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Mangala Gauri Vrat 2025: सावन में कब है पहला मंगला गौरी व्रत? जानें तिथि, महत्व और पूजन विधि

जीवांजलि, धर्म डेस्कPublished by:
साक्षी
सार

Mangala Gauri Vrat Date: मंगला गौरी व्रत सुहागिन महिलाओं और कुंवारी कन्याओं के लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि यह व्रत पति की लंबी आयु, सुखी वैवाहिक जीवन और मनचाहे वर की प्राप्ति के लिए किया जाता है। 

मंगला गौरी व्रत
Mangala Gauri Vrat 2025 Date And Pujan Vidhi: सावन मास को हिंदू धर्म में भगवान शिव (Bhagwan Shiv) और माता पार्वती (Mata Parvati) को समर्पित पवित्र महीना माना जाता है। यह महीना भक्ति और आध्यात्मिकता का विशेष समय होता है। इस माह में जहां सोमवार (Sawan Somvar) को भगवान शिव की पूजा की जाती है, वहीं प्रत्येक मंगलवार को माता पार्वती के मंगला गौरी (Magala Gauri) स्वरूप की आराधना की जाती है। मंगला गौरी व्रत सुहागिन महिलाओं और कुंवारी कन्याओं के लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि यह व्रत पति की लंबी आयु, सुखी वैवाहिक जीवन और मनचाहे वर की प्राप्ति के लिए किया जाता है। आइए जानते हैं कि पहला मंगला गौरी व्रत कब है और क्या है इसका महत्व

पहला मंगला गौरी व्रत की तिथि

वैदिक पंचांग के अनुसार, मंगला गौरी व्रत इस साल 15 जुलाई को मनाया जाएगा। इस साल सावन महीना (Sawan 2025) आज से शुरू हो चुका है, जो 9 अगस्त तक रहेगा। इस महीने में चार मंगलवार पडे़ंगे, जिस दिन मंगला गौरी व्रत मनाया जाएगा। 

मंगला गौरी व्रत का धार्मिक महत्व

मंगला गौरी व्रत माता पार्वती के मंगला स्वरूप को समर्पित है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को अपने पति के रूप में पाने के लिए कठिन तप और कई व्रत किए थे, जिनमें मंगला गौरी व्रत भी शामिल था। इस व्रत को करने से सुहागिन महिलाओं को अखंड सौभाग्य, पति की लंबी आयु, और परिवार में सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। वहीं, कुंवारी कन्याएं इस व्रत को मनचाहे जीवनसाथी की प्राप्ति के लिए रखती हैं।

इस व्रत का एक अन्य महत्व यह है कि यह कुंडली में मंगल दोष को कम करने में सहायक माना जाता है। जिन लोगों के वैवाहिक जीवन में बाधाएं या समस्याएं आ रही हों, उनके लिए यह व्रत विशेष रूप से लाभकारी है। साथ ही, यह व्रत संतान प्राप्ति और संतान की रक्षा के लिए भी किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत को कम से कम 16 मंगलवार या 5 वर्ष तक लगातार करने से माता गौरी की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

मंगला गौरी व्रत की पूजा विधि

सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ़ लाल या हरे रंग के वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल को साफ़ करें। फिर एक आसन पर लाल या सफ़ेद कपड़ा बिछाएं। उस पर माता गौरी और भगवान शिव की मूर्ति की स्थापना करें और जल से भरा एक पात्र रखें। माता गौरी की मूर्ति को गंगाजल, दूध, दही, और पंचामृत से स्नान कराएं। भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा, और चंदन अर्पित करें। माता को लाल चुनरी, सुहाग का सामान, और मिठाई का भोग लगाएं। पूजा के दौरान माता गौरी के मंत्रों का जाप करें। इसके बाद मंगला गौरी व्रत की कथा पढ़ें या सुनें। इसके बाद माता गौरी और भगवान शिव की आरती करें। पूजा के बाद प्रसाद को परिवार के सदस्यों और जरूरतमंदों में बांटें।

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