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Rakshabandhan: दाएं या बाएं किस हाथ पर बांधनी चाहिए राखी ? जाानिए

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
कोमल शर्मा
सार

Rakshabandhan:  रक्षाबंधन के दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधती हैं। वे इस मौके पर मिठाइयां खिलाती हैं

Rakshabandhan
Rakshabandhan:  रक्षाबंधन के दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधती हैं। वे इस मौके पर मिठाइयां खिलाती हैं और शुभकामनाएं देने के लिए आरती करती हैं। आपने देखा होगा कि कुछ लोग दोनों कलाइयों पर राखी बांधते हैं। सवाल यह उठता है कि रक्षाबंधन पर राखी बांधने के लिए सही हाथ कौन सा है? क्या इसे दाहिने हाथ पर बांधना चाहिए या बाएं हाथ पर?

राखी किस हाथ पर बांधनी चाहिए?

जब भी घर में कोई पूजा या शुभ काम होता है, तो पंडित जी पूजा करने वाले व्यक्ति या घर के सदस्यों के दाहिने हाथ पर रक्षा-सूत्र या मौली बांधते हैं। इसी तरह, पूजा करते समय या दान देते समय भी दाहिने हाथ का इस्तेमाल किया जाता है। सनातन धर्म में दाहिने हाथ को पवित्र, शुभ और शक्ति का प्रतीक माना जाता है। इसी वजह से बहनें अपने भाइयों की दाहिनी कलाई पर राखी बांधती हैं। सभी को दाहिने हाथ पर ही राखी बांधनी चाहिए क्योंकि शरीर के दाहिने हिस्से में 'पिंगला नाड़ी' होती है; यह पुरुष ऊर्जा, जीवन शक्ति, सक्रियता और तेज का प्रतीक है। इसलिए, दाहिने हाथ पर रक्षा-सूत्र या राखी बांधने से सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है। पिंगला नाड़ी को 'सूर्य नाड़ी' के नाम से भी जाना जाता है, जो सक्रियता, ऊर्जा और तेज से जुड़ी है।

हालांकि, शरीर का बायां हिस्सा अशुभ नहीं होता है।

जहां दाहिना हाथ शुभता, पुरुष ऊर्जा और सूर्य का प्रतीक है वहीं बायां हाथ स्त्री ऊर्जा, संवेदनशीलता, कोमलता और भावनाओं का प्रतिनिधित्व करता है।
शरीर का बायां हिस्सा 'इड़ा नाड़ी' से जुड़ा होता है जिसे 'चंद्र नाड़ी' भी कहा जाता है। चंद्रमा शीतलता, संवेदनशीलता, भावना और शांति का प्रतीक है।
इसके अलावा जब भगवान शिव ने 'अर्धनारीश्वर' का रूप धारण किया था, तो उनके शरीर का दाहिना हिस्सा शिव का और बायां हिस्सा माता पार्वती का प्रतिनिधित्व करता था जो क्रमशः पुरुष ऊर्जा और स्त्री ऊर्जा का प्रतीक है।
भाई का चेहरा गलती से भी इस दिशा में नहीं होना चाहिए। राखी बांधते समय भाई का चेहरा गलत दिशा में बिल्कुल नहीं होना चाहिए, क्योंकि इससे उसके जीवन पर असर पड़ सकता है। इसलिए, ध्यान रखें कि राखी बांधते समय आपके भाई का मुंह दक्षिण दिशा की ओर न हो। ज्योतिष शास्त्र में, यह दिशा यम  और पितरों  से जुड़ी मानी जाती है; इसलिए, दक्षिण की ओर मुंह करके राखी बंधवाना अशुभ माना जाता है।

राखी बंधवाते समय भाई का मुंह किस दिशा में होना चाहिए?

रक्षाबंधन पर राखी बांधते समय दिशा का खास ध्यान रखना चाहिए। माना जाता है कि गलत दिशा में मुंह होने से भाई पर बुरा असर पड़ सकता है। इसलिए, पक्का करें कि राखी बंधवाते समय आपके भाई का मुंह पूर्व या उत्तर दिशा की ओर हो। ज्योतिष और वास्तु शास्त्र में इन दिशाओं को बहुत शुभ माना जाता है। माना जाता है कि अगर भाई का मुंह पूर्व दिशा की ओर हो, तो इससे उसके जीवन में सकारात्मकता आती है।


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(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।) 

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