Shiv-Parvati Pujan: प्रदोष व्रत न सिर्फ वैवाहिक जीवन की बाधाओं को दूर करता है, बल्कि भगवान शिव की कृपा से आपके जीवन में सुख-शांति और समृद्धि भी लाता है। इसके साथ ही जीवन में आने वाले कष्ट भी खत्म होते हैं।
Pradosh Vrat 2025 Shiv-Parvati Puja: प्रदोष व्रत, भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित एक बहुत ही शुभ और शक्तिशाली व्रत माना जाता है। यह व्रत हर महीने की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है। मान्यता है कि इस दिन प्रदोष काल (शाम का समय) में शिव-पार्वती की पूजा करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन के कष्ट दूर होते हैं। खासकर, वैवाहिक जीवन में आ रही बाधाओं को दूर करने के लिए यह व्रत बहुत ही प्रभावी माना जाता है। इस माह प्रदोष व्रत 20 अगस्त दिन बुधवार को रखा जाएगा।
ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जिन लोगों के विवाह में रुकावटें आ रही हैं या विवाहित जीवन में परेशानियां हैं, उनके लिए प्रदोष व्रत करना बेहद फलदायी होता है। यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा दिलाता है, जो प्रेम, समर्पण और दांपत्य जीवन के प्रतीक हैं। इस व्रत से वैवाहिक संबंध मजबूत होते हैं और पति-पत्नी के बीच सामंजस्य बढ़ता है।
प्रदोष व्रत की सही पूजा विधि
प्रदोष व्रत की पूजा हमेशा शाम को, सूर्यास्त के बाद और रात होने से पहले की जाती है। यह समय प्रदोष काल कहलाता है और पूजा के लिए सबसे शुभ माना जाता है।
व्रत की तैयारी
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें। पूजा शुरू करने से पहले भगवान शिव के सामने व्रत का संकल्प लें और मन ही मन उनसे प्रार्थना करें कि वे आपको निर्विघ्न व्रत पूरा करने की शक्ति दें। शाम को पूजा करने से पहले, घर के पूजा स्थल को अच्छी तरह से साफ करें।
प्रदोष काल में पूजा के चरण
एक चौकी पर भगवान शिव, माता पार्वती और उनके परिवार (गणेश, कार्तिकेय) की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
एक लोटे में जल भरकर उसमें थोड़ा गंगाजल मिलाएं। इसके बाद भगवान शिव का अभिषेक करें। आप दूध, दही, घी, शहद और शक्कर के मिश्रण (पंचामृत) से भी अभिषेक कर सकते हैं।
शिव-पार्वती को नए वस्त्र पहनाएं। भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल और भांग अर्पित करें। माता पार्वती को लाल या गुलाबी फूल, सिंदूर और चूड़ियां अर्पित करें।
शिव-पार्वती को मौसमी फल और मिठाई का भोग लगाएं।
पूजा के दौरान "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का 108 बार जाप करें। यदि वैवाहिक जीवन में परेशानी है, तो "हे गौरी शंकर अर्धांगिनी यथा त्वम् शंकर प्रिया। तथा मां कुरु कल्याणी कांतकांता सुदुर्लभाम्।" मंत्र का जाप करें।
वैवाहिक बाधाओं के लिए विशेष उपाय
प्रदोष काल में भगवान शिव और माता पार्वती को एक साथ लाल रंग के फूलों की माला पहनाएं। पूजा में शिव-पार्वती को शहद और मक्खन का भोग लगाएं। प्रदोष व्रत के दिन, विशेषकर शाम को, दाम्पत्य जीवन की सुख-शांति के लिए शिव-पार्वती के सामने घी का दीपक जलाएं। व्रत का पारण करने से पहले, किसी जरूरतमंद विवाहित महिला को भोजन, चूड़ियां या सिंदूर दान करें।
कथा और आरती
पूजा के अंत में, प्रदोष व्रत की कथा पढ़ें या सुनें। इसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती की आरती करें और अपनी सभी मनोकामनाओं के लिए प्रार्थना करें। पूजा के बाद ही व्रत खोलें। आप फलहार कर सकते हैं। अगले दिन सूर्योदय के बाद ही व्रत का पूर्ण पारण करें।