facebook pixel
विज्ञापन
Home  dharm  saint stories  swami kailashanand giri ji say to adopt decent language along with democratic rights special appeal to youth

Swami Kailashanand Giri: लोकतांत्रिक अधिकारों के साथ मर्यादित भाषा अपनाएं, युवाओं से है विशेष अपील

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
स्वामी कैलाशानंद गिरी जी महाराज
सार

Democratic Values: लोकतंत्र में विरोध और मतभेद का अधिकार सभी नागरिकों को है, लेकिन किसी भी संवैधानिक पद पर आसीन व्यक्ति, विशेषकर प्रधानमंत्री एवं उनके परिवार के प्रति अभद्र और अपमानजनक भाषा का प्रयोग भारतीय संस्कृति, लोकतांत्रिक मर्यादाओं अनुरूप नहीं है।
 

Swami Kailashanand Giri
Constitutional Rights: पूज्य आचार्य महामण्डलेश्वर स्वामी कैलाशानन्द गिरि जी महाराज ने देश के युवाओं से लोकतांत्रिक मूल्यों, संवैधानिक अधिकारों और सामाजिक मर्यादाओं का पालन करने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा युवाओं के नाम दिए गए संदेश में लोकतांत्रिक मूल्यों, संवाद तथा प्रत्येक नागरिक के शांतिपूर्ण एवं संवैधानिक अधिकारों के सम्मान का संदेश निहित है।

लोकतंत्र में मतभेद स्वाभाविक 

स्वामी कैलाशानन्द गिरि जी महाराज ने कहा कि भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को अपनी बात रखने तथा लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण ढंग से विरोध दर्ज कराने का अधिकार देता है। लोकतंत्र में मतभेद स्वाभाविक हैं और स्वस्थ संवाद उसकी शक्ति है। उन्होंने कहा कि किसी भी मतभेद या विरोध के नाम पर किसी संवैधानिक पद पर आसीन व्यक्ति, विशेषकर देश के प्रधानमंत्री अथवा उनके परिवार के प्रति सार्वजनिक रूप से अभद्र, अपमानजनक और अशोभनीय भाषा का प्रयोग करना भारतीय संस्कृति, लोकतांत्रिक मर्यादाओं और सनातन परंपरा के अनुरूप नहीं है।

विचारों का विरोध लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा 

स्वामी जी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि विचारों का विरोध लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा हो सकता है, लेकिन भाषा की गरिमा, शिष्टाचार और परस्पर सम्मान बनाए रखना प्रत्येक नागरिक का दायित्व है। उन्होंने ऐसी अमर्यादित और व्यक्तिगत टिप्पणियों की निंदा करते हुए देशवासियों, विशेषकर युवाओं से अपील की कि वे अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का प्रयोग संयम, शालीनता और राष्ट्रहित की भावना के साथ करें। उन्होंने कहा कि स्वस्थ लोकतंत्र वही है जहां असहमति का सम्मान हो और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का प्रयोग मर्यादा एवं जिम्मेदारी के साथ किया जाए।

ये भी पढ़ें -  शिव जी का प्रिय महीना माना जाता है सावन, फिर भी इस समय क्यों नहीं होते विवाह?

ये भी देखें

धार्मिक कहानियां सुनने और पढ़ने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ें।

WhatsApp Channel