facebook pixel
विज्ञापन
Home  dharm  rohini vrat kab hai janiye sahi tithi shubh muhurt aur pooja vidhi

Rohini Vrat : कब है रोहिणी व्रत, जानिए सही तिथि शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

jeevanjaliPublished by:
कोमल शर्मा
सार

Rohini Vrat :  रोहिणी व्रत जैन धर्म में एक बहुत ही ज़रूरी और पवित्र व्रत है, जो हर महीने उस दिन मनाया जाता है जब सूरज उगने के बाद आसमान में रोहिणी नक्षत्र सबसे ज़्यादा दिखाई देता है।

Rohini Vrat : 
Rohini Vrat :  रोहिणी व्रत जैन धर्म में एक बहुत ही ज़रूरी और पवित्र व्रत है, जो हर महीने उस दिन मनाया जाता है जब सूरज उगने के बाद आसमान में रोहिणी नक्षत्र सबसे ज़्यादा दिखाई देता है। साल में लगभग 12-13 बार आने वाले इस व्रत का मुख्य मकसद आत्मिक शुद्धि, पैसे की खुशहाली और परिवार की खुशहाली पाना है। रोहिणी व्रत जैन धर्म के 12वें तीर्थंकर भगवान वासुपूज्य स्वामी को समर्पित है। यह व्रत हर महीने मनाया जाता है। जैन और हिंदू दोनों परंपराओं की महिलाएं आमतौर पर इसे अपने पति और परिवार की लंबी उम्र और खुशहाली के लिए रखती हैं। आइए हम आपको बताते हैं कि जून महीने में रोहिणी व्रत कब रखा जाएगा, इसका महत्व और पूजा का तरीका क्या है।

जून 2026 रोहिणी व्रत की तारीख और समय

तारीख: जून 13, 2026 (शनिवार)
नक्षत्र: रोहिणी नक्षत्र कब शुरू होता है

रोहिणी व्रत का महत्व 

रोहिणी व्रत रखने वालों के लिए इसका बहुत महत्व है। यह व्रत रोहिणी नक्षत्र से जुड़ा है, जो जैन और हिंदू कैलेंडर के सत्ताईस नक्षत्रों में से एक है। ऐसा माना जाता है कि रोहिणी नक्षत्र के दिन व्रत रखने से व्यक्ति को चुनौतियों पर विजय पाने, दुखों पर विजय पाने और जीवन से दरिद्रता दूर करने में मदद मिलती है। इस व्रत को रखने वाली महिलाएं अपने जीवनसाथी और परिवार की समृद्धि और दीर्घायु की कामना करती हैं। परंपरागत रूप से, रोहिणी व्रत लगातार तीन, पाँच या सात वर्षों तक रखा जाता है। हालाँकि, इस व्रत को करने की आदर्श अवधि पाँच वर्ष और पाँच महीने है, जिसका समापन उद्यापन नामक एक विशेष अनुष्ठान के साथ होता है, जो व्रत के सफल समापन का प्रतीक है।

रोहिणी व्रत के लाभ

1. धन और समृद्धि - इस व्रत को करने से आर्थिक लाभ होता है और आर्थिक कठिनाइयाँ दूर होती हैं। रुका हुआ धन वापस मिलने लगता है।
2. स्वास्थ्य और दीर्घायु - इस व्रत को करने से उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु का आशीर्वाद मिलता है। आयु लंबी होती है और स्वास्थ्य रोगमुक्त रहता है।
3. ग्रह शांति - रोहिणी नक्षत्र चंद्रमा से संबंधित है, इसलिए इस दिन व्रत करने से चंद्र ग्रह के कष्ट दूर होते हैं। चंद्र ग्रह के कष्ट मानसिक तनाव का कारण बनते हैं, जो इस व्रत को करने से दूर हो जाता है।
4. धार्मिक और आध्यात्मिक उन्नति - रोहिणी व्रत को धार्मिक और भक्ति की दृष्टि से अत्यंत शुभ माना जाता है। इस अनुष्ठान को करने से व्यक्ति के जीवन में आध्यात्मिक विकास को बढ़ावा मिलता है। इसके अलावा, इसे हिंदू धर्म में "दुख निवारण व्रत" के रूप में भी जाना जाता है।
5. सौभाग्य वृद्धि - महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए यह व्रत रखती हैं और इसे सौभाग्य का प्रतीक भी माना जाता है।

रोहिणी व्रत पूजा विधि

रोहिणी व्रत करते समय कई बातों का ध्यान रखना चाहिए, क्योंकि सभी व्रतों की पूजा विधि अन्य व्रतों से भिन्न होती है। इसलिए, आपको किसी भी व्रत की सही पूजा विधि पता होनी चाहिए। रोहिणी व्रत की पूजा विधि इस प्रकार है:
1. स्नान और संकल्प - सुबह जल्दी उठें, स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद, व्रत का संकल्प लें और भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी का ध्यान करें।
2. भगवान विष्णु की पूजा - भगवान विष्णु की मूर्ति को पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल) से स्नान कराएँ और उन्हें पीले वस्त्र अर्पित करें। इससे भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं और आपकी सभी मनोकामनाएँ पूरी करते हैं।
3. कलश स्थापना - घर के मंदिर में कलश स्थापित करें और उस पर नारियल रखें। इससे देवी लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं। देवी लक्ष्मी आर्थिक तंगी दूर करती हैं।
4. विशेष मंत्रों का जाप - इस दिन "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का जाप करने से विशेष लाभ मिलता है। यह मंत्र भगवान विष्णु से संबंधित माना जाता है।
5. व्रत कथा का पाठ - इस दिन रोहिणी व्रत कथा का पाठ करना महत्वपूर्ण है, क्योंकि व्रत कथा सुनने के बाद ही व्रत का समापन होता है।
6. धूप, दीप और पुष्प अर्पित करें - भगवान को धूप, दीप, पुष्प और साबुत अनाज अर्पित करें। इससे आपकी आध्यात्मिक ऊर्जा बढ़ती है और वातावरण में सकारात्मकता आती है।
7. भोग प्रसाद - भगवान को खीर, फल और पंचामृत का भोग लगाएं। भगवान को यह भोग अर्पित करना आवश्यक है, क्योंकि इससे देवी अन्नपूर्णा प्रसन्न होती हैं।
8. दान - व्रत के अंत में जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र और धन दान करें। कलियुग में दान को सर्वोपरि माना गया है, इसलिए दान अवश्य करें।


यह भी पढ़ें:- 

Ramayan Ki Kahani: रामायण की रचना क्यों हुई? जानें रामायण की मुख्य घटनाएं, कथा और धार्मिक महत्व 

Ramayana: कौन थे ऋषि जाबालि? रामायण में क्या थी उनकी भूमिका, पौराणिक कथा से जानें इसका रहस्य 

Hanuman Ji Story: कलियुग में कहां रहते हैं हनुमान जी? पौराणिक कथा से जानें इसका रहस्य 
 
(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)

 




 

धार्मिक कहानियां सुनने और पढ़ने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ें।

WhatsApp Channel