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Kottankulangara Devi Temple: इस मंदिर में महिलाओं की तरह पुरुष करते हैं सोलह श्रृंगार, जानें मंदिर का इतिहास

जीवांजलिPublished by:
राघवेंद्र तिवारी
सार

Kottankulangara Devi Temple: वैसे तो भारत में कई अनोखे मंदिर हैं, जिनकी अलग-अलग मान्यताएं हैं। लेकिन आज हम आपको एक ऐसे मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां पुरुष महिलाओं की तरह कपड़े पहनकर देवी की पूजा करते हैं।

Kottankulangara Devi Temple
Kottankulangara Devi Temple: वैसे तो भारत में कई अनोखे मंदिर हैं, जिनकी अलग-अलग मान्यताएं हैं। लेकिन आज हम आपको एक ऐसे मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां पुरुष महिलाओं की तरह कपड़े पहनकर देवी की पूजा करते हैं। यह मंदिर केरल के कोल्लम जिले के चवारा में स्थित है। इस मंदिर का नाम कोट्टनकुलंगरा देवी मंदिर है। इस मंदिर में पूजा करने के लिए पुरुषों को महिलाओं की तरह कपड़े पहनने पड़ते हैं। सैकड़ों पुरुष महिलाओं की तरह कपड़े पहनकर देवी से अपनी मनोकामना पूरी करने की प्रार्थना करते हैं।

चमाईविलक्कू महोत्सव

कोल्लम जिले के चवारा में स्थित कोट्टनकुलंगरा श्री देवी मंदिर में मनाया जाने वाला चमारविलक्कू महोत्सव केरल का एक अनोखा और प्रसिद्ध त्यौहार है। यह त्यौहार हर साल मार्च के महीने में 10 से 12 दिनों तक चलता है। आपको बता दें कि चमाईविलक्कू महोत्सव के आखिरी दिन पुरुष पूरी श्रद्धा और समर्पण के साथ महिलाओं की तरह कपड़े पहनते हैं। इसके साथ ही चमाईविलक्कू महोत्सव पर सोलह श्रृंगार भी करते हैं।

इस परंपरा का पालन मुख्य रूप से मंदिर के आसपास 5 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले पुरुष ही करते हैं, लेकिन बड़ी संख्या में लोग दूर-दूर से भी आते हैं।

चामईविलक्कू की कहानी और परंपरा

यह परंपरा सदियों पुरानी है और एक लोककथा पर आधारित है। कहा जाता है कि पहले कुछ चरवाहे एक पत्थर को देवी मानकर उसकी पूजा करते थे और लड़कियों की तरह कपड़े पहनकर उसके इर्द-गिर्द खेलते थे। एक दिन अचानक उस पत्थर से देवी प्रकट हुईं। यह चमत्कारी घटना पूरे गांव में फैल गई और फिर वहां एक मंदिर की स्थापना की गई। तब से यह परंपरा चली आ रही है कि पुरुष देवी को प्रसन्न करने के लिए महिलाओं की तरह कपड़े पहनते हैं।

मनोकामना पूरी करने के लिए करते हैं लोग प्रार्थना

पुरुष अपनी मूंछ और दाढ़ी मुंडवाकर, चेहरे पर मेकअप लगाकर, खूबसूरत रंग-बिरंगी साड़ियां पहनकर देवी की पूजा करते हैं। वे यह सब अपनी मनोकामना पूरी करने, पापों से मुक्ति पाने या कर्ज से मुक्ति पाने के लिए करते हैं।

कब करें दर्शन?

इस मंदिर में दर्शन करने का सबसे अच्छा समय मार्च का महीना है। मुख्य कार्यक्रम सुबह 2 बजे से 5 बजे के बीच होता है। इस दौरान भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। मंदिर के बाहर पुरुषों के सजने-संवरने के लिए अस्थायी ब्यूटी पार्लर भी बनाए गए हैं।

आस्था का रंग

हर साल हजारों भक्त अपनी मनोकामनाएं लेकर इस मंदिर में आते हैं। कोई कर्ज से मुक्ति पाने के लिए आता है तो कोई अपने पापों की क्षमा मांगने के लिए। यही कारण है कि यहां आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या हर साल बढ़ती जा रही है।

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