Shardiya Navratri 2026: देवी दुर्गा की मूर्ति को देखते ही सबसे पहले ध्यान उनकी दस भुजाओं पर जाता है। हर हाथ में कोई न कोई अलग हथियार या चीज़ होती है
Shardiya Navratri 2026: देवी दुर्गा की मूर्ति को देखते ही सबसे पहले ध्यान उनकी दस भुजाओं पर जाता है। हर हाथ में कोई न कोई अलग हथियार या चीज़ होती है, जिससे यह सवाल उठता है: देवी के दस हाथ क्यों हैं? क्या हर हाथ सच में किसी खास देवता से मिले हथियार का प्रतीक है? और क्या धर्मग्रंथों में साफ़ तौर पर देवी दुर्गा के दस हाथों का ज़िक्र है? इस विषय का एक दिलचस्प पहलू यह है कि आम धारणा और धर्मग्रंथों में दिए गए मूल विवरणों में थोड़ा फ़र्क है। देवी माहात्म्य जिसे दुर्गा सप्तशती भी कहा जाता है में देवी को कई हथियारों से सुसज्जित दिखाया गया है, लेकिन इसमें हर जगह उनकी भुजाओं की संख्या दस नहीं बताई गई है। इसलिए देवी दुर्गा के दस हाथों के महत्व को समझते समय, धर्मग्रंथों के प्रमाण और बाद की धार्मिक-कला परंपराओं के बीच फ़र्क करना ज़रूरी है।
देवी दुर्गा को दस हाथों वाला क्यों दिखाया जाता है?
देवी दुर्गा की दस भुजाओं वाली छवि मुख्य रूप से उनके महिषासुरमर्दिनी रूप से जुड़ी है। इसका मुख्य धार्मिक आधार मार्कंडेय पुराण का एक हिस्सा *देवी माहात्म्य है। इसमें महिषासुर के अत्याचारों से परेशान अलग-अलग देवताओं की शक्तियों के मिलने और उसके बाद देवी के प्रकट होने का वर्णन है। दूसरे अध्याय में विस्तार से बताया गया है कि कैसे शिव, विष्णु, वरुण, अग्नि, वायु , इंद्र, यम, ब्रह्मा, काल और विश्वकर्मा जैसे देवताओं ने उन्हें अलग-अलग हथियार और चीज़ें दीं।
क्या धर्मग्रंथों में साफ़ तौर पर दस हाथों का ज़िक्र है?
दुर्गा सप्तशती में हर जगह महिषासुरमर्दिनी के लिए "दस हाथ" नहीं बताए गए हैं। अलग-अलग ध्यान श्लोकों और विवरणों में देवी की भुजाओं की संख्या अलग-अलग बताई गई है। एक हिस्से में अठारह भुजाओं वाले रूप का वर्णन है, जबकि युद्ध के वर्णन में उन्हें हज़ारों भुजाओं के साथ दिशाओं को भरते हुए दिखाया गया है। इसलिए, यह कहना गलत होगा कि देवी दुर्गा की लोकप्रिय दस-भुजाओं वाली मूर्ति ही शास्त्रों में बताई गई एकमात्र और निश्चित रूप है। उनके दस
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हाथों में कौन-कौन से हथियार होते हैं?
देवी दुर्गा की मूर्तियों में दिखाए गए हथियारों का खास संयोजन क्षेत्र और परंपरा के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। आमतौर पर, त्रिशूल, चक्र, तलवार, धनुष-बाण, शंख, वज्र, गदा, पाश, अंकुश, कमल या अन्य दिव्य हथियार दिखाई देते हैं।
त्रिशूल को भगवान शिव की शक्ति का प्रतीक माना जाता है। यह तीन गुणों या सृष्टि के तीन मूल आयामों से भी जुड़ा है।
दुर्गा सप्तशती में चक्र को भगवान विष्णु से मिला दिव्य हथियार बताया गया है। यह धर्म को बनाए रखने और अधर्म का नाश करने की शक्ति का प्रतीक है।
वज्र इंद्र द्वारा दिया गया हथियार है। यह दृढ़ता, शक्ति और अटूट संकल्प का प्रतीक है।
कहा जाता है कि शंख देवी को वरुण से मिला था। धार्मिक परंपरा में, शंख की ध्वनि को शुभता और आध्यात्मिक जागृति से जोड़ा जाता है।
धनुष और बाण को मरुतों से जुड़े देवताओं के उपहार के रूप में बताया गया है। वे लक्ष्य, गति और एकाग्रता के प्रतीक हैं।
तलवार और ढाल भी देवी के युद्ध-रूप का अहम हिस्सा हैं। देवी महात्म्य में बताया गया है कि तलवार और ढाल काल द्वारा दिए गए थे।
तलवार को एक ऐसी शक्ति के रूप में देखा जाता है जो अज्ञानता और अधर्म को खत्म करती है। यह भी पढ़ें-
(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)