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Devkinandan Thakur Ji Maharaj: निर्जला एकादशी पर किन वस्तुओं का दान है अत्यंत शुभ? देवकीनंदन ठाकुर जी ने बताया

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
श्री देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज
सार

Nirjala Ekadashi: निर्जला एकादशी केवल उपवास का पर्व नहीं है, बल्कि दान, सेवा, भक्ति और धर्म का महान अवसर भी है। इस दिन अन्न, वस्त्र, जल, शैया, सुंदर आसन, कमंडल तथा अन्य उपयोगी वस्तुओं का दान करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है। 
 

Devkinandan Thakur Ji Maharaj
Nirjala Ekadashi Donation: निर्जला एकादशी हिंदू धर्म की सबसे महत्वपूर्ण और पुण्यदायी एकादशियों में से एक मानी जाती है। यह ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को आती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन व्रत रखने और भगवान विष्णु की पूजा करने से वर्ष भर की सभी एकादशियों का फल प्राप्त होता है। प्रसिद्ध कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर के अनुसार निर्जला एकादशी के दिन श्रद्धा और भक्ति के साथ कुछ विशेष वस्तुओं का दान करने से व्यक्ति को महान पुण्य की प्राप्ति होती है तथा भगवान विष्णु की विशेष कृपा मिलती है।

निर्जला एकादशी को भीमसेनी एकादशी भी कहा जाता है। इस दिन भक्त बिना जल ग्रहण किए उपवास रखते हैं और भगवान विष्णु का स्मरण करते हैं। शास्त्रों में कहा गया है कि जो व्यक्ति श्रद्धापूर्वक इस व्रत का पालन करता है, उसके अनेक पाप नष्ट हो जाते हैं और जीवन में सुख, शांति तथा समृद्धि का आगमन होता है। यह दिन दान, जप, तप और भगवान के नाम-स्मरण के लिए विशेष रूप से श्रेष्ठ माना गया है।

अन्न का दान

निर्जला एकादशी के दिन अन्न का दान अत्यंत शुभ माना गया है। जरूरतमंद लोगों को भोजन, अनाज या अन्न सामग्री दान करने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं। धर्मग्रंथों में अन्नदान को सबसे बड़ा दान कहा गया है क्योंकि इससे किसी भूखे व्यक्ति की भूख मिटती है और उसे जीवन का आधार मिलता है। इस दिन किया गया अन्नदान अनेक गुना फल देने वाला माना जाता है।

वस्त्र दान का महत्व

इस पावन अवसर पर वस्त्र दान करने का भी विशेष महत्व बताया गया है। गरीब और जरूरतमंद लोगों को नए या उपयोग योग्य स्वच्छ वस्त्र दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। माना जाता है कि वस्त्र दान से व्यक्ति के जीवन में सुख और सम्मान बढ़ता है तथा उसके कष्ट दूर होते हैं।

जल दान का विशेष फल

निर्जला एकादशी गर्मी के मौसम में आती है, इसलिए जल दान का महत्व और भी बढ़ जाता है। प्यासे लोगों को ठंडा जल, मटके, घड़े या जल से संबंधित सामग्री दान करना बहुत पुण्यकारी माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि जल दान करने वाले व्यक्ति को ईश्वर की विशेष कृपा प्राप्त होती है और उसके जीवन की अनेक बाधाएं दूर होती हैं।

शैया, आसन और कमंडल का दान

देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज के अनुसार इस दिन शैया अर्थात बिस्तर, सुंदर आसन तथा कमंडल का दान भी शुभ माना गया है। शैया दान से आराम और सुख का आशीर्वाद मिलता है। वहीं आसन और कमंडल का दान साधु-संतों तथा जरूरतमंद लोगों के लिए उपयोगी माना जाता है। इन वस्तुओं का दान धार्मिक दृष्टि से अत्यंत फलदायी बताया गया है।

जूते-चप्पल और उपयोगी वस्तुओं का दान

निर्जला एकादशी के अवसर पर जूते-चप्पल तथा दैनिक जीवन में उपयोग आने वाली आवश्यक वस्तुओं का दान भी किया जा सकता है। ऐसे दान से जरूरतमंद लोगों को सहायता मिलती है और दानकर्ता को पुण्य की प्राप्ति होती है। दान का वास्तविक उद्देश्य दूसरों के जीवन में सुविधा और सुख पहुंचाना माना गया है।

एकादशी कथा सुनने और सुनाने का महत्व

शास्त्रों में केवल व्रत और दान ही नहीं, बल्कि एकादशी की कथा सुनने और सुनाने का भी विशेष महत्व बताया गया है। कहा जाता है कि जो व्यक्ति भक्ति भाव से निर्जला एकादशी की महिमा और पवित्र कथा को सुनता या दूसरों को सुनाता है, उसे महान पुण्य प्राप्त होता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार ऐसी श्रद्धा रखने वाले भक्त को स्वर्ग लोक की प्राप्ति होती है और भगवान विष्णु का आशीर्वाद सदैव बना रहता है।

कथा श्रवण से मिलता है महान पुण्य

धर्मग्रंथों में वर्णन मिलता है कि चतुर्दशी युक्त अमावस्या के दिन सूर्यग्रहण के समय श्राद्ध करने से जो पुण्य प्राप्त होता है, वही पुण्य निर्जला एकादशी की कथा को श्रद्धापूर्वक सुनने से भी प्राप्त हो सकता है। इसलिए इस दिन कथा श्रवण को अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। भक्तों को चाहिए कि वे व्रत के साथ-साथ भगवान की महिमा का श्रवण करें और दूसरों को भी इसके महत्व से अवगत कराएं।

दान करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति 

निर्जला एकादशी केवल उपवास का पर्व नहीं है, बल्कि दान, सेवा, भक्ति और धर्म का महान अवसर भी है। इस दिन अन्न, वस्त्र, जल, शैया, सुंदर आसन, कमंडल तथा अन्य उपयोगी वस्तुओं का दान करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है। साथ ही, एकादशी की कथा सुनना और सुनाना भी अत्यंत फलदायी माना गया है। श्रद्धा, विश्वास और भक्ति के साथ किए गए ये सभी कार्य व्यक्ति के जीवन में सुख, शांति और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करते हैं। 

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