facebook pixel
विज्ञापन
Home  dharm  saint stories  chatur narayan ji maharaj told why does a person get trapped in love and illusion in life

Chatur Narayan Ji Maharaj: मोह-माया में क्यों फंसता है इंसान? चतुर नारायण जी महाराज ने बताया धार्मिक कारण

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
नीरज के. पटेल
सार

Spiritual Knowledge: माया और मोह में उलझकर जीवन व्यर्थ नहीं करना चाहिए। संसार में रहते हुए अपने कर्तव्यों का पालन करें, लेकिन मन को भगवान के चरणों से जोड़कर रखें। 

Chatur Narayan Ji Maharaj
Religious Pravachan: चतुर नारायण जी महाराज बताते हैं कि मनुष्य के जीवन में सबसे बड़ी समस्या माया और मोह है। ये दोनों ऐसी शक्तियां हैं, जिनके कारण इंसान अपने वास्तविक स्वरूप और भगवान से दूर होता चला जाता है। मनुष्य जानता है कि संसार नश्वर है, फिर भी वह संसार के आकर्षण में फंसा रहता है। उसे पता है कि यह शरीर हमेशा रहने वाला नहीं है, फिर भी वह ऐसे जीवन जीता है जैसे उसे कभी मृत्यु नहीं आएगी। मोह के कारण मनुष्य बार-बार कहता है कि यह मेरा है, यह मेरा घर है, यह मेरा पुत्र है, यह मेरा परिवार है और यह मेरी संपत्ति है। इसी ‘मैं’ और ‘मेरा’ की भावना को मोह कहा गया है। जब तक मनुष्य इस मोह में बंधा रहता है, तब तक उसके मन को सच्ची शांति नहीं मिल सकती।

धार्मिक दृष्टि से मोह को समस्त व्याधियों का मूल कहा गया है। यहां व्याधि का अर्थ केवल शरीर की बीमारी नहीं, बल्कि मन के दुख, चिंता, भय और अशांति से भी है। जब किसी वस्तु या व्यक्ति के प्रति अत्यधिक मोह हो जाता है, तब उसके खोने का डर भी पैदा होता है। इसी डर के कारण मनुष्य दुखी होता रहता है।

महाराज जी समझाते हैं कि मोह का क्षय ही मोक्ष की दिशा में सबसे बड़ा कदम है। यदि मनुष्य जीते-जी अपने मोह को समाप्त कर ले और भगवान के चरणों में अपना मन लगा दे, तो उसके जीवन का उद्देश्य सार्थक हो जाता है।

माया से बड़े-बड़े ज्ञानी भी नहीं बच पाए

माया का प्रभाव इतना शक्तिशाली बताया गया है कि बड़े-बड़े ऋषि-मुनि और विद्वान भी इसके प्रभाव में आ जाते हैं। जब ज्ञानी और तपस्वी भी माया से प्रभावित हो सकते हैं, तो सामान्य मनुष्य का इससे बचना कितना कठिन है, यह समझा जा सकता है। हम सभी जानते हैं कि संसार असार और परिवर्तनशील है। हम प्रतिदिन लोगों को जन्म लेते और मृत्यु को प्राप्त होते देखते हैं। फिर भी अपने जीवन में यह भावना नहीं ला पाते कि एक दिन हमें भी यह संसार छोड़ना पड़ेगा। यही माया का प्रभाव है। मनुष्य मृत्यु को दूसरों के लिए सत्य मानता है, लेकिन अपने लिए उसे बहुत दूर की बात समझता है।

माया के बंधन से छुड़ा सकते हैं भगवान 

महाराज जी बताते हैं कि जिस शक्ति ने जीव को बांधा है, उसी के स्वामी उसे इस बंधन से मुक्त कर सकते हैं। इसलिए केवल अपनी शक्ति के भरोसे माया से निकलना कठिन है। भगवान श्रीकृष्ण की शरण और उनकी कृपा ही मनुष्य को माया के बंधन से बाहर निकाल सकती है। इसी भावना से शौनक जी महाराज जैसे भक्त ऐसी कथा सुनने की इच्छा करते हैं, जो मनुष्य के माया और मोह का निवारण कर सके। श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण इसी उद्देश्य से अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है।

भागवत कथा से उतरता है माया का नशा

माया को महाराज जी एक प्रकार के नशे के समान समझाते हैं। जिस प्रकार नशा उतरने के बाद व्यक्ति को होश आता है और वह सोचता है कि मैंने क्या कर दिया, उसी प्रकार जब भगवान की कथा और भक्ति से माया का प्रभाव कम होता है, तब मनुष्य को अपने वास्तविक स्वरूप का बोध होने लगता है। उसे समझ आता है कि वह केवल संसार में सुख-सुविधाएं जुटाने के लिए नहीं आया है। वह भगवान का अंश है और उसका वास्तविक उद्देश्य भगवान का भजन करना तथा उनके चरणों में प्रेम प्राप्त करना है।

भजन से जागता है भगवान के प्रति प्रेम

माया और मोह दूर होने के बाद मनुष्य के भीतर भगवान के प्रति प्रेम जागने लगता है। धीरे-धीरे उसे संसार की वस्तुओं की अपेक्षा भगवान का नाम, उनकी कथा और उनका भजन अधिक प्रिय लगने लगता है। उसके मन में ऐसी लगन पैदा होती है कि वह भजन के बिना चैन महसूस नहीं करता है। भजन को अमृत रस के समान बताया गया है। जिस प्रकार अमृत का स्वाद मनुष्य को भीतर से तृप्त करता है, उसी प्रकार भगवान का नाम और भजन मनुष्य के अंतर्मन को शांति प्रदान करता है।

जीवन का सच्चा उद्देश्य

इसलिए मनुष्य को समझना चाहिए कि माया और मोह में उलझकर जीवन व्यर्थ नहीं करना चाहिए। संसार में रहते हुए अपने कर्तव्यों का पालन करें, लेकिन मन को भगवान के चरणों से जोड़कर रखें। जब मोह कम होगा, माया का प्रभाव घटेगा और भगवान के प्रति प्रेम बढ़ेगा, तभी जीवन में वास्तविक शांति और आनंद का अनुभव होगा। मनुष्य संसार को अपना सब कुछ न मानकर भगवान को अपना माने। जिस दिन हृदय में यह भाव जाग जाएगा कि हम भगवान के हैं और भगवान हमारे हैं, उसी दिन से माया और मोह के बंधन कमजोर होने लगेंगे और भक्ति के मार्ग पर आगे बढ़ने का सच्चा अवसर मिलेगा।

ये भी पढ़ें -  हरियाली तीज पर बनेंगे ये 4 दुर्लभ योग, वैवाहिक जीवन में आएगी सुख शांति

धार्मिक कहानियां सुनने और पढ़ने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ें।

WhatsApp Channel