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Devkinandan Thakur Ji Maharaj: शिवलिंग पर शमी पत्र चढ़ाने क्या है सही विधि? देवकीनंदन ठाकुर जी ने बताया महत्व

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
नीरज के. पटेल
सार

Shami Patra Importance: भगवान शिव अपने भक्तों पर बहुत जल्दी प्रसन्न होने वाले देवता हैं। जो मनुष्य श्रद्धा और भक्ति के साथ उनकी पूजा करता है, उसे भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है। 
 

Devkinandan Thakur Ji Maharaj
Shami Patra on Shivling: सनातन धर्म में भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए भक्त जल, बेलपत्र, धतूरा, आक और शमी पत्र जैसी अनेक पूजन सामग्री अर्पित करते हैं। शमी पत्र को भगवान शिव को अर्पित करने की परंपरा भी अत्यंत श्रद्धापूर्ण मानी जाती है। देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज ने शिवलिंग पर शमी पत्र चढ़ाने की विधि और इसके महत्व के बारे में बताया है।

देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज के अनुसार भगवान शिव की पूजा में शमी पत्र का विशेष महत्व है। मान्यता है कि जो भक्त श्रद्धा और विधि-विधान के साथ शमी पत्र भगवान शंकर को अर्पित करता है, भोलेनाथ उस पर अपनी कृपा बरसाते हैं। शमी पत्र अर्पित करने का उद्देश्य केवल पूजा की सामग्री चढ़ाना नहीं, बल्कि भगवान के प्रति अपनी श्रद्धा और समर्पण व्यक्त करना भी है।

कहा गया है कि भगवान शिव अपने भक्तों की सच्ची भक्ति से शीघ्र प्रसन्न होते हैं। इसलिए शमी पत्र चढ़ाते समय मन में श्रद्धा, विश्वास और भगवान शिव का स्मरण होना सबसे आवश्यक है।

शमी पत्र चढ़ाने की सही विधि

शिवलिंग पर शमी पत्र चढ़ाने से पहले पूजा की विधि को समझना आवश्यक है। सबसे पहले भगवान शिव का जलाभिषेक करना चाहिए। श्रद्धापूर्वक शिवलिंग पर जल अर्पित करने के बाद भगवान शिव को बेलपत्र चढ़ाना चाहिए। इसके बाद शमी पत्र अर्पित करने की बारी आती है। शमी पत्र को सीधे शिवलिंग पर चढ़ाने के बजाय पहले एक विशेष विधि का पालन करने की बात कही गई है। शमी पत्र को हाथ में लेकर सबसे पहले उसे शिवलिंग की जलहरी से स्पर्श कराना चाहिए। जलहरी को माता पार्वती का स्वरूप माना गया है। इसलिए शमी पत्र को पहले जलहरी से स्पर्श कराने के बाद उसे भगवान शिव के ऊपर अर्पित करना चाहिए।

पूजा के समय इस मंत्र का करें जाप

शमी पत्र को भगवान शिव पर चढ़ाते समय मन को शांत और एकाग्र रखना चाहिए। इस दौरान भगवान शिव का स्मरण करते हुए श्रद्धापूर्वक “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करना चाहिए। मंत्र का उच्चारण करते हुए शमी पत्र अर्पित करने से पूजा के प्रति भक्ति और समर्पण का भाव और अधिक गहरा होता है। पूजा में केवल विधि का पालन करना ही पर्याप्त नहीं माना जाता, बल्कि मन में भगवान के प्रति सच्ची श्रद्धा और विश्वास होना भी आवश्यक है। इसलिए शमी पत्र अर्पित करते समय अपनी मनोकामना भगवान शिव के चरणों में समर्पित करनी चाहिए।

कैसे पूरी होती हैं मनोकामनाएं?

भगवान शिव अपने भक्तों पर बहुत जल्दी प्रसन्न होने वाले देवता हैं। जो मनुष्य श्रद्धा और भक्ति के साथ उनकी पूजा करता है, उसे भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है। शमी पत्र अर्पित करते समय यदि भक्त पूरे विश्वास के साथ “ॐ नमः शिवाय” का जाप करता है और अपनी मनोकामना भोलेनाथ को समर्पित करता है, तो भगवान शिव उसकी प्रार्थना अवश्य सुनते हैं, ऐसी धार्मिक मान्यता है। इसलिए अगली बार जब आप भगवान शिव की पूजा करें, तो जलाभिषेक के बाद बेलपत्र और फिर शमी पत्र श्रद्धापूर्वक अर्पित करें। शमी पत्र को पहले जलहरी से स्पर्श कराकर भगवान शिव को चढ़ाएं और साथ में “ॐ नमः शिवाय” का जाप करें। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पूजा पूरी श्रद्धा, विश्वास और पवित्र भाव से की जाए। यही सच्ची शिवभक्ति है।

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