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Swami Chinmayanand Bapu: आजकल भक्ति में भी दिखने लगा है स्वार्थ, स्वामी चिन्मयानंद बापू ने बताया कारण

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
नीरज के. पटेल
सार

Belief in God: भगवान को केवल अपनी मनोकामनाएं पूरी करने का माध्यम नहीं बनाना चाहिए। हनुमान जी के प्रति हमारी श्रद्धा हर परिस्थिति में बनी रहनी चाहिए, चाहे हमारी इच्छा पूरी हो या नहीं। 

Swami Chinmayanand Bapu
Devotion and Spirituality: आज के समय में मनुष्य के जीवन में भक्ति और आस्था का विशेष महत्व है। लोग भगवान के दर्शन करने, पूजा-पाठ करने और अपनी मनोकामनाएं पूरी होने की आशा लेकर मंदिर जाते हैं। लेकिन कई बार भक्ति के पीछे छिपा स्वार्थ भी दिखाई देने लगता है। मनुष्य भगवान से प्रेम करने के बजाय उनसे अपनी इच्छाएं पूरी कराने की अपेक्षा करने लगता है। इसी विषय पर स्वामी चिन्मयानंद बापू ने अपने विचार व्यक्त करते हुए बताया कि आजकल लोगों की भक्ति में भी स्वार्थ दिखाई देने लगा है।

स्वामी चिन्मयानंद बापू के अनुसार, आजकल बहुत से लोग उसी मंदिर में जाना पसंद करते हैं, जहां उन्हें लगता है कि भगवान अधिक चमत्कार करते हैं। यदि किसी व्यक्ति को पता चलता है कि किसी विशेष मंदिर के हनुमान जी के यहां मनोकामनाएं जल्दी पूरी होती हैं, तो वह उसी मंदिर में जाने लगता है। भले ही रास्ते में हनुमान जी के 25 दूसरे मंदिर क्यों न पड़ जाएं, लेकिन वह उन सभी मंदिरों को छोड़कर उसी मंदिर में पहुंचता है, जहां उसे अधिक चमत्कार होने की उम्मीद होती है।

ऐसा करते समय व्यक्ति यह भूल जाता है कि भगवान के प्रति उसकी श्रद्धा कितनी सच्ची है। वह भगवान से प्रेम करने के बजाय उनके चमत्कारों और उनसे मिलने वाले लाभों को अधिक महत्व देने लगता है। इस तरह धीरे-धीरे भक्ति का उद्देश्य भी बदलने लगता है।

श्रद्धा का महत्व है सबसे बड़ा

स्वामी चिन्मयानंद बापू बताते हैं कि हनुमान जी किसी एक मंदिर तक सीमित नहीं हैं। वे हर जगह हैं और अपने भक्तों के हृदय में भी विराजमान हैं। किसी एक मंदिर में हनुमान जी अधिक शक्तिशाली हैं और दूसरे मंदिर में कम, ऐसा मानना उचित नहीं है। भगवान के प्रति सच्ची श्रद्धा और विश्वास ही भक्ति का आधार है। कई बार किसी मंदिर में भक्तों को अपनी मनोकामनाएं पूरी होने का अनुभव होता है। इससे उनके मन में उस स्थान के प्रति विशेष आस्था पैदा हो जाती है। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि दूसरे मंदिरों में विराजमान हनुमान जी की महिमा कम है। भगवान के प्रति प्रेम किसी चमत्कार या लाभ पर निर्भर नहीं होना चाहिए।

भगवान की उपस्थिति

स्वामी चिन्मयानंद बापू के विचारों का सार यह है कि जिस हनुमान जी को हम मंदिर में पूजते हैं, वे हमारे घर और हृदय में भी मौजूद हैं। जरूरत केवल अपनी श्रद्धा को मजबूत करने की है। यदि व्यक्ति सच्चे मन से भगवान का स्मरण करे, उनके प्रति विश्वास रखे और अपने जीवन में अच्छे कर्मों को महत्व दे, तो वह अपने घर में भी भक्ति और शांति का अनुभव कर सकता है। भगवान की पूजा केवल अपनी इच्छाएं पूरी कराने के लिए नहीं करनी चाहिए। सच्ची भक्ति वह है, जिसमें प्रेम, विश्वास, समर्पण और निस्वार्थ भाव हो। जब व्यक्ति चमत्कार की अपेक्षा छोड़कर भगवान से सच्चा संबंध जोड़ता है, तभी उसकी भक्ति का वास्तविक अर्थ समझ में आता है।

भक्ति में स्वार्थ नहीं, प्रेम होना चाहिए

स्वामी चिन्मयानंद बापू का संदेश है कि भगवान को केवल अपनी मनोकामनाएं पूरी करने का माध्यम नहीं बनाना चाहिए। हनुमान जी के प्रति हमारी श्रद्धा हर परिस्थिति में बनी रहनी चाहिए, चाहे हमारी इच्छा पूरी हो या नहीं। सच्चा भक्त भगवान से केवल मांगता ही नहीं, बल्कि उनके प्रति प्रेम और विश्वास भी रखता है। इसलिए भक्ति को चमत्कार से नहीं, बल्कि अपने भाव, आचरण और समर्पण से पहचानना चाहिए।

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स्वामी चिन्मयानंद बापू
जानिए गुरूजी के बारे मेंस्वामी चिन्मयानंद बापू

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