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Pandit Pradeep Mishra Ji Maharaj: नागपंचमी के दिन क्या करें और क्या नहीं? पंडित प्रदीप मिश्रा जी ने बताए उपाय

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
पंडित प्रदीप मिश्रा जी महाराज
सार

Religious Remedies: किसी भी पूजा या उपाय का उद्देश्य केवल धन प्राप्त करना नहीं, बल्कि भगवान शिव के प्रति भक्ति, विश्वास और समर्पण रखना होना चाहिए। नागपंचमी के दिन भगवान शिव और नाग देवता का स्मरण करते हुए सच्चे मन से पूजा करें और अपने परिवार की सुख-शांति की प्रार्थना करें। 

Pandit Pradeep Mishra Ji Maharaj
Sawan Somwar Nag Panchami: हिंदू धर्म में सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित माना जाता है। इस पूरे महीने में शिवजी की पूजा, अभिषेक और आराधना करने से भक्तों को विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। सावन में आने वाली नागपंचमी का भी अपना अलग धार्मिक महत्व है। नागपंचमी के दिन भगवान शिव और नाग देवता की पूजा करने की परंपरा है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और भक्ति के साथ किए गए उपाय जीवन में सुख-समृद्धि और भगवान शिव का आशीर्वाद लेकर आते हैं।

पंडित प्रदीप मिश्रा जी महाराज का कहना है कि नव निधियों में एक निधि को बहुत ही श्रेष्ठ और प्रभावशाली माना गया है, जिसे नील निधि कहा जाता है। सामान्य रूप से भक्त भगवान से अष्ट सिद्धि और नव निधि की कामना करते हैं, लेकिन नील निधि का संबंध भगवान शिव की विशेष कृपा से बताया गया है। मान्यता के अनुसार यदि व्यक्ति नील निधि के भाव से भगवान शिव की पूजा करता है तो उसके जीवन में धन-धान्य और समृद्धि की कमी नहीं रहती।

सोमवार और नागपंचमी का संयोग

सावन के महीने में सोमवार का दिन भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। ऐसे में यदि सावन के सोमवार के दिन ही नागपंचमी का पर्व पड़ जाए तो इस संयोग को और भी शुभ माना जाता है। इस दिन भगवान शिव की पूजा करने से भक्त को विशेष फल मिलने की मान्यता है। पंडित प्रदीप मिश्रा जी महाराज ने इसी विशेष अवसर पर एक सरल उपाय बताया है, जिसमें नील वर्ण के कमल का विशेष महत्व बताया गया है।

भगवान शिव को नील कमल अर्पित करें

बताया गया है कि यदि सावन के सोमवार के दिन नागपंचमी का पर्व पड़ता है, तो इस दिन भगवान शिव को नील वर्ण का कमल अर्पित करना चाहिए। यह कमल हल्के नीले या नीले-गुलाबी रंग का हो सकता है। भक्त को श्रद्धा और विश्वास के साथ इस कमल को भगवान शिव के चरणों में समर्पित करना चाहिए। कमल अर्पित करते समय मन में यह भाव रखना चाहिए कि हे भोले बाबा, आपके आशीर्वाद से मेरे जीवन की सभी निधियां नील निधि में समाहित हों और मेरे घर-परिवार पर आपकी कृपा बनी रहे। इस भावना के साथ भगवान शिव को कमल अर्पित करना भक्ति और समर्पण का प्रतीक माना गया है।

पूजा के बाद क्या करना है?

पंडित प्रदीप मिश्रा जी महाराज के बताए अनुसार भगवान शिव को कमल अर्पित करने के बाद उस कमल दल को शिव मंदिर से लेकर घर आना चाहिए। इसे भगवान शिव की कृपा और प्रसाद के रूप में श्रद्धा से रखना बताया गया है। इसके पीछे मान्यता है कि भगवान शिव की कृपा से घर में सुख, समृद्धि और धन-धान्य बना रहता है।

उपाय में सबसे जरूरी है श्रद्धा

इस उपाय का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष श्रद्धा और विश्वास है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार किसी भी पूजा या उपाय का उद्देश्य केवल धन प्राप्त करना नहीं, बल्कि भगवान शिव के प्रति भक्ति, विश्वास और समर्पण रखना होना चाहिए। नागपंचमी के दिन भगवान शिव और नाग देवता का स्मरण करते हुए सच्चे मन से पूजा करें और अपने परिवार की सुख-शांति की प्रार्थना करें। ध्यान रखें कि यह उपाय धार्मिक मान्यता और पंडित प्रदीप मिश्रा जी महाराज द्वारा बताए गए कथन पर आधारित है। इसकी सफलता के लिए श्रद्धा को सबसे महत्वपूर्ण माना गया है।

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