विज्ञापन
Home  dharm  saint stories  shivam sadhak ji maharaj told why does lord jagannath fall ill every year a wonderful and touching mystery

Shivam Sadhak ji Maharaj: भगवान जगन्नाथ हर वर्ष 15 दिन के लिए क्यों पड़ते हैं बीमार? एक अद्भुत और भावुक रहस्य!

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
कथावाचक डॉ. शिवम साधक जी महाराज
सार

Lord Jagannath: भगवान अपने सच्चे भक्तों से असीम प्रेम करते हैं। हालांकि यह कथा धार्मिक परंपरा और लोकमान्यता पर आधारित है, लेकिन इसका संदेश अत्यंत प्रेरणादायक है। 
 

Shivam Sadhak ji Maharaj
Bhagwan Jagannath Ki Mahima: सनातन धर्म में भगवान की अनेक ऐसी लीलाएं हैं, जो भक्तों को प्रेम, करुणा और भक्ति का गहरा संदेश देती हैं। इन्हीं में से एक अद्भुत परंपरा उड़ीसा के पुरी स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर में हर वर्ष देखने को मिलती है। ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और माता सुभद्रा का 108 पवित्र घड़ों के जल से भव्य स्नान कराया जाता है। इस विशेष उत्सव को स्नान यात्रा कहा जाता है। मान्यता है कि इस स्नान के बाद भगवान अस्वस्थ हो जाते हैं और अगले 15 दिनों तक विश्राम करते हैं। इस अवधि को "अनवसर काल" कहा जाता है। इन दिनों मंदिर के पट बंद रहते हैं और भक्तों को भगवान के दर्शन नहीं होते।

इस परंपरा के पीछे एक अत्यंत भावुक कथा सुनाई जाती है। कहा जाता है कि पुरी में माधव दास नाम के भगवान जगन्नाथ के एक महान भक्त रहते थे। उनका इस संसार में कोई अपना नहीं था। वे अकेले रहते थे और अपना पूरा जीवन भगवान की भक्ति में बिताते थे। उनके लिए भगवान ही उनके मित्र, परिवार और सहारा थे।

कथावाचक डॉ. शिवम साधक जी महाराज कहते हैं कि एक समय माधव दास जी गंभीर अतिसार यानी उल्टी-दस्त की बीमारी से पीड़ित हो गए। उनकी हालत इतनी खराब हो गई कि वे उठने-बैठने में भी असमर्थ हो गए। लोगों ने उनकी सहायता करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने केवल इतना कहा कि मेरे प्रभु जगन्नाथ ही मेरी रक्षा करेंगे।

जब स्वयं भगवान बने सेवक

कथा के अनुसार, जब माधव दास जी की स्थिति अत्यंत गंभीर हो गई, तब भगवान जगन्नाथ अपने भक्त का कष्ट सहन नहीं कर सके। वे एक साधारण सेवक का रूप धारण करके उनके घर पहुंचे। भगवान ने अपने हाथों से उनके वस्त्र धोए, उनके शरीर को साफ किया और दिन-रात उनकी सेवा की। यह दृश्य इस बात का प्रतीक है कि भगवान अपने सच्चे भक्त के लिए किसी भी रूप में आ सकते हैं और उसकी सेवा करने में भी संकोच नहीं करते।

भगवान ने दिया कर्म का महान संदेश

कुछ समय बाद जब माधव दास जी को होश आया, तो उन्होंने अपने सामने स्वयं भगवान को देखा। वे भावुक होकर बोले, "प्रभु! आप तो संसार के स्वामी हैं। यदि आप चाहते तो मेरा रोग एक पल में समाप्त कर सकते थे। फिर आपने मेरी सेवा क्यों की?" तब भगवान ने अत्यंत गहरा उत्तर दिया। उन्होंने कहा, "हे माधव! मैं अपने भक्त का दुख नहीं देख सकता, लेकिन हर जीव को अपने कर्मों का फल अवश्य भोगना पड़ता है। यदि मैं तुम्हारा यह रोग अभी समाप्त कर दूं, तो तुम्हें इसका फल भोगने के लिए फिर एक नया जन्म लेना पड़ेगा। मैं नहीं चाहता कि मेरा भक्त जन्म और मृत्यु के बंधन में फिर से बंधे।"

भगवान ने अपने ऊपर लिया भक्त का कष्ट

भगवान ने आगे कहा कि माधव दास के प्रारब्ध में अभी 15 दिनों का रोग शेष है। इसलिए वे उस शेष पीड़ा को स्वयं अपने ऊपर ले लेंगे। कथा के अनुसार, तभी से भगवान जगन्नाथ हर वर्ष 15 दिनों के लिए अस्वस्थ होते हैं। यह भगवान के अपने भक्त के प्रति असीम प्रेम और करुणा का प्रतीक माना जाता है।

अनवसर काल की परंपरा

इसी विश्वास के कारण स्नान यात्रा के बाद भगवान को विश्राम दिया जाता है। इन 15 दिनों तक मंदिर के पट बंद रहते हैं। भगवान को छप्पन भोग नहीं लगाया जाता, बल्कि उन्हें आयुर्वेदिक काढ़ा, फलों का रस और हल्का भोग अर्पित किया जाता है। भगवान के श्रीविग्रह पर शीतल लेप लगाया जाता है और वैद्य उनकी सेवा करते हैं। यह पूरी परंपरा भगवान की मानवीय लीला और भक्तों के साथ उनके प्रेमपूर्ण संबंध को दर्शाती है।

रथ यात्रा से होता है भक्तों का मिलन

15 दिनों के विश्राम के बाद भगवान पूरी तरह स्वस्थ माने जाते हैं। इसके बाद वे अपने भक्तों को दर्शन देने के लिए भव्य रथ यात्रा पर निकलते हैं। रथ यात्रा केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि भगवान और भक्त के पुनर्मिलन का आनंदमय पर्व भी है। लाखों श्रद्धालु इस शुभ अवसर पर भगवान के दर्शन कर स्वयं को धन्य मानते हैं।

धार्मिक परंपरा और लोकमान्यता 

यह कथा हमें सिखाती है कि भगवान अपने सच्चे भक्तों से असीम प्रेम करते हैं। हालांकि यह कथा धार्मिक परंपरा और लोकमान्यता पर आधारित है, लेकिन इसका संदेश अत्यंत प्रेरणादायक है। यह हमें कर्म, भक्ति, सेवा और भगवान पर अटूट विश्वास का महत्व समझाती है। यही कारण है कि भगवान जगन्नाथ को "भक्तवत्सल" कहा जाता है, जो अपने भक्तों के सुख-दुख में सदैव उनके साथ रहते हैं।

ये भी पढ़ें - योग करने के लिए नहीं मिल रहा समय तो करें ये उपाय, अच्छी रहेगी सेहत!

ये भी देखें

Indresh Upadhyay Ji Maharaj
कथावाचक इंद्रेश उपाध्याय जी महाराज
10 July 2026
Vallabhacharya Ji Maharaj
जगद्गुरु वल्लभाचार्य जी महाराज
10 July 2026
Rasraj ji Maharaj
रसराज जी महाराज
09 July 2026
Rambhadracharya Ji Maharaj
श्री रामभद्राचार्य जी महाराज
09 July 2026
Swami Raghavacharya Ji Maharaj
स्वामी श्री राघवाचार्य जी महाराज
09 July 2026

धार्मिक कहानियां सुनने और पढ़ने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ें।

WhatsApp Channel