Indira Ekadashi Tithi: इंदिरा एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित महत्वपूर्ण एकादशियों में मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं में इस व्रत का संबंध पितरों के कल्याण और पूर्वजों की शांति से भी जोड़ा गया है।
Indira Ekadashi Kab Hai: हिंदू धर्म में एकादशी तिथि भगवान विष्णु को समर्पित मानी जाती है। आश्विन मास के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली एकादशी को इंदिरा एकादशी के नाम से जाना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इंदिरा एकादशी के दिन व्रत को श्रद्धापूर्वक करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में आने वाले कष्टों से छुटकारा मिलता है। इसके साथ ही घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। इंदिरा एकादशी के दिन पितरों के निमित्त किए गए धार्मिक कर्मों का भी विशेष महत्व है। इस दिन पितरों को प्रसन्न करने के लिए तर्पण और पिंडदान करना भी बहुत शुभ माना जाता है।
पंचांग के अनुसार, एकादशी तिथि 6 अक्टूबर को सुबह 2 बजकर 07 मिनट से शुरू होकर 7 अक्टूबर को रात 12 बजकर 34 मिनट तक रहेगी। उदयातिथि के अनुसार, साल 2026 में इंदिरा एकादशी का व्रत मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026 को रखा जाएगा और 7 अक्टूबर को सुबह 6 बजकर 17 मिनट से 10 बजकर 11 मिनट तक पारण किया जाएगा।
पूजा के लिए शुभ मुहूर्त
सर्वार्थ सिद्धि योग और अभिजीत मुहूर्त में पूजा करना सबसे शुभ माना जाता है। इसलिए इंदिरा एकादशी की पूजा शुभ मुहूर्त में ही करें।
सर्वार्थ सिद्धि योग: सुबह 06 बजकर17 मिनट से रात 10 बजकर 17 मिनट तक रहेगा।
अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11 बजकर 46 मिनट से दोपहर 12 बजकर 33 मिनट तक रहेगा।
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इंदिरा एकादशी पर ऐसे करें पूजा
इंदिरा एकादशी के दिन प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
इसके बाद भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें।
पूजा के लिए भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर के सामने दीपक जलाएं।
भगवान को पीले फूल, तुलसी दल, फल और नैवेद्य अर्पित करें।
इसके बाद विष्णु मंत्र, विष्णु सहस्रनाम या भगवान विष्णु के नाम का जाप किया जा सकता है।
पूजा के दौरान भगवान विष्णु की आरती करें और अंत में भगवान को भोग लगाएं।
अपनी श्रद्धा के अनुसार गरीब या जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन, वस्त्र अथवा अन्य उपयोगी सामग्री का दान करें।
इंदिरा एकादशी के व्रत के नियम
एकादशी व्रत में अन्न और विशेष रूप से अनाज तथा चावल का सेवन नहीं किया जाता। व्रत रखने वाले व्यक्ति अपनी क्षमता के अनुसार निर्जल, जलाहार, फलाहार या एक समय सात्विक भोजन का संकल्प ले सकते हैं। धार्मिक पंचांग स्रोतों में भी एकादशी उपवास के अलग-अलग प्रकार बताए गए हैं।
व्रत के दौरान भगवान विष्णु का स्मरण, भजन और मंत्र जाप करना शुभ माना जाता है। क्रोध, विवाद और नकारात्मक विचारों से बचते हुए सात्विक आचरण करने की परंपरा है। स्वास्थ्य संबंधी समस्या, बुजुर्ग अवस्था या किसी चिकित्सकीय स्थिति में कठोर उपवास करने के बजाय अपनी क्षमता के अनुसार व्रत रखना उचित है।
इंदिरा एकादशी की पारण विधि
एकादशी का व्रत अगले दिन द्वादशी तिथि में पारण करके समाप्त किया जाता है। पंचांग के अनुसार 7 अक्टूबर 2026 को सुबह 6:17 बजे से 10:11 बजे के बीच पारण का समय दिया गया है। पारण से पहले भगवान विष्णु का स्मरण और पूजा करें। इसके बाद उचित समय में जल ग्रहण करके व्रत खोलें और सात्विक भोजन करें। सामर्थ्य के अनुसार ब्राह्मण, साधु अथवा जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन या दान देना भी धार्मिक परंपरा का हिस्सा माना जाता है।
पितरों के लिए क्यों मानी जाती है खास?
इंदिरा एकादशी को पितरों से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं के कारण विशेष महत्व प्राप्त है। भक्त इस दिन भगवान विष्णु की पूजा के साथ अपने पूर्वजों को स्मरण करते हैं और उनके निमित्त दान-पुण्य करते हैं। मान्यता के अनुसार इससे पितरों की शांति और उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। इंदिरा एकादशी केवल उपवास का दिन नहीं, बल्कि भगवान विष्णु की भक्ति, आत्मसंयम, दान-पुण्य और पितरों के स्मरण का अवसर भी मानी जाती है। 6 अक्टूबर 2026, मंगलवार को इंदिरा एकादशी का व्रत रखा जाएगा और अगले दिन 7 अक्टूबर को पारण किया जाएगा।
इंदिरा एकादशी का धार्मिक महत्व
इंदिरा एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित महत्वपूर्ण एकादशियों में मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं में इस व्रत का संबंध पितरों के कल्याण और पूर्वजों की शांति से भी जोड़ा गया है। इसी कारण पितृ पक्ष के आसपास आने वाली इस एकादशी को विशेष श्रद्धा से मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की पूजा, व्रत, जप और दान-पुण्य करने से पुण्य प्राप्त होता है। भक्त भगवान विष्णु से परिवार के सुख-समृद्धि और पितरों के आशीर्वाद की प्रार्थना करते हैं।
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।