
| महिषासुर वध की कथा | श्रीकृष्ण से जुड़ी कथा |
| पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब देवी दुर्गा ने राक्षस महिषासुर का वध किया, तब वे विंध्य पर्वत पर आकर विराजमान हो गईं थी। इसलिए यहां की देवी को “विंध्यवासिनी” कहा जाता है, यानी विंध्य में रहने वाली देवी। | भागवत पुराण के अनुसार, जब भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ, तब कंस ने उन्हें मारने की कोशिश की, लेकिन वह बच्ची (योगमाया) आसमान में चली गई और विंध्याचल में प्रकट हुई। वही देवी विंध्यवासिनी मानी जाती हैं। पद्म पुराण और अन्य ग्रंथों में भी इस स्थान का उल्लेख मिलता है। कहा जाता है कि सृष्टि के आरंभ से ही यहां देवी की पूजा होती रही है। |
| नवरात्रि | कजरी महोत्सव |
| नवरात्रि के दिनों में यहां सबसे ज्यादा भीड़ होती है। खासतौर पर चैत्र और शारदीय नवरात्रि में होती है। नवरात्रि के मौके पर इस मंदिर में लाखों श्रद्धालु आते हैं और पूरा शहर सज जाता है। विशेष अवसरों पर मंदिर 20 घंटे तक खुला रहता है। | मां विंध्यवासिनी को “कजरी देवी” भी कहा जाता है। इसलिए यहां कजरी गीतों का विशेष महत्व है और त्योहार मनाया जाता है। |
| रेल मार्ग | सड़क मार्ग | हवाई मार्ग |
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दर्शन समय और आरती श्रृंगार |
दिन भर की प्रमुख आरतियां |
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