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Savan Shivratri 2026 : सावन शिवरात्रि 2026 कब है? जानिए तारीख, पूजा का शुभ समय और महत्व

जीवांजलि, धर्म डेस्कPublished by:
कोमल शर्मा
सार

Savan Shivratri:  सावन का महीना भगवान शिव की पूजा के लिए सबसे पवित्र समय माना जाता है। इस पूरे महीने में, भक्त शिवलिंग का जलाभिषेक और रुद्राभिषेक करके, महामृत्युंजय मंत्र का जाप करके और व्रत रखकर भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

Savan Shivratri: 
Savan Shivratri:  सावन का महीना भगवान शिव की पूजा के लिए सबसे पवित्र समय माना जाता है। इस पूरे महीने में, भक्त शिवलिंग का जलाभिषेक और रुद्राभिषेक करके, महामृत्युंजय मंत्र का जाप करके और व्रत रखकर भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। हालाँकि, सावन के महीने में एक खास रात ऐसी होती है जिसका हर शिव भक्त बेसब्री से इंतज़ार करता है वो है सावन शिवरात्रि। माना जाता है कि इस दिन सच्चे मन से भगवान शिव की पूजा करने से जीवन की परेशानियाँ दूर होती हैं, मनोकामनाएँ पूरी होती हैं और भक्त को विशेष आध्यात्मिक पुण्य मिलता है। ज़ाहिर है, हर साल यह सवाल उठता है सावन शिवरात्रि 2026 कब है? आइए इसकी तारीख, शुभ समय, धार्मिक महत्व और पूजा की विधि के बारे में जानें।

 सावन शिवरात्रि 2026 कब है?

सावन शिवरात्रि 2026 12 अगस्त 2026, बुधवार को मनाई जाएगी। यह सावन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को पड़ती है और भगवान शिव की आराधना के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है।

 सावन शिवरात्रि क्यों खास है?

महाशिवरात्रि की तरह ही सावन शिवरात्रि का भी विशेष महत्व है। बस फर्क इतना है कि यह त्योहार भगवान शिव के सबसे प्रिय महीने 'सावन' (श्रावण) में आता है। चूंकि सावन का महीना शिव की पूजा के लिए समर्पित माना जाता है, इसलिए इस दौरान आने वाली शिवरात्रि पर की गई पूजा से मिलने वाला आध्यात्मिक पुण्य कई गुना अधिक माना जाता है।शास्त्रों के अनुसार, इस दिन की गई पूजा, मंत्र-जाप, तपस्या और दान का फल बहुत जल्दी मिलता है। यही कारण है कि देश भर के शिव मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है।

सावन शिवरात्रि पर पूजा कैसे करें?

सावन शिवरात्रि के दिन सुबह जल्दी उठें, स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। फिर, भगवान शिव का ध्यान करते हुए व्रत रखने का संकल्प लें।
पूजा के दौरान, शिवलिंग का जल, गंगाजल, दूध, दही, शहद, घी और चीनी से क्रमवार अभिषेक करें। इसके बाद बेलपत्र, धतूरा, भांग, सफेद फूल, चंदन का लेप, अक्षत और मौसमी फल चढ़ाएं।
पूजा करते समय "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जाप करें। यदि संभव हो तो महामृत्युंजय मंत्र का भी 108 बार जाप करें। शाम को भगवान शिव की आरती करें और रात में शिव कथा या शिव पुराण सुनें।

 सावन शिवरात्रि व्रत के नियम

इस दिन भक्त अपनी क्षमता के अनुसार निर्जल , फलाहार या सात्विक व्रत रख सकते हैं। पूरे दिन मन, वचन और कर्म से पवित्र रहने का प्रयास करें। क्रोध, झूठ, बहस और नकारात्मक विचारों से बचें।
पूजा के दौरान भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए बेलपत्र अवश्य चढ़ाएं। ध्यान रखें कि *बेलपत्र* साफ़ हों और उनमें कोई कटा-फटा निशान न हो। याद रखें कि पूजा के दौरान भगवान शिव को तुलसी के पत्ते नहीं चढ़ाए जाते हैं।

 रात की पूजा का खास महत्व

सावन शिवरात्रि की सबसे अहम पूजा रात में होती है। माना जाता है कि शिवरात्रि की रात भगवान शिव को याद करने और उनका ध्यान करने से इंसान के पाप मिट जाते हैं और आध्यात्मिक तरक्की का रास्ता खुलता है।कई भक्त पूरी रात जागकर "ॐ नमः शिवाय" का जाप करते हैं, शिव भजन गाते हैं और रात के चारों प्रहरों में पूजा-अर्चना करते हैं। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है।

सावन शिवरात्रि पर क्या करें?

सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे, अधिमानतः हल्के या सफेद रंग के वस्त्र धारण करें।
भगवान शिव का स्मरण करते हुए पूरे श्रद्धाभाव से व्रत रखने का संकल्प लें। अपनी क्षमता के अनुसार निर्जल, फलाहार या सात्विक व्रत रख सकते हैं।
शिवलिंग पर जल, गंगाजल, दूध, दही, शहद, घी और शक्कर से अभिषेक करें। इसके बाद बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल, चंदन और सफेद पुष्प अर्पित करें।
इस दिन पंचाक्षरी मंत्र "ॐ नमः शिवाय" तथा महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
भगवान शिव के साथ माता पार्वती की पूजा करने से दांपत्य जीवन में सुख-शांति आती है और अविवाहित लोगों को योग्य जीवनसाथी मिलने की कामना पूर्ण होने की मान्यता है।
यदि संभव हो तो रात्रि में भजन-कीर्तन, शिवपुराण का पाठ या शिव मंत्रों का जाप करें। शिवरात्रि की रात्रि पूजा का विशेष महत्व माना गया है।
जरूरतमंद लोगों को भोजन, वस्त्र या अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान दें। इसे शुभ और पुण्यदायी माना गया है।

सावन शिवरात्रि पर क्या नहीं करें?

इस दिन मांस, मछली, अंडा, शराब तथा अन्य तामसिक पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए।
शिव पूजा का मुख्य आधार मन की शुद्धता है। इसलिए क्रोध, कटु वचन और किसी से विवाद करने से बचें।
इस दिन सत्य बोलें और किसी को धोखा देने या अपमानित करने से बचें।
भगवान शिव की पूजा में तुलसी के पत्ते अर्पित नहीं किए जाते। इसकी जगह बेलपत्र, धतूरा और भांग अर्पित करना शुभ माना जाता है।
भगवान शिव को हमेशा ताजे, साफ और बिना कटे-फटे बेलपत्र ही अर्पित करें।
पूजा पूरी श्रद्धा, एकाग्रता और विधि-विधान से करें। जल्दबाजी में पूजा करना उचित नहीं माना जाता।
सावन शिवरात्रि के दिन सभी के प्रति सम्मान, दया और विनम्रता का भाव रखें।

सावन शिवरात्रि का धार्मिक महत्व

सावन शिवरात्रि को भगवान शिव की पूजा के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान शिव अपने भक्तों पर विशेष कृपा बरसाते हैं। जो व्यक्ति श्रद्धा और भक्ति के साथ व्रत रखता है और शिवलिंग का अभिषेक करता है, उसके जीवन की बाधाएँ धीरे-धीरे दूर होने लगती हैं।यह भी माना जाता है कि इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की एक साथ पूजा करने से वैवाहिक जीवन सुखमय होता है। कुंवारे पुरुष और महिलाएं मनचाहा जीवनसाथी पाने की कामना से इस दिन व्रत रखते हैं।

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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।

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