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Parivartini Ekadashi : कब है परिवर्तिनी एकादशी, जानिए तिथि ,शुभ मुहूर्त और महत्व

जीवांजलिPublished by:
कोमल शर्मा
सार

Parivartini Ekadashi : परिवर्तिनी एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है। भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी को रखा जाने वाला यह व्रत चातुर्मास के दौरान विशेष महत्व रखता है

Parivartini Ekadashi :
Parivartini Ekadashi : परिवर्तिनी एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है। भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी को रखा जाने वाला यह व्रत चातुर्मास के दौरान विशेष महत्व रखता है यह वह समय है जब पारंपरिक रूप से शुभ कार्य वर्जित होते हैं। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु योग निद्रा में अपनी मुद्रा बदलते हैं। इस वर्ष, एकादशी तिथि 21 सितंबर की रात को शुरू होकर अगले दिन तक रहेगी, जिससे व्रत की सही तारीख को लेकर कुछ भ्रम की स्थिति बन सकती है। परिवर्तिनी एकादशी व्रत के सही दिन और पूजा के शुभ समय का पता लगाने के लिए पंचांग देखें।

एकादशी व्रत कब रखा जाएगा?

वैदिक पंचांग के अनुसार, भाद्रपद शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 21 सितंबर को रात 8:00 बजे शुरू होगी और 22 सितंबर को रात 9:43 बजे तक रहेगी। चूंकि 22 सितंबर को सूर्योदय के समय एकादशी तिथि मौजूद है इसलिए उदया तिथि के आधार पर व्रत उसी दिन मंगलवार, 22 सितंबर को रखा जाएगा।

पूजा के लिए शुभ समय

परिवर्तिनी एकादशी पर ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:35 बजे से 5:22 बजे के बीच होता है। सुबह नित्य कर्मों से निवृत्त होने के बाद, इस समय के दौरान व्रत रखने और भगवान विष्णु की पूजा करने का संकल्प लेना चाहिए। सुबह 9:11 बजे से दोपहर 1:45 बजे तक का समय पूजा के लिए शुभ माना जाता है। इस अवधि के भीतर, लाभ-उन्नति मुहूर्त सुबह 10:43 बजे से दोपहर 12:14 बजे तक रहता है। इसके बाद अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त दोपहर 12:14 बजे से 1:45 बजे तक रहता है। इसके अलावा, अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:49 बजे से दोपहर 12:38 बजे के बीच होगा।

इस दिन ग्रहों-नक्षत्रों का शुभ संयोग

परिवर्तिनी एकादशी पर रवि योग का संयोग भी बन रहा है। यह योग सुबह 6:09 बजे से सुबह 7:06 बजे तक रहेगा। इसके बाद सुकर्मा योग शुरू होगा और पूरी रात रहेगा सुकर्मा योग को बहुत शुभ माना जाता है। इस दिन सुबह 7:06 बजे तक उत्तराषाढ़ा नक्षत्र रहेगा जिसके बाद श्रवण नक्षत्र शुरू होगा।

परिवर्तिनी एकादशी पूजा सामग्री 

भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर

पंचामृत 

ताजे फूल 

धूप और दीप

चंदन

रोली और मौली

फल और मिठाई

नारियल

गंगा जल

परिवर्तिनी एकादशी पूजा की विधि

 परिवर्तिनी एकादशी का व्रत रखने का संकल्प एकादशी के दिन ही किसी शुभ समय पर लिया जाता है।
यह व्रत दशमी की शाम को सूर्यास्त के बाद शुरू होता है और एकादशी के अगले दिन 'पारण' के समय समाप्त  होता है।
व्रत वाले दिन सुबह जल्दी उठें और स्नान करें।
इसके बाद, भगवान के लिए एक पवित्र चौकी तैयार करें।
चौकी पर पीला कपड़ा बिछाएं और उस पर भगवान विष्णु की मूर्ति रखें।
इस दिन भगवान विष्णु के वामन अवतार की पूजा की जाती है।
उनका ध्यान करें और पूजा-अर्चना व आरती करें।
व्रत के दौरान पीली चीज़ों का इस्तेमाल करें।
कहा जाता है कि भगवान विष्णु को पीला रंग बहुत पसंद है इसलिए परिवर्तिनी एकादशी पर पीले रंग का इस्तेमाल करें।
खुद भी पीले कपड़े पहनें। पूजा के दौरान भगवान को पीले फूल, फल और मिठाइयां चढ़ाएं।
माना जाता है कि पूजा में तुलसी, फल और तिल ज़रूर शामिल करने चाहिए।
सभी तय नियमों का पालन करते हुए द्वादशी  दिन व्रत का समापन किया जाता है।
कहा जाता है कि जो भक्त पूरी श्रद्धा और नियमों के साथ परिवर्तिनी एकादशी का व्रत रखते हैं, उनकी सभी इच्छाएं पूरी होती हैं और उन्हें पापों से मुक्ति मिलती है।

परिवर्तिनी एकादशी व्रत के फ़ायदे

इस एकादशी का व्रत रखने से भगवान विष्णु का आशीर्वाद मिलता है।

यह व्रत पापों को नष्ट करता है और मोक्ष पाने में मदद करता है।

परिवर्तिनी एकादशी का व्रत रखने से मानसिक शांति, अच्छा स्वास्थ्य और समृद्धि मिलती है।

अगर यह व्रत पूरी आस्था और श्रद्धा के साथ रखा जाए, तो भगवान विष्णु का आशीर्वाद मिलता है और सभी दुख दूर हो जाते हैं।

परिवर्तिनी एकादशी पारण

परिवर्तिनी एकादशी का व्रत बुधवार, 23 सितंबर को पारण की रस्म के बाद समाप्त होगा। पूजा के बाद, सुबह 6:10 बजे से 8:35 बजे के बीच व्रत तोड़ा जा सकता है।

परिवर्तिनी एकादशी का धार्मिक महत्व

परिवर्तिनी एकादशी भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की पूजा के लिए बहुत शुभ मानी जाती है। पद्म पुराण जैसे धार्मिक ग्रंथों में एकादशी व्रत की महिमा का वर्णन किया गया है। माना जाता है कि पूरी श्रद्धा के साथ यह व्रत रखने से जाने-अनजाने में हुए पाप मिट जाते हैं और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। इस दिन भगवान विष्णु के वामन अवतार की पूजा करने की भी परंपरा है। भक्त व्रत रखते हैं और देवता को तुलसी के पत्ते, पीले फूल, फल और पंचामृत अर्पित करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि परिवर्तिनी एकादशी का व्रत रखने से धन, समृद्धि, सुख, शांति और सौभाग्य की प्राप्ति होती है साथ ही, भगवान विष्णु की कृपा से जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं।

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(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।) 

 

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