Ganesh Puja: गजानन संकष्टी चतुर्थी का पर्व भगवान गणेश को समर्पित है, जो सभी विघ्नों को हरने वाले और बुद्धि के दाता माने जाते हैं। इस दिन गणेश जी की विधिवत पूजा और मंत्र जाप करने से सभी बाधाएं दूर होती हैं और मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
Gajanan Sankashti Chaturthi 2025 Puja Mantra: हिन्दू धर्म में गजानन संकष्टी चतुर्थी का खास महत्व होता है। इस दिन भगवान गणेश की पूजा करने से लोगों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन में आने वाले कष्टों से छुटकारा मिलता है। गजानन संकष्टी चतुर्थी पर भगवान गणेश (Bhagwan Ganesh) को प्रसन्न करने और अपने जीवन से सभी विघ्नों को दूर करने के लिए इन शक्तिशाली मंत्रों का जाप करना सबसे शुभ माना जाता है। सावन 2025 की पहली गजानन संकष्टी चतुर्थी 14 जुलाई दिन सोमवार को पड़ रही है। यह दिन सोमवार होने के कारण भगवान शिव (Lord Shiva) और गणेश जी दोनों की कृपा प्राप्त करने का विशेष अवसर है।
भगवान गणेश को 'विघ्नहर्ता' कहा जाता है, यानी सभी बाधाओं और संकटों को दूर करने वाले। इस दिन व्रत रखने और उनकी आराधना करने से जीवन में आने वाली हर तरह की मुश्किलें, परेशानियां और बाधाएं दूर होती हैं। भक्त मानते हैं कि गणेश जी अपने भक्तों को हर विपदा से बचाते हैं। भगवान गणेश को बुद्धि और ज्ञान का देवता भी माना जाता है। इस दिन उनकी पूजा करने से व्यक्ति को बुद्धि, विवेक और सही निर्णय लेने की क्षमता प्राप्त होती है। छात्रों और ज्ञानार्जन करने वाले व्यक्तियों के लिए यह व्रत विशेष रूप से फलदायी होता है।
इन मंत्रों का करें जाप
गणेश गायत्री मंत्र: ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि। तन्नो दन्तिः प्रचोदयात्॥ यह मंत्र भगवान गणेश के एकादश स्वरूप का आह्वान करता है और बुद्धि, ज्ञान तथा बाधाओं को दूर करने की शक्ति प्रदान करता है। इसका जाप करने से एकाग्रता बढ़ती है और व्यक्ति सही निर्णय लेने में सक्षम होता है।
वक्रतुण्ड महाकाय मंत्र: वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥ यह मंत्र भगवान गणेश से प्रार्थना है कि वे सभी कार्यों को बिना किसी बाधा के पूर्ण करें। यह किसी भी नए कार्य की शुरुआत से पहले या किसी भी महत्वपूर्ण कार्य में सफलता पाने के लिए बहुत प्रभावी माना जाता है।
मूल गणेश मंत्र: ॐ गं गणपतये नमः॥ यह गणेश जी का सबसे सरल और प्रभावी मंत्र है। इसका जाप करने से गणेश जी शीघ्र प्रसन्न होते हैं और सभी कष्टों को दूर करते हैं। इसे लगातार 108 बार जपने से विशेष लाभ मिलता है।
पूजा विधि में मंत्रों का प्रयोग
पूजा शुरू करने से पहले, जब आप व्रत का संकल्प लें, तो भगवान गणेश का ध्यान करते हुए इनमें से किसी एक मंत्र का जाप कर सकते हैं।
गणेश जी की प्रतिमा या शिवलिंग पर जलाभिषेक करते समय "ॐ गं गणपतये नमः" मंत्र का जाप करें।
भगवान गणेश को दूर्वा घास और मोदक चढ़ाते समय भी इन मंत्रों का जाप करना शुभ होता है।
मुख्य पूजा के समय, आप अपनी सुविधानुसार इनमें से किसी भी मंत्र का 108 बार या उससे अधिक बार जाप कर सकते हैं।
पूजा समाप्त होने के बाद, आरती करें और फिर भगवान गणेश से अपनी मनोकामना पूरी करने और सभी विघ्नों को दूर करने की प्रार्थना करते हुए मंत्रों का जाप करें।
इन मंत्रों का श्रद्धापूर्वक जाप करने से भगवान गणेश की कृपा प्राप्त होती है और जीवन के सभी विघ्न-बाधाएं दूर होती हैं।
जानें क्या है मान्यता
मान्यता है कि संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखने से घर में सुख, शांति, समृद्धि और सौभाग्य का वास होता है। आर्थिक तंगी दूर होती है और धन-धान्य में वृद्धि होती है। यह नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर घर में सकारात्मकता लाता है। जो दंपत्ति संतान सुख से वंचित हैं, उनके लिए यह व्रत बहुत शुभ माना जाता है। विधि-विधान से व्रत रखने पर संतान प्राप्ति के योग बनते हैं। इसके अलावा, संतान के स्वास्थ्य, लंबी उम्र और कल्याण के लिए भी यह व्रत रखा जाता है। सच्चे मन और श्रद्धा से इस व्रत को करने वाले भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। चाहे वह विवाह संबंधी इच्छा हो, करियर में सफलता हो, या किसी बीमारी से मुक्ति, गणेश जी सभी इच्छाएं पूर्ण करते हैं।