Mata Anjani:भगवान हनुमान की वीरता, भक्ति और अद्भुत शक्तियों से तो हर कोई परिचित है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हनुमान जी की माता अंजनी स्वयं एक अप्सरा थीं? आखिर ऐसा क्या हुआ कि स्वर्गलोक की एक सुंदर अप्सरा को वानरी के रूप में जन्म लेना पड़ा?
Mata Anjani: भगवान हनुमान की वीरता, भक्ति और अद्भुत शक्तियों से तो हर कोई परिचित है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हनुमान जी की माता अंजनी स्वयं एक अप्सरा थीं? आखिर ऐसा क्या हुआ कि स्वर्गलोक की एक सुंदर अप्सरा को वानरी के रूप में जन्म लेना पड़ा? और क्या इस श्राप का संबंध स्वयं भगवान हनुमान के जन्म से था? धार्मिक ग्रंथों और पौराणिक कथाओं में माता अंजनी के पूर्व जन्म को लेकर अलग-अलग कथाएं मिलती हैं।इन्हीं में से एक कथा के अनुसार, माता अंजनी अपने पिछले जन्म में पुंजिकस्थला नाम की एक सुंदर अप्सरा थीं। वह देवलोक में रहती थीं और अपनी सुंदरता के लिए प्रसिद्ध थीं। हालांकि, उनका स्वभाव बेहद चंचल और शरारती बताया जाता है।कहा जाता है कि एक बार उनकी इसी चंचलता के कारण एक ऋषि की तपस्या भंग हो गई। कुछ कथाओं में यह ऋषि अलग-अलग बताए गए हैं। चलिए आापको इन कथाओं के बारे में बताते हैं
माता अंजनी को किसने दिया था श्राप
एक कथा के अनुसार पुंजिकस्थला ने तपस्या में लीन ऋषि की ओर एक फल फेंक दिया, जिससे उनका ध्यान भंग हो गया। ऋषि उनके इस व्यवहार से अत्यंत क्रोधित हो गए और उन्होंने पुंजिकस्थला को वानरी के रूप में जन्म लेने का श्राप दे दिया।श्राप सुनकर पुंजिकस्थला को अपनी गलती का एहसास हुआ। उन्होंने ऋषि से क्षमा मांगी और श्राप वापस लेने की प्रार्थना की। ऋषि का हृदय पिघल गया, लेकिन दिया हुआ श्राप पूरी तरह वापस लेना संभव नहीं था। तब ऋषि ने श्राप को एक वरदान में बदलते हुए कहा कि उनका वानरी रूप भी अत्यंत तेजस्वी और सुंदर होगा। इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी आशीर्वाद दिया कि उनके गर्भ से एक असाधारण और महान पुत्र का जन्म होगा जिसकी कीर्ति तीनों लोकों में प्रसिद्ध होगी। श्राप के प्रभाव से पुंजिकस्थला ने अगले जन्म में अंजनी के रूप में जन्म लिया। उनका विवाह वानरराज केसरी से हुआ। इसके बाद भगवान शिव के अंश से उनके घर ऐसे पुत्र का जन्म हुआ, जिसने आगे चलकर अपनी शक्ति, बुद्धि और श्रीराम के प्रति अद्भुत भक्ति से पूरी दुनिया में अपना नाम अमर कर दिया।यही बालक आगे चलकर पवनपुत्र हनुमान कहलाए।
हनुमान जी से जुड़ी रोचक प्रसंग
हनुमान जी के बचपन की कथाएं भी बेहद रोचक हैं। बाल अवस्था में उन्होंने सूर्य को एक चमकता हुआ फल समझ लिया और उसे खाने के लिए आकाश में छलांग लगा दी। उनकी अद्भुत शक्ति देखकर देवता भी आश्चर्यचकित रह गए।कहा जाता है कि बचपन में हनुमान अपनी शक्तियों से अनजान थे और अपनी शरारतों के कारण ऋषियों को भी परेशान कर दिया करते थे। उनकी चंचलता से परेशान होकर ऋषियों ने उन्हें ऐसा श्राप दिया कि वे अपनी शक्तियों को भूल जाएंगे और जब कोई उन्हें उनकी शक्ति और सामर्थ्य की याद दिलाएगा, तभी वे उन्हें पहचान पाएंगे।
रामायण में इसका सबसे महत्वपूर्ण प्रसंग तब सामने आता है, जब माता सीता की खोज के लिए वानर सेना समुद्र के किनारे पहुंचती है। लंका तक पहुंचने के लिए विशाल समुद्र को पार करना था, लेकिन हनुमान जी स्वयं अपनी शक्ति को भूल चुके थे।तभी जामवंत ने उन्हें उनकी असली शक्ति का स्मरण कराया। उन्होंने हनुमान जी को बताया कि वे कितने शक्तिशाली हैं और उनके लिए समुद्र पार करना असंभव नहीं है।जामवंत के शब्दों ने जैसे हनुमान जी के भीतर सोई हुई शक्ति को जगा दिया। उन्हें अपनी सामर्थ्य का एहसास हुआ और उन्होंने विशाल रूप धारण कर समुद्र पार करने के लिए छलांग लगा दी।
प्रसंग से क्या सीख मिलती है
यही प्रसंग हमें एक गहरी सीख भी देता है कभी-कभी हमारे भीतर शक्ति मौजूद होती है, लेकिन हमें उसकी पहचान नहीं होती। जरूरत होती है तो बस किसी ऐसे व्यक्ति की, जो हमें हमारी क्षमता का एहसास करा सके।माता अंजनी की कथा भी इसी तरह रहस्य और प्रेरणा से भरी हुई है। जिस श्राप ने उन्हें स्वर्ग की अप्सरा से वानरी बनाया, उसी श्राप के पीछे छिपा था एक महान वरदान भगवान हनुमान के जन्म का वरदानइसीलिए माता अंजनी का नाम लेते ही केवल एक मां की छवि सामने नहीं आती, बल्कि उस महान माता की छवि सामने आती है जिनकी कोख से जन्म लेकर हनुमान जी ने भक्ति, शक्ति, साहस और समर्पण की ऐसी मिसाल कायम की, जिसे युगों-युगों तक याद किया जाता रहेगा। यह भी पढ़ें-
(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)