Lucknow University: कथावाचिका व प्रेरक वक्ता जया किशोरी ने लखनऊ विश्वविद्यालय के मालवीय सभागार में आयोजित अमर उजाला जीवांजलि कार्यक्रम में आधुनिक जीवन की चुनौतियों और उनसे बाहर निकलने के रास्तों पर खुलकर संवाद किया।
Amar Ujala Jeevanjali Program: आज की तेज रफ्तार भरी जिंदगी में लोगों का जीवन पूरी तरह बदल गया है। घंटों तक मोबाइल फोन चलाना, सोशल मीडिया पर रील्स देखना और इंटरनेट पर हर जानकारी तुरंत मिल जाने की आदत ने लोगों की सोच और व्यवहार को तेजी से प्रभावित किया है। लगातार छोटे-छोटे वीडियो देखने से लोगों का ध्यान लंबे समय तक किसी एक काम पर नहीं टिक पाता। इसका सबसे बड़ा असर नई पीढ़ी की एकाग्रता पर दिखाई दे रहा है। पहले लोग धैर्य के साथ किसी काम को पूरा करते थे, लेकिन अब हर चीज जल्दी पाने की इच्छा बढ़ गई है। लोग अपनों के लिए समय नहीं निकाल पा रहे हैं, इसलिए रिश्ते जल्दी टूट रहे हैं और शादियां भी पहले जैसी स्थिर नहीं रहीं। कथावाचिका व प्रेरक वक्ता जया किशोरी ने शनिवार को अमर उजाला 'जीवांजलि: विचारों से बदलाव तक' कार्यक्रम में आधुनिक जीवन की चुनौतियों और उनसे बाहर निकलने के रास्तों पर खुलकर संवाद किया।
लखनऊ विश्वविद्यालय के मालवीय सभागार में आयोजित अमर उजाला 'जीवांजलि: विचारों से बदलाव तक' कार्यक्रम में जया किशोरी ने कहा कि मोबाइल और इंटरनेट की बढ़ती लत का असर केवल कामकाज तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव परिवार और रिश्तों पर भी साफ दिखाई दे रहा है। लोग अपने परिवार और अपनों के साथ समय बिताने के बजाय मोबाइल स्क्रीन पर अधिक समय गुजार रहे हैं। यही कारण है कि रिश्तों की मजबूती पहले जैसी नहीं रही। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी किसी एक रिश्ते को लंबे समय तक निभाने में कठिनाई महसूस कर रही है। इसी वजह से रिश्ते जल्दी टूट रहे हैं और वैवाहिक जीवन भी पहले की तुलना में कम स्थिर होता जा रहा है। उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि परिवार और अपने प्रियजनों के लिए समय निकालना आज पहले से कहीं अधिक जरूरी हो गया है।
धैर्य अपनाने की है जरूरत
जया किशोरी ने कहा कि आज लोग हर काम जल्दबाजी में करना चाहते हैं। यहां तक कि शादी जैसे महत्वपूर्ण संस्कार के समय भी कई लोग पंडित से मंत्र जल्दी समाप्त करने का आग्रह करते हैं। उन्होंने कहा कि यही जल्दबाजी की प्रक्रिया बाद में रिश्तों में भी दिखाई देती है। उन्होंने समझाया कि रुक जाना और ठहरकर सोचने में अंतर होता है। जीवन में सही निर्णय लेने के लिए व्यक्ति को कुछ समय खुद के साथ बिताना चाहिए। जब मन शांत रहेगा और सोच स्पष्ट होगी, तभी सही दिशा मिल सकेगी।
समस्याओं से भागने के बजाय सामना करें
जया किशोरी ने कहा कि जीवन में कठिनाइयां आना स्वाभाविक है। उनसे डरकर भागने के बजाय उनका सामना करना चाहिए। किसी भी समस्या का समाधान तभी निकल सकता है, जब पहले उसकी सही पहचान की जाए। उन्होंने कहा कि भागदौड़ और तनाव के माहौल में लिए गए फैसले कई बार गलत साबित होते हैं। इसलिए व्यक्ति को शांति के साथ सोच-विचार करना चाहिए। उन्होंने लोगों को प्रकृति के करीब रहने और अपने जीवन में संतुलन बनाए रखने की सलाह भी दी।
एआई का सही उपयोग जरूरी
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई के बारे में जया किशोरी ने कहा कि यह तकनीक जीवन को आसान बनाने का एक अच्छा माध्यम है, लेकिन इसका गलत इस्तेमाल समाज के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। उन्होंने विशेष रूप से अभिभावकों से कहा कि यदि किसी बच्चे का एआई की मदद से फर्जी वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल किया जाए और बच्चा उसे झूठा बताए, तो माता-पिता को उसकी बात पर भरोसा करना चाहिए। ऐसे समय में बच्चों का साथ देना और उनका मनोबल बढ़ाना बेहद जरूरी है।
मानसिक संतुलन बनाए रखती हैं अच्छी आदतें
जया किशोरी ने कहा कि किताबें पढ़ने की आदत व्यक्ति को बेहतर सोच और नेतृत्व क्षमता प्रदान करती है। उन्होंने लोगों को रोजाना सात से आठ घंटे की अच्छी नींद लेने, प्रकृति के अनुसार दिनचर्या अपनाने और कभी-कभी बिना किसी काम के भी कुछ समय शांत बैठने की सलाह दी। उनका कहना था कि जैसे शांत पानी में ही साफ प्रतिबिंब दिखाई देता है, वैसे ही शांत मन में सही विचार जन्म लेते हैं। इसलिए मानसिक शांति बनाए रखना हर व्यक्ति के लिए आवश्यक है।
भगवान और महिलाओं के सम्मान पर भी रखे विचार
प्रभु श्रीराम मंदिर में चढ़ावे में कथित चोरी के सवाल पर जया किशोरी ने दुख व्यक्त करते हुए कहा कि यदि लोग भगवान को भी धोखा देने लगें, तो यह समाज के लिए बेहद चिंताजनक स्थिति है। उन्होंने कहा कि ईमानदारी और नैतिकता हर व्यक्ति के जीवन का आधार होना चाहिए। महिलाओं के सम्मान के विषय में उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में स्त्री को हमेशा सर्वोच्च स्थान दिया गया है। हमारे यहां सीताराम, गौरी शंकर और लक्ष्मी नारायण जैसे नामों में भी महिला का नाम पहले लिया जाता रहा है। उन्होंने कहा कि आज महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए कई प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन समाज को यह भी सीखना होगा कि एक शिक्षित, सफल और आत्मनिर्भर महिला के साथ सम्मान और समानता का व्यवहार कैसे किया जाए। महिलाओं का सशक्तिकरण तभी सार्थक होगा, जब समाज उन्हें बराबरी का सम्मान और सहयोग भी देगा।