उन पर मनन करते हैं, तो हमारे विचार शुद्ध होने लगते हैं। मन की अशुद्धियां जैसे क्रोध, लालच, ईर्ष्या धीरे-धीरे कम होने लगती हैं। इसके स्थान पर सकारात्मक सोच, धैर्य और संतोष आने लगता है। यही प्रक्रिया मन की आँख खोलने का मुख्य साधन है।

सही और गलत की पहचान

मन की आंख खुलने के बाद व्यक्ति में यह क्षमता आ जाती है कि वह हर स्थिति में सही और गलत का फर्क समझ सके। वह किसी के बहकावे में नहीं आता और अपने विवेक से निर्णय लेता है। इससे उसका जीवन सरल और संतुलित बन जाता है। मन की आंख खोलने का सबसे सरल और प्रभावी तरीका है सत्संग और अच्छे विचारों का श्रवण। जब हम नियमित रूप से सकारात्मक और सच्चे विचारों को सुनते और समझते हैं, तो हमारी अंदरूनी दृष्टि जागृत होती है। इससे हम जीवन के सही मार्ग पर चल पाते हैं और अपने जीवन को सफल और सार्थक बना सकते हैं।

ये भी पढ़ें -  ब्राह्मण होने का असली अर्थ क्या है? श्याम सुंदर पाराशर जी महाराज ने बताया महत्व

ये भी देखें

Swami Raghavacharya Ji Maharaj
स्वामी श्री राघवाचार्य जी महाराज
18 June 2026
Swami Gyananand Ji Maharaj
स्वामी श्री ज्ञानानंद जी महाराज
18 June 2026
Jagadguru Rambhadracharya Ji
श्री रामभद्राचार्य जी महाराज
18 June 2026
Sadhvi Krishnapriya ji
कथावाचक साध्वी कृष्णप्रिया जी
18 June 2026
Devi Neha Saraswat
देवी नेहा निधि सारस्वत
18 June 2026

धार्मिक कहानियां सुनने और पढ़ने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ें।

WhatsApp Channel