Mmandir Mystery: क्या आपने कभी सोचा है कि जिस मंदिर में सुबह से श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है उसी मंदिर के कपाट दोपहर में अचानक क्यों बंद कर दिए जाते हैं?कई लोग सोचते हैं कि शायद पुजारी आराम करने के लिए मंदिर बंद कर देते हैं।
Mandir Mystery: क्या आपने कभी सोचा है कि जिस मंदिर में सुबह से श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है उसी मंदिर के कपाट दोपहर में अचानक क्यों बंद कर दिए जाते हैं?कई लोग सोचते हैं कि शायद पुजारी आराम करने के लिए मंदिर बंद कर देते हैं। कुछ लोगों को लगता है कि यह सिर्फ एक पुरानी परंपरा है। लेकिन सच इससे कहीं ज्यादा चौकाने वाला और आध्यात्मिक है। दरअसल, मंदिर के कपाट दिन में बंद करने के पीछे एक ऐसा रहस्य छिपा है अगर आप इस रहस्य को जानना चाहते हैं तो इस लेख को अंत तक जरूर पढ़ें ।
दिन में क्यों बंद किए जाते हैं मंदिर के कपाट ?
आपको बता दें कि सनातन परंपरा में मंदिर को केवल पूजा करने की जगह नहीं माना जाता बल्कि भगवान का निवास माना जाता है। जिस तरह हमारे घर में मेहमानों और परिवार के सदस्यों के लिए अलग-अलग समय और व्यवस्था होती है, उसी तरह भगवान की सेवा का भी एक निश्चित क्रम होता है। सुबह ब्रह्म मुहूर्त में भगवान को जगाया जाता है। इसके बाद उनका स्नान, श्रृंगार, वस्त्र परिवर्तन और भोग लगाया जाता है। इस दौरान भक्तों को दर्शन कराए जाते हैं।लेकिन दोपहर होते-होते एक समय ऐसा आता है जब भगवान को विश्राम कराया जाता है। यही वह समय होता है जब मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं।
क्या भगवान आराम करते हैं ?
अगर शास्त्रों और मंदिर के परपंराओं के अनुसार माने तो हां भगवान आराम करते हैं। क्योंकि उन्हें सजीव स्वरूप मानकार उनकी सेवा की जाती है इसलिए जिस तरह हम खाना खाने के बाद आराम करते हैं ठीक उसी तरह भगवान को भी भोग के बाद विश्राम कराया जाता है। इसी कारण दोपहर के समय मंदिर के गर्भगृह के कपाट बंद कर दिए जाते हैं, ताकि किसी प्रकार की परेशानी न हो। एक और बेहद रोचक मान्यता है आपको बता दें कि कहा जाता है कि जब मंदिर के कपाट बंद होते हैं, तब देवता, ऋषि, सिद्ध पुरुष और दिव्य शक्तियाँ भगवान के दर्शन और पूजा के लिए आती हैं। यह समय केवल उनके लिए माना जाता है। इसलिए आम लोगों का प्रवेश उस दौरान रोक दिया जाता है। भले ही इस मान्यता का कोई वैज्ञानिक प्रमाण न हो, लेकिन सदियों से कई प्राचीन मंदिर इसी परंपरा का पालन करते आ रहे हैं।
मंदिर के कपाट बंद होने का व्यावहारिक कारण
प्राचीन समय में मंदिरों में बिजली या आधुनिक सुविधाएँ नहीं होती थीं। दोपहर की तेज गर्मी में पत्थर के मंदिर बहुत गर्म हो जाते थे। ऐसे में पुजारी भगवान की सेवा, सफाई, अगली आरती की तैयारी और मंदिर की व्यवस्था के लिए कुछ समय निकालते थे। यही समय धीरे-धीरे एक धार्मिक परंपरा बन गया। इस दौरान भगवान के वस्त्र भी बदले जाते हैं, नए भोग की तैयारी होती है और शाम की आरती की व्यवस्था की जाती है।
क्यों अलग-अलग होता है मंदिरों का दर्शन समय?
कुछ प्रसिद्ध मंदिर पूरे दिन खुले रहते हैं, जबकि कई मंदिरों में दोपहर के समय एक से तीन घंटे तक कपाट बंद रहते हैं। यह पूरी तरह उस मंदिर की परंपरा, संप्रदाय और सेवा-पद्धति पर निर्भर करता है। इसलिए अगर कभी आप मंदिर जाएँ और देखें कि कपाट बंद हैं, तो यह मत सोचिए कि मंदिर बंद है। बल्कि समझिए कि उस समय भगवान विश्राम कर रहे हैं या उनकी विशेष सेवा चल रही है।सनातन धर्म हमें यही सिखाता है कि भगवान केवल पूजा की वस्तु नहीं, बल्कि परिवार के सबसे आदरणीय सदस्य हैं। उन्हें जगाना, स्नान कराना, भोजन कराना, विश्राम देना और फिर शाम को पुनः दर्शन कराना यह सब प्रेम और सेवा की भावना का प्रतीक है।
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(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)