Sawan Start Date: सावन की शुरुआत को लेकर 30 और 31 जुलाई की तारीख के बीच जो असमंजस दिखाई दे रहा है, वह पंचांग गणना और क्षेत्रीय मान्यताओं के कारण है। अपने क्षेत्र के मान्य पंचांग के अनुसार सावन की शुरुआत की तिथि को माना जा सकता है।
Sawan Start Right Tithi: हिंदू धर्म में सावन का महीना बेहद पवित्र और विशेष माना जाता है। भगवान शिव की आराधना के लिए यह महीना सबसे शुभ माना जाता है। हर साल भक्त सावन के आगमन का बेसब्री से इंतजार करते हैं और इस दौरान सोमवार के व्रत, जलाभिषेक और धार्मिक अनुष्ठान करते हैं। इस बार सावन की शुरुआत की तारीख को लेकर लोगों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है। कई जगहों पर सावन की शुरुआत 30 जुलाई बताई जा रही है, जबकि कुछ पंचांगों में 31 जुलाई से सावन आरंभ होने की बात कही जा रही है।
पंचांगों की गणना के अनुसार, सावन महीने की शुरुआत चंद्र तिथि के आधार पर होती है। तिथि का निर्धारण सूर्योदय और चंद्रमा की स्थिति के अनुसार किया जाता है, जिसके कारण कई बार अलग-अलग स्थानों पर तिथियों को लेकर अंतर दिखाई देता है। इस बार भी यही कारण है कि कुछ स्थानों पर सावन का पहला दिन 30 जुलाई माना जा रहा है, जबकि कुछ जगहों पर 31 जुलाई से सावन शुरू होने की मान्यता बताई जा रही है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जहां सूर्योदय के समय सावन मास की प्रतिपदा तिथि का प्रभाव रहेगा, वहां उसी दिन से सावन की शुरुआत मानी जाएगी। इसलिए अलग-अलग पंचांगों और स्थानीय परंपराओं के कारण तारीख में अंतर नजर आ रहा है।
जानें कब है सावन?
साल 2026 में सावन की शुरुआत 30 जुलाई से हो रही है। 30 या 31 जुलाई को लेकर कोई असमंजस नहीं है, बल्कि पंचांग और उदया तिथि के अनुसार सावन मास का आरंभ 30 जुलाई 2026 (गुरुवार) को ही तय है। जबकि कुछ जगहों पर 29 जुलाई की शाम को तिथि लगने के बावजूद उदया तिथि 30 जुलाई ही मानी गई है। श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि सूर्योदय के समय 30 जुलाई को है, इसलिए शास्त्रसम्मत रूप से सावन का पहला दिन 30 जुलाई ही मान्य है।
शिव-भक्ति का विशेष महीना है सावन
सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित होता है। मान्यता है कि इस महीने में भगवान शिव की पूजा करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। श्रद्धालु सावन सोमवार का व्रत रखते हैं और शिव मंदिरों में जाकर जल, बेलपत्र, फूल और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करते हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान निकले विष को भगवान शिव ने अपने कंठ में धारण किया था। विष के प्रभाव को कम करने के लिए देवताओं ने भगवान शिव का जल से अभिषेक किया था। इसी कारण सावन में जलाभिषेक का विशेष महत्व माना जाता है।
तारीख को लेकर क्यों होता है अंतर
भारत में अलग-अलग क्षेत्रों में पंचांग की गणना की अलग-अलग परंपराएं हैं। उत्तर भारत, दक्षिण भारत और अन्य क्षेत्रों में अमावस्या तथा पूर्णिमा आधारित पंचांगों का प्रयोग किया जाता है। इसी वजह से कई बार त्योहारों और व्रतों की तारीखों में थोड़ा अंतर देखने को मिलता है। सावन की शुरुआत भी इसी गणना पर निर्भर करती है। हालांकि, श्रद्धालुओं के लिए सावन का महत्व तारीख से अधिक भगवान शिव की भक्ति और श्रद्धा से जुड़ा हुआ है।
सावन में किन बातों का रखा जाता है ध्यान
सावन के महीने में भक्त नियमित रूप से भगवान शिव की पूजा करते हैं और सात्विक जीवन अपनाने का प्रयास करते हैं। इस दौरान शिवलिंग पर जल चढ़ाने, महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने और जरूरतमंदों की सहायता करने का विशेष महत्व माना जाता है। सावन के सोमवार को विशेष फलदायी माना जाता है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु व्रत रखते हैं और शिव मंदिरों में दर्शन के लिए पहुंचते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन में सच्चे मन से की गई पूजा और भक्ति से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं।
सावन की शुरुआत की तिथि
सावन की शुरुआत को लेकर 30 और 31 जुलाई की तारीख के बीच जो असमंजस दिखाई दे रहा है, वह पंचांग गणना और क्षेत्रीय मान्यताओं के कारण है। अपने क्षेत्र के मान्य पंचांग के अनुसार सावन की शुरुआत की तिथि को माना जा सकता है। यह महीना भगवान शिव की आराधना, आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है, इसलिए भक्तों के लिए सावन का हर दिन विशेष महत्व रखता है।