Mrityu Panchak: पंचक के कई प्रकार हैं, जो शुरू होने वाले वार के अनुसार अलग-अलग प्रभाव दिखाते हैं। रविवार से शुरू होने वाला पंचक रोग पंचक कहलाता है, जिसमें स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं।
Mrityu Panchak: ज्योतिष शास्त्र में पंचक काल को अशुभ अवधि माना जाता है। जब चंद्रमा कुंभ और मीन राशि के अंतिम पांच नक्षत्रों में गोचर करता है तो यह पंचक काल बनता है। इन पांच नक्षत्रों में धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद, उत्तरा भाद्रपद और रेवती शामिल हैं। इस दौरान शुभ कार्यों को टालने की सलाह दी जाती है क्योंकि इनका परिणाम उल्टा पड़ सकता है।
पंचक पांच दिनों का होता है और इसके शुरू होने वाले दिन के आधार पर इसके प्रकार तय किए जाते हैं। शनिवार से शुरू होने वाला पंचक सबसे खतरनाक माना जाता है जिसे मृत्यु पंचक कहा जाता है।
पंचक के विभिन्न प्रकार
पंचक के कई प्रकार हैं, जो शुरू होने वाले वार के अनुसार अलग-अलग प्रभाव दिखाते हैं। रविवार से शुरू होने वाला पंचक रोग पंचक कहलाता है, जिसमें स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं। सोमवार से राज पंचक होता है, जो राजसी या सरकारी कामों में बाधा ला सकता है। मंगलवार से अग्नि पंचक शुरू होता है जिसमें आग या जलन से जुड़े जोखिम बढ़ जाते हैं।
बुधवार या गुरुवार से शुरू होने वाला पंचक सामान्य माना जाता है लेकिन शुक्रवार से चोर पंचक लगता है जिसमें चोरी या धन हानि का भय रहता है। शनिवार से शुरू होने वाला पंचक मृत्यु पंचक होता है जो सभी में सबसे अधिक कष्टदायी माना जाता है। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार इस अवधि में मृत्यु तुल्य कष्ट, दुर्घटनाएं और गंभीर परेशानियां आ सकती हैं।
जून 2026 में मृत्यु पंचक की तिथियां
जून 2026 में मृत्यु पंचक 6 जून शनिवार की शाम 7 बजकर 3 मिनट से शुरू होगा। यह 11 जून गुरुवार की सुबह 8 बजकर 16 मिनट तक रहेगा। इस बार पंचक शनिवार को शुरू हो रहा है इसलिए इसे मृत्यु पंचक की श्रेणी में रखा गया है। इस अवधि में सावधानी बरतने की जरूरत है क्योंकि चंद्रमा इन पांच नक्षत्रों में गोचर कर रहा होगा।
क्यों माना जाता है मृत्यु पंचक सबसे खतरनाक?
मृत्यु पंचक को सबसे खतरनाक इसलिए माना जाता है, क्योंकि शनिवार का दिन शनि देव का होता है जो कर्म और न्याय का ग्रह है। जब पंचक शनि के दिन शुरू होता है तो इसकी ऊर्जा और अधिक तीव्र हो जाती है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस दौरान व्यक्ति को मृत्यु के समान कष्टों का सामना करना पड़ सकता है। शारीरिक चोट, दुर्घटना, मानसिक तनाव और आर्थिक हानि के जोखिम सबसे ज्यादा रहते हैं।
कई ग्रंथों में उल्लेख है कि इस काल में किए गए कार्य अपेक्षित परिणाम नहीं देते बल्कि बाधाएं बढ़ाते हैं। यमराज की ऊर्जा सक्रिय रहने की मान्यता भी इस अवधि को संवेदनशील बनाती है। यदि इस समय कोई नया काम शुरू किया जाए तो वह बीच में अटक सकता है या नुकसान पहुंचा सकता है।
मृत्यु पंचक में किन कार्यों से बचना चाहिए
मृत्यु पंचक में कई कार्यों को पूरी तरह टालने की सलाह दी जाती है। लकड़ी इकट्ठा करना या निर्माण से जुड़ा सामान जमा करना वर्जित है, क्योंकि इससे भवन संबंधी कामों में समस्या आ सकती है। चारपाई या पलंग बनवाना भी इस दौरान नहीं करना चाहिए।
घर की छत डालना या निर्माण कार्य शुरू करना मृत्यु पंचक में टाला जाता है। दक्षिण दिशा की यात्रा से बचना चाहिए क्योंकि दक्षिण यम दिशा मानी जाती है। विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन संस्कार, नया व्यापार शुरू करना जैसे मांगलिक कार्य इस अवधि में नहीं करने चाहिए।
नए वाहन खरीदना, महत्वपूर्ण दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करना या जोखिम भरे काम भी टालने चाहिए। चोट लगने या दुर्घटना का खतरा बढ़ने के कारण सड़क यात्रा में अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए।
पंचक में मृत्यु होने पर क्या होता है
पंचक काल में यदि किसी की मृत्यु हो जाए तो उसे अशुभ माना जाता है। गरुड़ पुराण और अन्य ग्रंथों के अनुसार ऐसी मृत्यु से परिवार में पांच मृत्यु या मृत्यु तुल्य कष्ट होने की आशंका रहती है। इसलिए विशेष विधि अपनाई जाती है।
शव के साथ आटे या कुश के पांच पुतले बनाकर उनका भी दाह संस्कार किया जाता है। पंचक शांति पूजा कराई जाती है ताकि परिवार के बाकी सदस्यों को सुरक्षा मिल सके। पंडित की सलाह से ही इन कार्यों को पूरा करना चाहिए।
मृत्यु पंचक से बचाव के उपाय
इस काल में शनि देव की पूजा करना फायदेमंद माना जाता है। काले तिल, सरसों का तेल या काले कपड़े दान करने से नकारात्मक प्रभाव कम हो सकते हैं। हनुमान चालीसा का पाठ या रुद्राक्ष धारण करना भी कुछ लोग इस दौरान करते हैं। सकारात्मक कार्य जैसे पूजा-पाठ, दान-पुण्य या आध्यात्मिक गतिविधियां इस अवधि में की जा सकती हैं। विवादों से दूर रहना और धैर्य रखना जरूरी है।
(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)