Pitru Paksha Shraddha:पितृ पक्ष शुरू होते ही, देश भर में लोग अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंड दान करते हैं।
Pitru Paksha Shraddha:पितृ पक्ष शुरू होते ही, देश भर में लोग अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंड दान करते हैं। हालाँकि बिहार में गया-जी को पिंड दान के लिए सबसे मुख्य तीर्थ स्थल माना जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि गया पहुँचने से पहले एक ऐसी जगह है जहाँ तर्पण और पिंड दान करना ज़रूरी है? यह जगह पुनपुन नदी का घाट है, जिसे धार्मिक मान्यताओं में पितृ-मोक्ष का पहला द्वार माना जाता है। पुरानी मान्यताओं के अनुसार, पितृ पक्ष के दौरान पुनपुन नदी में स्नान करने और पूर्वजों के नाम पर तर्पण और श्राद्ध करने से उन्हें मुक्ति मिलती है और सात पीढ़ियों को आध्यात्मिक पुण्य प्राप्त होता है। आइए जानें कि इस जगह का भगवान राम से क्या संबंध है
पितृ पक्ष 2026
2026 में, पितृ पक्ष रविवार, 26 सितंबर को शुरू होगा; यह दिन भाद्रपद महीने की पूर्णिमा तिथि है, और पूर्णिमा का श्राद्ध इसी दिन किया जाएगा। हालाँकि, पितृ पक्ष का नियमित पालन रविवार, 27 सितंबर शुरू होता है और शनिवार, 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या के दिन समाप्त होता है। पुरानी मान्यताओं के अनुसार, पितृ पक्ष के दौरान पूर्वज श्राद्ध और तर्पण की भेंट स्वीकार करने के लिए अपने परिवारों से मिलने आते हैं। इन अनुष्ठानों को करने से व्यक्ति पितृ दोष से मुक्त होता है और उसे तरक्की और खुशहाली का आशीर्वाद मिलता है।
पुनपुन नदी: मोक्ष का पहला द्वार
पटना ज़िले के पास स्थित पुनपुन नदी का घाट पितृ पक्ष के दौरान विशेष महत्व रखता है। माना जाता है कि गया में पिंड दान करने से पहले, व्यक्ति को पुनपुन नदी में स्नान करना चाहिए और तर्पण के साथ-साथ शुरुआती पिंड दान भी करना चाहिए। इसके बाद, लोग गया जाकर फल्गु नदी के किनारे पिंड दान और अन्य धार्मिक अनुष्ठान करते हैं। पुनपुन नदी को मोक्ष का पहला द्वार माना जाता है और गरुड़ पुराण में इसे आदि-गंगा कहा गया है।
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भगवान राम और माता सीता से जुड़ी पौराणिक कथा
पुनपुन घाट की सबसे खास बात भगवान राम और माता सीता से जुड़ी पौराणिक कथा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जब भगवान राम अपने पिता राजा दशरथ के लिए श्राद्ध और पिंड दान की रस्में निभाने निकले, तो गया जाने से पहले उन्होंने पुनपुन नदी के किनारे अपने पूर्वजों के लिए तर्पण किया। कहा जाता है कि भगवान राम ने माता जानकी के साथ मिलकर पुनपुन नदी के किनारे पहला पिंड अर्पित किया था। इसके बाद, वे गया पहुँचे और फल्गु नदी के किनारे पूरी विधि-विधान के साथ पिंड दान की रस्में निभाईं। इसी मान्यता के कारण, पुनपुन को गया से पहले पिंड दान करने का स्थान माना जाता है और इसे 'मोक्ष का प्रथम द्वार' कहा जाता है।
पुनपुन नदी से जुड़ी धार्मिक मान्यताएँ
धार्मिक ग्रंथों में भी पुनपुन नदी का ज़िक्र मिलता है। गरुड़ पुराण से जुड़ी मान्यताओं के अनुसार इसे 'आदि-गंगा' कहा जाता है। यह एक व्यापक धार्मिक मान्यता है कि पुनपुन नदी के किनारे अपने पूर्वजों के लिए तर्पण करने से उन्हें मोक्ष मिलता है और सात पीढ़ियों को आध्यात्मिक पुण्य प्राप्त होता है। यही कारण है कि बहुत से लोग आज भी पितृ पक्ष के दौरान अपनी धार्मिक यात्रा की शुरुआत पुनपुन से करते हैं। परंपरा के अनुसार, यहाँ पवित्र स्नान और तर्पण के बाद पहला पिंड दान किया जाता है इसके बाद, तीर्थयात्री गया जाकर फल्गु नदी के किनारे पिंड दान और अन्य अनुष्ठान करते हैं।
(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)