Nirjala Ekadashi Upay: वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, निर्जला एकादशी का व्रत सनातन धर्म का सबसे कठिन व्रत माना गया है। ज्योतिषियों के अनुसार, निर्जला एकादशी के दिनों में कुछ नियमों का पालन करना बहुत जरूरी है ताकि आपका व्रत खंडित न हो और आपको इसका पूरा लाभ मिल सके।
Nirjala Ekadashi Upay: सनातन धर्म में एकादशी तिथि का बहुत महत्व है। इस दिन भगवान श्री हरि विष्णु की विधि-विधान से पूजा की जाती है। वैसे तो साल में 24 बार एकादशी व्रत रखा जाता है, लेकिन ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी का विशेष महत्व है और जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, इसमें निर्जला व्रत रखने का नियम है।
वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, निर्जला एकादशी का व्रत सनातन धर्म का सबसे कठिन व्रत माना गया है। ज्योतिषियों के अनुसार, निर्जला एकादशी के दिनों में कुछ नियमों का पालन करना बहुत जरूरी है ताकि आपका व्रत खंडित न हो और आपको इसका पूरा लाभ मिल सके। इस दिन कुछ खास उपाय करने से जीवन की परेशानियों से मुक्ति मिलती है। आइए इस खबर में विस्तार से जानते हैं।
कब है निर्जला एकादशी
वैदिक पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 6 जून को दोपहर 2.15 बजे से शुरू होगी। वहीं, यह तिथि 7 जून को सुबह 4.47 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के अनुसार 6 जून को निर्जला एकादशी व्रत रखा जाएगा। सनातन धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्व है। मान्यता है कि एकादशी का व्रत करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
निर्जला एकादशी का व्रत करने से 24 एकादशी के व्रत के समान फल मिलता है। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष पूजा करनी चाहिए। इसके अलावा कुछ खास उपाय करने से जीवन के कष्टों से मुक्ति मिलती है और मनचाहा फल मिलता है।