Gupt Navratri 2025 : हिंदू धर्म में नवरात्रि पर्व का विशेष महत्व है। नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा की जाती है। नवरात्रि में देवी दुर्गा नौ दिनों के लिए धरती पर आती हैं और अपने भक्तों को आशीर्वाद देती हैं।
Gupt Navratri 2025 : हिंदू धर्म में नवरात्रि पर्व का विशेष महत्व है। नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा की जाती है। नवरात्रि में देवी दुर्गा नौ दिनों के लिए धरती पर आती हैं और अपने भक्तों को आशीर्वाद देती हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार गुप्त नवरात्रि के सातवें दिन किस देवी की पूजा करनी चाहिए। शास्त्रों के अनुसार सती प्रसंग के अनुसार भगवान शंकर को उनके ससुर यानी राजा दक्ष ने यज्ञ में आमंत्रित नहीं किया। उनकी पत्नी सती ने जिद की कि वह अपने पिता के यहां यज्ञ में जरूर जाएंगी।
शंकर जी ने उन्हें बहुत मना किया, लेकिन वह नहीं मानीं और वहां चली गईं। वहां उन्हें अपमान और तिरस्कार का सामना करना पड़ा। कुछ ही देर में उन्होंने यज्ञ कुंड में अपने प्राण त्याग दिए। यज्ञ की अग्नि बुझ गई। उस धुएं से एक शक्ति निकली, जो धूमावती थी। यह शक्ति धुएं के रूप में निकली और धूमावती कहलाई। इसके साथ एक और प्रसंग भी जुड़ा हुआ है। कहा जाता है कि भगवान शंकर से विरक्त होने के कारण वह धूमावती बन गईं। इसलिए इनका एक रूप विधवा का भी है।
माँ धूमावती की पूजा विधि
गुप्त नवरात्रि में माँ धूमावती की पूजा करना बहुत लाभकारी माना जाता है। तंत्र साधना में विश्वास रखने वालों के लिए भी यह बहुत महत्वपूर्ण शक्ति मानी जाती हैं। माँ धूमावती की पूजा करने से पहले स्नान करके काले वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल पर गंगाजल छिड़कें और जल, पुष्प, सिंदूर, कुमकुम, अक्षत, फल, धूप, दीप और नैवेद्य आदि से माँ की पूजा करें। इसके बाद माँ धूमावती की कथा सुननी चाहिए। पूजा के बाद माँ से अपनी मनोकामना पूर्ण करने की प्रार्थना अवश्य करनी चाहिए।