विज्ञापन
Home  dharm  saint stories  acharya ramchandra das ji maharaj told how can these five afflictions of life be dispelled

Acharya Ramchandra Das Ji Maharaj: जीवन के ये 5 क्लेश कैसे होंगे दूर? आचार्य रामचंद्र दास जी महाराज ने बताया

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
आचार्य श्री रामचंद्र दास जी महाराज
सार

Indian Philosophy: पांच क्लेश और छह विकार मानव जीवन की आंतरिक समस्याएं हैं जो हमें दुखी बनाती हैं, लेकिन सही ज्ञान, संयम और भक्ति के मार्ग से इन्हें नियंत्रित किया जा सकता है।

Acharya Ramchandra Das Ji Maharaj
Spiritual Knowledge: हमारे जीवन में कई प्रकार की मानसिक और आंतरिक परेशानियां होती हैं जो हमें शांति से जीने नहीं देतीं। भारतीय दर्शन में इन्हें दो भागों में समझाया गया है- पांच क्लेश और छह विकार। क्लेश का अर्थ है वे मानसिक बंधन जो हमें सत्य और शांति से दूर रखते हैं। विकार का अर्थ है वे बुरी आदतें या भावनाएं जो हमारे स्वभाव को असंतुलित कर देती हैं। आचार्य परंपरा में बताया गया है कि ये दोनों मिलकर मनुष्य को दुख, तनाव और भ्रम की स्थिति में रखते हैं।

पांच क्लेशों का अर्थ और प्रभाव

पांच क्लेश इस प्रकार बताए गए हैं- अविद्या, अस्मिता, राग, द्वेष और अभिनिवेश

अविद्या का अर्थ है अज्ञानता। जब मनुष्य को अपने वास्तविक स्वरूप और सत्य का ज्ञान नहीं होता, तब वह गलत रास्तों पर चल पड़ता है। अस्मिता का अर्थ है अहंकार, यानी स्वयं को सबसे ऊपर समझना। यह भावना व्यक्ति को दूसरों से दूर कर देती है। 

राग का अर्थ है अत्यधिक लगाव। जब हम किसी वस्तु, व्यक्ति या स्थिति से बहुत ज्यादा जुड़ जाते हैं, तो उसके न मिलने पर दुख होता है। द्वेष का अर्थ है नफरत या घृणा। यह भावना मन में अशांति पैदा करती है और संबंधों को खराब करती है। अभिनिवेश का अर्थ है मृत्यु का भय या अत्यधिक असुरक्षा की भावना, जो मनुष्य को हमेशा चिंता में रखती है।

छह विकारों का स्वरूप

छह विकार इस प्रकार बताए गए हैं- काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद और मात्सर्य

काम का अर्थ है अनियंत्रित इच्छाएं। जब इच्छाएं सीमित न हों, तो मनुष्य कभी संतुष्ट नहीं हो पाता। क्रोध का अर्थ है गुस्सा, जो विवेक को खत्म कर देता है। लोभ का अर्थ है लालच, जो व्यक्ति को गलत कामों की ओर ले जाता है।

मोह का अर्थ है अत्यधिक लगाव और भ्रम, जिससे सही और गलत का अंतर धुंधला हो जाता है। मद का अर्थ है घमंड या नशा, जिसमें व्यक्ति अपनी शक्ति या स्थिति पर गर्व करने लगता है। मात्सर्य का अर्थ है ईर्ष्या, यानी दूसरों की उन्नति देखकर दुखी होना।

जीवन में इनका प्रभाव

जब ये पांच क्लेश और छह विकार मन में सक्रिय रहते हैं, तो व्यक्ति शांति से नहीं रह पाता। उसके निर्णय गलत हो सकते हैं, संबंध बिगड़ सकते हैं और मन हमेशा बेचैन रहता है। यह स्थिति धीरे-धीरे जीवन में दुख और असंतोष बढ़ा देती है।

समाधान और आध्यात्मिक मार्ग

आचार्य परंपरा में बताया गया है कि इन सभी क्लेशों और विकारों को समाप्त करना सामान्य मनुष्य के लिए कठिन होता है, लेकिन भक्ति और आध्यात्मिक साधना के माध्यम से यह संभव है। कहा जाता है कि हनुमान जी महाराज, जिन्हें ग्यारह रुद्रों का अवतार माना गया है, उनकी भक्ति से मनुष्य के भीतर शक्ति, संयम और विवेक जाग्रत होता है। हनुमान जी की भक्ति से मन में साहस आता है और नकारात्मक भावनाएं धीरे-धीरे कम होने लगती हैं। नियमित प्रार्थना, राम नाम का जप और सत्संग में भाग लेने से मन शुद्ध होता है और इन क्लेशों का प्रभाव घटता है।

सकारात्मक सोच और आध्यात्मिकता

पांच क्लेश और छह विकार मानव जीवन की आंतरिक समस्याएं हैं जो हमें दुखी बनाती हैं, लेकिन सही ज्ञान, संयम और भक्ति के मार्ग से इन्हें नियंत्रित किया जा सकता है। जब मनुष्य अपने जीवन में सकारात्मक सोच और आध्यात्मिकता को अपनाता है, तो वह धीरे-धीरे इन बंधनों से मुक्त होकर शांति और आनंद की ओर बढ़ता है।

ये भी पढ़ें -  स्नान के बाद भी अधूरी रह जाती है पवित्रता, पुण्डरीक गोस्वामी जी महाराज ने बताया कैसे

ये भी देखें

Swami Avdheshanand Giri Ji Maharaj
स्वामी अवधेशानंद गिरी जी महाराज
18 July 2026
Rajan Ji Maharaj
श्री राजन जी महाराज
18 July 2026
Indresh Upadhyay Ji Maharaj
कथावाचक इंद्रेश उपाध्याय जी महाराज
17 July 2026
Sadhvi Krishnapriya ji
कथावाचक साध्वी कृष्णप्रिया जी
17 July 2026
Shivam Sadhak Ji Maharaj
नीरज के. पटेल
17 July 2026

धार्मिक कहानियां सुनने और पढ़ने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ें।

WhatsApp Channel