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Pradeep Mishra Ji Maharaj: शिव पुराण का लग गया रोग, ऐसा क्यों बोले पंडित प्रदीप मिश्रा जी महाराज?

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
नीरज के. पटेल
सार

Shiv Puran: आज के समय में इंसान अनेक चिंताओं और परेशानियों से घिरा हुआ है। ऐसे समय में शिव पुराण की कथा मन को सहारा देती है। 
 

Pradeep Mishra Ji Maharaj
Mahadev Ki Mahima: पंडित प्रदीप मिश्रा जी महाराज अपने कथा प्रसंगों में अक्सर कहते हैं कि जब किसी व्यक्ति को शिव पुराण सुनने का आनंद और भगवान शिव की कथा का रस लग जाता है, तो फिर मन बार-बार उसी ओर खिंचने लगता है। इसे उन्होंने प्रेम से “शिव पुराण का रोग” कहा है। यह कोई बीमारी नहीं, बल्कि भगवान शिव की भक्ति में लग जाने वाली ऐसी लगन है, जिसे इंसान छोड़ना नहीं चाहता। जिस प्रकार किसी को अच्छी चीज की आदत लग जाए तो उसका मन बार-बार उसी को पाने के लिए करता है, उसी प्रकार शिव कथा सुनने के बाद मन को शांति और आनंद का अनुभव होता है।

शिव पुराण केवल कथा सुनने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह जीवन को सही दिशा देने वाली आध्यात्मिक शिक्षा भी है। भगवान शिव की कथाओं में त्याग, करुणा, प्रेम, धैर्य और सत्य का संदेश मिलता है। जब व्यक्ति श्रद्धा से कथा सुनता है तो उसके मन में अच्छे विचार आने लगते हैं। धीरे-धीरे क्रोध कम होने लगता है, गलत कार्यों से मन हटने लगता है और भगवान के प्रति विश्वास मजबूत होने लगता है।

छूटती नहीं है यह लगन 

“शिव पुराण का लग गया रोग, यह बीमारी है, लग जाती है तो छूटेगी नहीं”- इस भाव का अर्थ यही है कि जब मनुष्य को भगवान शिव की भक्ति का सच्चा आनंद मिल जाता है, तब संसार की अनेक परेशानियों के बीच भी उसका मन शिव नाम और शिव कथा में शांति खोजने लगता है। वह मंदिर जाना, भगवान का स्मरण करना और कथा सुनना अपने जीवन का हिस्सा बना लेता है।

कथा से मिलता है जीवन का सहारा

आज के समय में इंसान अनेक चिंताओं और परेशानियों से घिरा हुआ है। ऐसे समय में शिव पुराण की कथा मन को सहारा देती है। भगवान शिव की भक्ति हमें सिखाती है कि कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य बनाए रखना चाहिए और विश्वास नहीं छोड़ना चाहिए। शिव नाम का स्मरण मन को सकारात्मक बनाता है और भीतर से मजबूत करने की प्रेरणा देता है।

जीवन में उतारें शिव की भक्ति

यदि किसी के जीवन में शिव पुराण सुनने की लगन लग जाए, तो उसे यह सौभाग्य समझना चाहिए। भगवान शिव की कथा को श्रद्धा से सुनें, उसके संदेश को अपने जीवन में उतारें और प्रेम से “हर हर महादेव” का स्मरण करें। यही शिव पुराण की भक्ति का सुंदर भाव है कि कथा कानों से शुरू होकर धीरे-धीरे मन और जीवन का हिस्सा बन जाए।

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