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Shri Rambhadracharya Ji:नेत्रहीन होकर भी रच दिए 80 ग्रंथ, जानें कौन हैं श्री रामभद्राचार्य जी महाराज

जीवांजलिPublished by:
राघवेंद्र तिवारी
सार

Jagadguru Shri Rambhadracharya Biography in Hindi: आज हम आपको ऐसे संत के बारे में बताएंगे जो आध्यात्मिक गुरु और जन्म से सूरदास हैं। वे शिक्षक, संस्कृत के विद्वान, दार्शनिक, लेखक, संगीतकार, गायक, नाटककार, बहुभाषाविद और 80 ग्रंथों के रचयिता भी हैं।

Jagadguru Shri Rambhadracharya Biography
Jagadguru Shri Rambhadracharya Biography in Hindi: हिंदू धर्म में साधु-संतों का विशेष महत्व है। सच्चे और तपस्वी साधु-संत अपने उपदेशों और ज्ञान के भंडार से अपने भक्तों को सही राह दिखाकर उनके प्राण बचाते हैं। गोस्वामी तुलसीदास जी ने रामचरितमानस में संतों की महिमा का वर्णन करते हुए कहा है-

अब मोहि भरोस हनुमंता,

बिनु हरिकृपा मिलहिं नहिं संता।


आज हम आपको ऐसे संत के बारे में बताएंगे जो आध्यात्मिक गुरु और जन्म से सूरदास हैं। वे शिक्षक, संस्कृत के विद्वान, दार्शनिक, लेखक, संगीतकार, गायक, नाटककार, बहुभाषाविद और 80 ग्रंथों के रचयिता भी हैं। हम बात कर रहे हैं धर्म चक्रवर्ती तुलसी पीठाधीश्वर और पद्म विभूषण से सम्मानित जगद्गुरु श्री रामभद्राचार्य जी स्वामी महाराज की।

श्री रामभद्राचार्य जी अपने असाधारण कार्यों के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने अपना पूरा जीवन मानव कल्याण के लिए समर्पित कर दिया। अंधे होने के बावजूद उन्होंने अपनी दिव्य दृष्टि से कई भविष्यवाणियां कीं, जिनमें से कई सच हुईं। उन्हें 22 भाषाओं का ज्ञान है और उन्होंने 80 ग्रंथ लिखे हैं। वे दुनिया का पहला दिव्यांग विश्वविद्यालय भी चला रहे हैं। आइए जानते हैं ऐसे महान संत जगद्गुरु श्री रामभद्राचार्य जी के जीवन के तथ्यों के बारे में।

जगद्गुरु श्री रामभद्राचार्य जी से जुड़े रोचक तथ्य

जगद्गुरु श्री रामभद्राचार्य जी महाराज जब मात्र 2 महीने के थे, तब उनकी आंखों की रोशनी चली गई थी। कहा जाता है कि उनकी आंखों में ट्रेकोमा नामक बीमारी हो गई थी।

जगद्गुरु न तो पढ़ सकते हैं, न लिख सकते हैं और न ही ब्रेल लिपि का इस्तेमाल कर सकते हैं। वे केवल सुनकर सीखते हैं और बोलकर अपनी रचनाएं लिखवाते हैं।

अंधे होने के बावजूद उन्हें 22 भाषाओं का ज्ञान है और उन्होंने 80 ग्रंथ लिखे हैं।

वर्ष 2015 में जगद्गुरु श्री रामभद्राचार्य जी को भारत सरकार ने पद्म विभूषण से सम्मानित किया था।

जगद्गुरु श्री रामभद्राचार्य जी वर्तमान में रामानंद संप्रदाय के चार जगद्गुरु रामानंदाचार्यों में से एक हैं। वह 1988 से इस पद पर कार्यरत हैं।

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