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Swami Avdheshanand Giri Maharaj: भगवान का नाम कैसे है तारक मंत्र? स्वामी अवधेशानंद गिरी जी महाराज ने बताया

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
स्वामी अवधेशानंद गिरी जी महाराज
सार

Spiritual Discourse: भगवान नारायण का नाम स्वयं में एक महान तारक मंत्र है। केवल श्रद्धा के साथ "नारायण" नाम का स्मरण भी जीवन में कल्याणकारी प्रभाव ला सकता है। 

Swami Avdheshanand Giri Ji Maharaj
Narayan Mantra Imortance: भारतीय सनातन परंपरा में भगवान के नाम का जप अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। संत-महात्माओं ने सदियों से यह बताया है कि भगवान का नाम केवल एक शब्द नहीं, बल्कि दिव्य शक्ति का स्रोत है। स्वामी अवधेशानंद गिरी जी महाराज भी अपने प्रवचनों में भगवान नारायण के नाम की महिमा का वर्णन करते हुए बताते हैं कि "नारायण" नाम स्वयं में एक तारक मंत्र है। तारक मंत्र का अर्थ है ऐसा मंत्र जो जीव को संसार के दुखों, बंधनों और अज्ञान से पार लगाकर मोक्ष की ओर ले जाए।

स्वामी जी बताते हैं कि हमारे प्राचीन महात्मा कहा करते थे कि यदि किसी व्यक्ति के मुख से केवल चार बार भी "नारायण" का उच्चारण हो जाए- नारायण, नारायण, नारायण, नारायण- तो भी यह अत्यंत कल्याणकारी होता है। इसका कारण यह है कि नारायण नाम में स्वयं भगवान की दिव्य शक्ति समाहित है। यह केवल एक संबोधन नहीं, बल्कि एक पूर्ण मंत्र है। जब कोई श्रद्धा और विश्वास के साथ भगवान का नाम लेता है, तब उसके भीतर सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और मन में शांति तथा पवित्रता का अनुभव होने लगता है।

क्यों कहा जाता है इसे तारक मंत्र?

शास्त्रों में "ॐ नमो नारायणाय" को प्रसिद्ध तारक मंत्र बताया गया है। स्वामी जी कहते हैं कि यह मंत्र जीव को आध्यात्मिक उन्नति की ओर ले जाता है। "तारक" शब्द का अर्थ है पार लगाने वाला। जैसे नाव नदी के एक किनारे से दूसरे किनारे तक पहुंचाती है, उसी प्रकार भगवान का नाम जीव को संसार रूपी भवसागर से पार लगाने का कार्य करता है। इसलिए नारायण मंत्र को सामान्य मंत्र नहीं माना गया, बल्कि इसे मुक्ति प्रदान करने वाला मंत्र कहा गया है।

सिद्ध पुरुष और मंत्र की शक्ति

स्वामी अवधेशानंद गिरी जी महाराज एक रोचक आध्यात्मिक तथ्य का उल्लेख करते हैं कि शास्त्रों में ऐसे सिद्ध पुरुषों और योगियों का वर्णन मिलता है जो मंत्र शक्ति के बल पर असाधारण कार्य कर सकते हैं। उन्हें "खेचर" कहा गया है। खेचर का अर्थ है वे साधक जो सूक्ष्म शक्ति के माध्यम से आकाश मार्ग में विचरण करने की क्षमता प्राप्त कर लेते हैं। यह कोई सामान्य उपलब्धि नहीं होती, बल्कि वर्षों की तपस्या, साधना और मंत्र-जप का परिणाम मानी जाती है। स्वामी जी बताते हैं कि ऐसे सिद्ध पुरुष मंत्रबल के कारण विभिन्न रूप धारण करने या अचानक कहीं प्रकट होने जैसी दिव्य क्षमताएं प्राप्त कर लेते हैं। यद्यपि सामान्य व्यक्ति के लिए इन बातों को समझना कठिन हो सकता है, लेकिन आध्यात्मिक साहित्य और संत परंपरा में ऐसे अनेक उदाहरण मिलते हैं। इन सभी सिद्धियों का मूल आधार मंत्र साधना और ईश्वर के प्रति अखंड समर्पण माना गया है।

गुरु प्रदत्त मंत्र का महत्व

नारायण मंत्र की महिमा के साथ-साथ स्वामी जी गुरु द्वारा दिए गए मंत्र की महत्ता पर भी विशेष बल देते हैं। गुरु केवल मंत्र नहीं देते, बल्कि अपनी आध्यात्मिक शक्ति और कृपा का भी संचार करते हैं। जब शिष्य श्रद्धा, विश्वास और नियमितता के साथ गुरु प्रदत्त मंत्र का जप करता है, तब उसके जीवन में आध्यात्मिक परिवर्तन प्रारंभ होने लगते हैं। गुरु का दिया हुआ मंत्र साधक के लिए एक मार्गदर्शक दीपक की तरह होता है, जो उसे अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाता है। निरंतर जप और साधना के द्वारा साधक आत्मिक शांति, मानसिक स्थिरता और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त कर सकता है।

जीवन में कल्याणकारी प्रभाव 

स्वामी अवधेशानंद गिरी जी महाराज के अनुसार भगवान नारायण का नाम स्वयं में एक महान तारक मंत्र है। केवल श्रद्धा के साथ "नारायण" नाम का स्मरण भी जीवन में कल्याणकारी प्रभाव ला सकता है। साथ ही, गुरु द्वारा प्राप्त मंत्र का नियमित जप साधक को आध्यात्मिक ऊंचाइयों तक पहुंचाने में समर्थ माना गया है। यही कारण है कि संत-महात्मा सदैव भगवान के नाम-स्मरण, मंत्र-जप और गुरु-भक्ति को जीवन का अमूल्य साधन बताते हैं। भगवान का नाम केवल शब्द नहीं, बल्कि आत्मा को परमात्मा से जोड़ने वाला दिव्य सेतु है।

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