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Ram Navami History: रामनवमी का क्या है इतिहास, जानें इस पावन पर्व को मनाने के पीछे का रहस्य

जीवांजलिPublished by:
राघवेंद्र तिवारी
सार

Ram Navami History and Significance: वैदिक पंचांग के अनुसार, इस साल चैत्र नवरात्रि की शुरुआत 30 मार्च से हो रही है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, राम नवमी इस साल यानी 2025 में 6 अप्रैल को मनाई जाएगी।

Ram Navami History
Ram Navami History and Significance: वैदिक पंचांग के अनुसार, इस साल चैत्र नवरात्रि की शुरुआत 30 मार्च से हो रही है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, राम नवमी इस साल यानी 2025 में 6 अप्रैल को मनाई जाएगी। इस दिन भगवान श्री राम जी का जन्मदिन बहुत ही जोर-शोर और उल्लास के साथ मनाया जाता है।

दीप जलाकर मनाते हैं खुशियां

बता दें कि रामनवमी के दिन श्री राम जी के भक्त दीपोत्सव जैसी खुशियां मनाते हैं, साथ ही विधि-विधान से पूजा-पाठ और व्रत कथा भी करते हैं। हिंदू धर्म में रामनवमी का गहरा महत्व है, तथा इस दिन को शास्त्रों के अनुसार बहुत ही शुभ माना गया है। मान्यता है कि इस दिन बुराई पर अच्छाई की विजय प्राप्ति का संदेश देने के लिए भगवान विष्णु ने श्री राम के रूप में पुनर्जन्म लिया था।

माना जाता है कि श्री राम जी का जन्म संसार के कल्याण करने हेतु हुआ था। धार्मिक और ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, जो जातक प्रभु श्री राम जी के नाम का जाप करता है उसके जीवन में सुख-शांति, समृद्धि और उल्लास आते हैं। सभी दुखों और कष्टों से मुक्ति भी मिल जाता है। सारी मनोकामनाएं पूरी भी हो जाती हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं राम नवमी को मनाने के पीछे का इतिहास क्या है और पूजा विधि क्या है। अगर नहीं जानते हैं तो आज इस खबर में रामनवमी के बारे में विस्तार से जानेंगे।

आखिर क्यों मनाई जाती है रामनवमी

वैदिक पंचांग के अनुसार, राम नवमी चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि के दिन ही जगत के पालनकर्ता भगवान श्री हरि विष्णु ने धरती पर श्री राम के रूप में जन्म लिया था। बता दें कि राम जी के जन्म की पावन बेला को याद करने के लिए रामनवमी का त्योहार मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान विष्णु अयोध्या के राजा दशरथ के घर जन्म लिया।

क्या है रामनवमी का इतिहास

वैदिक पंचांग के अनुसार, मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम जी का जन्म त्रेता युग के चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि के दिन पुनर्वसु नक्षत्र के कर्क लग्न में हुआ था। इनका जन्म अयोध्या के सूर्यवंशी क्षत्रिय वंश में हुआ था। वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, राजा दशरथ की 3 रानियां थीं और तीनों की ही कोई संतान नहीं थी। राजा को संतान सुख प्राप्त न होने की वजह से हर समय उदास रहते थे।

राजा संतान का सुख प्राप्त करने के लिए महर्षि वशिष्ठ के शरणागत में गए। महर्षि ने उन्हें यज्ञ करने की सलाह दी थी। राजा दशरथ ने यज्ञ करवाया और उसी यज्ञ के फलस्वरूप राजा दशरथ की तीनों पत्नियां गर्भवती हो गई थीं। उन्हीं तीनों रानियों में कौशल्या ने श्री राम जी को जन्म दिया था।

माता कौशल्या की कोख से जन्मे श्री राम जी का धरती पर आना और पापियों का नाश करने, बुराई का अंत करने तथा भेदभाव की बेड़ियां तोड़ने के हुआ था। बता दें कि भगवान श्री हरि विष्णु ने मृत्यु लोक में ही भगवान राम का रूप धारण कर लिया था। ऐसे में रामनवमी का त्योहार कई हजार सालों से मनाया जा रहा है। राम नमवी के दिन श्री राम जी के जन्म के अलावा मां दुर्गा की भी चैत्र नवरात्रि के समापन का संकेत देती है।

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