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Sawan Somwar Vrat: सावन सोमवार व्रत की ये है सबसे सरल पूजा विधि, शिवम साधक जी महाराज ने बताया तरीका

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
कथावाचक डॉ. शिवम साधक जी महाराज
सार

Sawan Monday Fast: यदि सावन के चारों सोमवार श्रद्धा, भक्ति और पूरी विधि के साथ व्रत एवं पूजा की जाए तो भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष कृपा प्राप्त होती है। 
 

Shivam Sadhak Ji Maharaj
Sawan Somwar Puja Vidhi: सावन का महीना भगवान शिव की उपासना के लिए सबसे पवित्र और शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस पूरे महीने में भगवान भोलेनाथ अपने भक्तों पर विशेष कृपा बरसाते हैं। खासकर सावन के सोमवार का व्रत करने से जीवन में सुख, शांति, समृद्धि, धन, वैभव और मानसिक संतोष की प्राप्ति होती है। जो लोग पूरे वर्ष सोमवार का व्रत नहीं रख पाते, वे भी यदि सावन के चारों सोमवार श्रद्धा और नियम के साथ व्रत करें तो उन्हें भगवान शिव का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस व्रत का सबसे बड़ा उद्देश्य केवल मनोकामना पूरी करना नहीं, बल्कि भगवान शिव की भक्ति और उनकी कृपा प्राप्त करना है।

शिवम साधक जी महाराज ने बताया कि सावन सोमवार के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में या सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे, हल्के रंग के वस्त्र पहनें। सफेद, पीला या हल्का रंग शुभ माना जाता है। इसके बाद घर के मंदिर या पूजा स्थल की अच्छी तरह सफाई करें। एक स्वच्छ चौकी पर सफेद या पीले रंग का कपड़ा बिछाकर भगवान श्रीगणेश, भगवान शिव, माता पार्वती और यदि संभव हो तो नंदी महाराज की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। यदि घर में शिवलिंग स्थापित करना संभव हो तो उसकी पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

सबसे पहले करें भगवान गणेश का स्मरण

हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत भगवान श्रीगणेश की पूजा से की जाती है। इसलिए शिव पूजा प्रारंभ करने से पहले भगवान गणेश का ध्यान करें। "वक्रतुंड महाकाय" या "गजाननं भूतगणादि सेवितम्" जैसे मंत्रों का जाप करते हुए उनसे प्रार्थना करें कि वे इस व्रत और पूजा को बिना किसी विघ्न के पूर्ण कराने की कृपा करें। माना जाता है कि भगवान गणेश की कृपा के बिना किसी भी पूजा का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता।

भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान

गणेश जी की पूजा के बाद भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान करें। इस समय अपनी मनोकामना भगवान के सामने रखें। सबसे श्रेष्ठ प्रार्थना यही मानी जाती है कि भगवान शिव और माता पार्वती इस पूजा और व्रत से प्रसन्न हों। जब भगवान स्वयं प्रसन्न हो जाते हैं, तब भक्त के जीवन की अनेक समस्याएं स्वतः दूर होने लगती हैं और उसे अलग-अलग इच्छाएं मांगने की आवश्यकता भी नहीं रहती है।
 
शिव जी

शिवलिंग का अभिषेक करने की सरल विधि

  • भगवान शिव की पूजा का सबसे महत्वपूर्ण भाग शिवलिंग का अभिषेक है। 
  • सबसे पहले शिवलिंग पर शुद्ध जल चढ़ाएं। यदि संभव हो तो जल में थोड़ा गंगाजल भी मिला लें। 
  • इसके बाद दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से अलग-अलग अभिषेक करें या इन सभी को मिलाकर पंचामृत बनाकर भी अभिषेक किया जा सकता है।
  • ध्यान रखें कि प्रत्येक सामग्री अर्पित करने के बाद शुद्ध जल अवश्य चढ़ाएं। 
  • अंत में एक बार फिर स्वच्छ जल से अभिषेक करें। इससे पूजा पूर्ण और शास्त्रसम्मत मानी जाती है।

भगवान शिव को अर्पित करें ये पूजन सामग्री

अभिषेक के बाद भगवान शिव को चंदन का त्रिपुंड लगाएं। इसके बाद बेलपत्र अवश्य अर्पित करें। बेलपत्र भगवान शिव को अत्यंत प्रिय माना गया है। यदि सफेद रंग के पुष्प उपलब्ध हों तो उन्हें भी भगवान को अर्पित करें। मान्यता है कि सफेद पुष्प चढ़ाने से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्त की प्रार्थना स्वीकार करते हैं।

मंत्र जाप का विशेष महत्व

पूजा के बाद भगवान शिव के सबसे प्रिय मंत्र "ॐ नमः शिवाय" का 108 बार जाप करें। यह पंचाक्षरी मंत्र अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है। श्रद्धा, विश्वास और एकाग्र मन से किया गया मंत्र जाप मन को शांति देता है और भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने का श्रेष्ठ माध्यम माना जाता है। मंत्र जाप करते समय भगवान शिव का ध्यान करते रहें और अपने मन को पूरी तरह भक्ति में लगाएं।
 
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आरती और प्रसाद का विधान

मंत्र जाप पूरा होने के बाद पूरे परिवार के साथ भगवान शिव की आरती करें। इसके बाद भगवान को मौसमी फल, मिठाई, सूखे मेवे या अपनी श्रद्धा के अनुसार कोई भी सात्विक प्रसाद अर्पित करें। आरती समाप्त होने के बाद प्रसाद पूरे परिवार में बांटें और स्वयं भी ग्रहण करें। पूजा के समय भगवान शिव से यह संकल्प लें कि उनकी कृपा से आप पूरे नियम और श्रद्धा के साथ व्रत को सफलतापूर्वक पूरा कर सकें।

व्रत के दौरान किन बातों का रखें ध्यान

सावन सोमवार के व्रत में पूरे दिन फलाहार करना सबसे उत्तम माना जाता है। फल, दूध, दही और अन्य सात्विक पदार्थों का सेवन किया जा सकता है। अत्यधिक तले-भुने व्रत वाले खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन करने से बचना चाहिए। व्रत का उद्देश्य केवल भोजन बदलना नहीं, बल्कि शरीर और मन दोनों को संयमित रखना है। इसलिए दिनभर भगवान शिव का स्मरण, मंत्र जाप, शिव चालीसा या शिव पुराण का पाठ करना भी अत्यंत शुभ माना जाता है।

व्रत का पारण कैसे करें

सोमवार का व्रत मंगलवार की सुबह विधिवत पारण करने के बाद ही पूर्ण माना जाता है। मंगलवार को सुबह स्नान करके भगवान शिव की पूजा करें। इसके बाद अपनी क्षमता के अनुसार किसी ब्राह्मण, जरूरतमंद या असहाय व्यक्ति को भोजन कराएं तथा यथाशक्ति दक्षिणा दें। इसके बाद स्वयं भोजन ग्रहण करके व्रत का पारण करें। बिना पारण किए व्रत का पूर्ण फल प्राप्त नहीं माना जाता। इसलिए नियमपूर्वक व्रत का समापन करना भी उतना ही आवश्यक है जितना श्रद्धा से व्रत रखना।

भगवान शिव से मिलता है मनचाहा आशीर्वाद 

यदि सावन के चारों सोमवार श्रद्धा, भक्ति और पूरी विधि के साथ व्रत एवं पूजा की जाए तो भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष कृपा प्राप्त होती है। ऐसा माना जाता है कि इस व्रत से जीवन के दुख, कष्ट, पाप और मानसिक तनाव दूर होते हैं तथा सुख, शांति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का आगमन होता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पूजा केवल दिखावे के लिए नहीं, बल्कि सच्चे मन, विश्वास और भक्ति के साथ की जाए। भगवान भोलेनाथ सरल स्वभाव के देव हैं और वे अपने भक्तों की निष्कपट भक्ति से शीघ्र प्रसन्न होकर उन्हें मनचाहा आशीर्वाद प्रदान करते हैं। 

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