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Kailash Manasarovar Yatra: कैलाश मानसरोवर पर विदेश मंत्रालय का बड़ा अपडेट, जानें कब से कब तक चलेगी यात्रा

जीवांजलिPublished by:
राघवेंद्र तिवारी
सार

Kailash Mansarovar Yatra: कैलाश मानसरोवर यात्रा इस साल जून 2025 से लेकर अगस्त 2025 तक चलेगी। बता दें कि विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस वर्ष यानी 2025 में उत्तराखंड से लिपुलेख दर्रे को पार करते हुए पांच जत्थे, जिनमें प्रत्येक में 50 तीर्थयात्री होंगे, यात्रा करेंगे।

Kailash Manasarovar Yatra
Kailash Mansarovar Yatra: कैलाश मानसरोवर यात्रा इस साल जून 2025 से लेकर अगस्त 2025 तक चलेगी। बता दें कि विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस वर्ष यानी 2025 में उत्तराखंड से लिपुलेख दर्रे को पार करते हुए पांच जत्थे, जिनमें प्रत्येक में 50 तीर्थयात्री होंगे, यात्रा करेंगे। इसी प्रकार, सिक्किम से नाथू ला दर्रे को पार करते हुए 10 जत्थे, जिनमें प्रत्येक में 50 तीर्थयात्री होंगे, यात्रा करेंगे। आवेदन स्वीकार करने के लिए वेबसाइट http://kmy.gov.in खोल दी गई है। आवेदकों में से तीर्थयात्रियों का चयन निष्पक्ष, कंप्यूटर जनित, यादृच्छिक और लिंग-संतुलित चयन प्रक्रिया के माध्यम से किया जाएगा।

30 जून से शुरू होगी यात्रा

कैलाश मानसरोवर यात्रा 30 जून से शुरू होगी। यात्रा राज्य सरकार और विदेश मंत्रालय के संयुक्त प्रयासों से आयोजित की जाएगी। कोविड महामारी के कारण वर्ष 2020 से कैलाश मानसरोवर यात्रा आयोजित नहीं की जा सकी थी। हालांकि, पांच साल बाद शुरू हो रही कैलाश मानसरोवर यात्रा पर भी महंगाई की मार पड़ सकती है। 

केएमवीएन को 35 हजार की जगह 56 हजार देने होंगे 

इस बार श्रद्धालुओं को कुमाऊं मंडल विकास निगम (केएमवीएन) को 35 हजार की जगह 56 हजार रुपये देने होंगे। केएमवीएन इस राशि से यात्रियों की यात्रा, आवास और भोजन की व्यवस्था करेगा। इसके अलावा मेडिकल जांच, चीन वीजा, कुली, तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र और चीन सीमा के लिए अलग से खर्च करना होगा। कुमाऊं मंडल विकास निगम लिपुलेख दर्रे के जरिए कैलाश मानसरोवर यात्रा का प्रबंधन करता है। इस बार रजिस्ट्रेशन के साथ ही श्रद्धालुओं को भोजन, यात्रा और आवास के लिए केएमवीएन को 56 हजार रुपये देने होंगे। 

प्रत्येक ग्रुप 22 दिन की यात्रा करेगा 

कुमाऊं मंडल विकास निगम उत्तराखंड से कैलाश मानसरोवर यात्रा का संचालन करेगा। यह यात्रा दिल्ली से शुरू होकर पिथौरागढ़ के लिपुलेख दर्रे मार्ग से होकर गुजरेगी। पहला समूह 10 जुलाई को लिपुलेख दर्रे के रास्ते चीन में प्रवेश करेगा। यात्रियों का आखिरी समूह 22 अगस्त को चीन से भारत के लिए रवाना होगा। प्रत्येक समूह दिल्ली से रवाना होगा और टनकपुर, धारचूला में एक-एक रात, गुंजी और नाभीडांग (तकलाकोट) में दो-दो रातें रुकने के बाद चीन में प्रवेश करेगा। कैलाश दर्शन के बाद वापसी की यात्रा में यह समूह चीन से रवाना होगा और बूंदी, चौकोड़ी, अल्मोड़ा में एक-एक रात रुकने के बाद दिल्ली पहुंचेगा। प्रत्येक समूह 22 दिनों की यात्रा करेगा।

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