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Nirjala Ekadashi: निर्जला एकादशी का व्रत क्यों है सबसे खास? आचार्य भरत जी महाराज ने बताया महत्व

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
आचार्य भरत जी महाराज
सार

Nirjala Ekadashi Vrat: निर्जला एकादशी हमें संयम, श्रद्धा और भक्ति का संदेश देती है। यह व्रत केवल शरीर को कष्ट देने के लिए नहीं, बल्कि मन और आत्मा को शुद्ध करने के लिए किया जाता है। 
 

Acharya Bharat Ji Maharaj
Nirjala Ekadashi Vrat Niyam: सनातन धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व बताया गया है। माना जाता है कि भगवान विष्णु को एकादशी अत्यंत प्रिय है। सालभर में आने वाली सभी एकादशियों में निर्जला एकादशी को सबसे कठिन और सबसे पुण्यदायी माना जाता है। इस व्रत में बिना जल ग्रहण किए पूरे दिन भगवान विष्णु का स्मरण और पूजा की जाती है। यही कारण है कि इसे “निर्जला” एकादशी कहा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि जो व्यक्ति श्रद्धा और नियम के साथ यह व्रत करता है, उसे सभी एकादशियों का फल प्राप्त होता है और भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी की विशेष कृपा भी मिलती है।

निर्जला एकादशी का व्रत इसलिए कठिन माना जाता है क्योंकि इसमें अन्न और जल दोनों का त्याग किया जाता है। गर्मी के मौसम में आने वाली यह एकादशी शरीर और मन दोनों की परीक्षा लेती है। हर व्यक्ति इस व्रत को पूरी तरह से नहीं कर पाता, खासकर बुजुर्ग, बीमार या कमजोर लोग, लेकिन शास्त्रों में यह भी कहा गया है कि यदि कोई व्यक्ति किसी कारण से व्रत नहीं रख सकता, तब भी वह श्रद्धा और भक्ति के साथ भगवान विष्णु की पूजा करके पुण्य प्राप्त कर सकता है।

व्रत नहीं रख पाने वाले लोग क्या करें?

आचार्य भरत जी महाराज कहते हैं कि यदि कोई व्यक्ति निर्जला एकादशी का व्रत नहीं रख पा रहा है, तो उसे निराश होने की जरूरत नहीं है। इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए और साफ, पवित्र वस्त्र धारण करने चाहिए। इसके बाद भगवान लक्ष्मी नारायण की विधि-विधान से पूजा करनी चाहिए। पूजा में दीपक जलाएं, भगवान को फल और मिठाई का भोग लगाएं और मन में सच्ची श्रद्धा रखें। भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए दिनभर अच्छे विचारों में मन लगाना चाहिए। किसी जरूरतमंद को दान देना, गरीबों की सहायता करना और धार्मिक कार्यों में भाग लेना भी इस दिन बहुत शुभ माना जाता है। ऐसा करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है।

मंत्र जाप का विशेष महत्व

निर्जला एकादशी पर मंत्र जाप का बहुत बड़ा महत्व बताया गया है। आचार्य भरत जी महाराज कहते हैं कि तुलसी की माला से “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करना अत्यंत शुभ होता है। यह मंत्र भगवान विष्णु को प्रसन्न करने वाला माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस मंत्र के जाप से मन को शांति मिलती है, पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग खुलता है। तुलसी भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है, इसलिए तुलसी की माला से किया गया जाप कई गुना फलदायी माना जाता है। इस दिन यदि श्रद्धा के साथ इस मंत्र का जाप किया जाए तो भगवान लक्ष्मी नारायण की विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है।

भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा

निर्जला एकादशी केवल उपवास का पर्व नहीं है, बल्कि यह आत्मशुद्धि और भक्ति का दिन भी माना जाता है। इस दिन क्रोध, झूठ और बुरे विचारों से दूर रहना चाहिए। मन में भगवान के प्रति श्रद्धा और विश्वास रखना सबसे जरूरी है। जो व्यक्ति सच्चे मन से भगवान विष्णु का स्मरण करता है, उसकी मनोकामनाएं पूर्ण होने की मान्यता है। माता लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए घर में साफ-सफाई रखें, पूजा स्थल को पवित्र रखें और भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी की भी आराधना करें। माना जाता है कि इससे घर में सुख, शांति और धन-समृद्धि का वास होता है।

निर्जला एकादशी का आध्यात्मिक महत्व

निर्जला एकादशी हमें संयम, श्रद्धा और भक्ति का संदेश देती है। यह व्रत केवल शरीर को कष्ट देने के लिए नहीं, बल्कि मन और आत्मा को शुद्ध करने के लिए किया जाता है। यदि कोई व्यक्ति पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ भगवान विष्णु की पूजा करता है, तो उसे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और मानसिक शांति प्राप्त होती है। यही कारण है कि निर्जला एकादशी को सभी एकादशियों में सबसे विशेष और पुण्यदायी माना गया है।

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