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Gupt Navratri 2025: गुप्त नवरात्रि के चौथे दिन करें मां कुष्मांडा की पूजा, जानें भोग, मंत्र व स्वरूप

जीवांजलिPublished by:
राघवेंद्र तिवारी
सार

Gupt Navratri 2025: नवरात्रि हिंदू धर्म में सबसे पवित्र त्योहारों में से एक है। नवरात्रि के दौरान देवी दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है। ऐसा माना जाता है कि एक साल में चार नवरात्रि होती हैं। शारदीय और चैत्र नवरात्रि के अलावा दो गुप्त नवरात्रि भी होती हैं।

Gupt Navratri 2025
Gupt Navratri 2025: नवरात्रि हिंदू धर्म में सबसे पवित्र त्योहारों में से एक है। नवरात्रि के दौरान देवी दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है। ऐसा माना जाता है कि एक साल में चार नवरात्रि होती हैं। शारदीय और चैत्र नवरात्रि के अलावा दो गुप्त नवरात्रि भी होती हैं। गुप्त नवरात्रि में देवी दुर्गा के नौ रूपों की गुप्त तरीके से पूजा की जाती है। इससे भक्त के सभी कष्ट समाप्त होते हैं और देवी दुर्गा की विशेष कृपा प्राप्त होती है। आइए उज्जैन के पंडित आनंद भारद्वाज से जानते हैं चौथे दिन किस देवी की पूजा और आराधना करनी चाहिए।

कुष्मांडा के नाम का अर्थ

कुष्मांडा का अर्थ कद्दू भी होता है। मां कुष्मांडा को कद्दू बहुत प्रिय है, इसलिए इन्हें कुष्मांडा कहा जाता है। कद्दू में कई बीज होते हैं, हर बीज में एक पौधे को जन्म देने की क्षमता होती है। इसी तरह मां कुष्मांडा में सृजन की शक्ति भी है। उन्होंने ही इस संपूर्ण ब्रह्मांड का निर्माण किया है।

मां कुष्मांडा का स्वरूप

मां कुष्मांडा ने अपनी कोमल मुस्कान से ब्रह्मांड का निर्माण किया, इसलिए इन्हें ब्रह्मांड का आदि स्वरूप और आदि शक्ति माना जाता है। देवी कुष्मांडा को समर्पित यह दिन हरे रंग से संबंधित है। माता रानी की आठ भुजाएं हैं, जिनमें से सात में वे कमंडल, धनुष, बाण, कमल का फूल, अमृत कलश, चक्र और गदा धारण करती हैं। माता के आठवें हाथ में माला है और वे सिंह पर सवार हैं।

मां कुष्मांडा का भोग

मां कुष्मांडा की पूजा में पीले रंग का केसर युक्त पेठा रखना चाहिए और उसी को प्रसाद के रूप में चढ़ाना चाहिए। कुछ लोग मां कुष्मांडा की पूजा में सफेद पेठे के फल की बलि भी चढ़ाते हैं। इसके साथ ही देवी को मालपुआ और बताशा भी चढ़ाना चाहिए।

इस मंत्र का जाप जरूर करें

सुरासम्पूर्ण कलशं रुधिराप्लुतमेव च। दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु मे॥ – ऐं ह्रीं देव्यै नमः

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