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Jagannath Temple: वराणसी के इस मंदिर के छत पर विराजमान होते हैं भगवान जगन्नाथ, जानें अनोखी पंरपरा

जीवांजलिPublished by:
राघवेंद्र तिवारी
सार

Varanasi Jagannath Temple: वराणसी के काशी में भगवान जगन्नाथ का एक प्रसिद्ध मंदिर है। जहां पर 200 साल से एक परंपरा निभाई जा रही है। तो आज इस खबर में उसी खास परंपरा के बारे में विस्तार से जानते हैं।

Jagannath Temple
Varanasi Jagannath Temple: काशी दुनिया के सबसे प्राचीन शहरों में से एक है। यह शहर अपनी परंपराओं के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है। यहां भगवान जगन्नाथ का प्राचीन मंदिर है। वैसे तो भगवान जगन्नाथ मंदिर के गर्भगृह में भक्तों को दर्शन देते हैं, लेकिन साल में एक बार ऐसा मौका आता है जब वे छत पर विराजमान होते हैं। 

इस दौरान भक्त उन्हें लगातार गंगाजल से स्नान भी कराते हैं। ज्येष्ठ पूर्णिमा पर यह नजारा पूरे दिन देखने को मिलता है। भक्त अपने मन में इस भावना के साथ मंदिर की छत पर आते हैं कि उनके आराध्य जगन्ना भगवान जगन्नाथ गर्मी से पीड़ित हैं, उन्हें शीतलता मिले। इसलिए उन्हें पवित्र गंगाजल से स्नान कराया जाता है। भक्तों के प्रेम के कारण पूरे दिन स्नान करने के बाद भगवान जगन्नाथ बीमार हो जाते हैं। 

200 साल से चली आ रही है यह परंपरा

Jagannath Temple
अस्सी स्थित जगन्नाथ मंदिर के प्रधान पुजारी राधेश्याम पांडेय ने बताया कि सुबह 11 घड़ों के जल से स्नान कराने के बाद भगवान जगन्नाथ की जलयात्रा की परंपरा शुरू होती है। फिर उनकी आरती की जाती है। यह परंपरा मंदिर की स्थापना के समय से ही यानी 200 साल से भी पहले से चली आ रही है।

भगवान 14 दिनों तक एकांतवास में रहते हैं

काशी के पुजारी जी के अनुसार, भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा आषाढ़ कृष्ण प्रतिपदा तिथि से चतुर्दशी तिथि तक बीमार रहते हैं। इस दौरान उन्हें काढ़ा पिलाया जाता है। फिर यह काढ़ा भगवान जगन्नाथ के भक्तों में प्रसाद के रूप में बांट दिया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो भी भक्त इस काढ़े का प्रसाद ग्रहण करता है, उसे पूरे साल बीमारी से मुक्ति मिलती है। आखिरी दिन जब भगवान जगन्नाथ स्वस्थ हो जाते हैं, तो उन्हें परवल का जूस पिलाया जाता है।

भगवान नगर भ्रमण पर निकलते हैं

इसके बाद जब भगवान जगन्नाथ स्वस्थ हो जाते हैं, तो वे मनफेर के लिए नगर भ्रमण पर निकलते हैं। इसे रथ यात्रा कहते हैं। इस दौरान भगवान तीन दिनों तक भक्तों के बीच रहते हैं और उनकी मनोकामना सुनते हैं। इस दौरान काशी में तीन दिवसीय मेला लगता है। जिसे रथ यात्रा मेला कहते हैं।

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