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Vishwakarma Puja: विश्वकर्मा पूजा में शस्त्रों और औजारों की पूजा क्यों की जाती है? जानें धार्मिक मान्यता

जीवांजलि, धर्म डेस्कPublished by:
Shakshi
सार

Vishwakarma Puja: हिंदू धर्म में भगवान विश्वकर्मा को देवताओं का शिल्पकार और वास्तुकार माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, उन्होंने देवताओं के लिए कई भव्य भवन, महल, नगर और दिव्य वस्तुओं का निर्माण किया था।

Vishwakarma Puja
Vishwakarma Puja: विश्वकर्मा पूजा के दिन भगवान विश्वकर्मा की पूजा के साथ-साथ शस्त्रों, औजारों और काम में इस्तेमाल होने वाली मशीनों की भी पूजा की जाती है। मान्यता है कि भगवान विश्वकर्मा ने देवताओं के लिए कई दिव्य अस्त्र-शस्त्र, भवन और नगरों का निर्माण किया था। यही वजह है कि इस दिन निर्माण कार्य, कारीगरी और तकनीकी काम से जुड़े लोग अपने औजारों और उपकरणों को भगवान विश्वकर्मा के स्वरूप के समान मानकर उनकी पूजा करते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर शस्त्रों और औजारों की पूजा करने की यह परंपरा क्यों शुरू हुई? क्या आपको पता है इसके पीछे कौन सी धार्मिक मान्यता जुड़ी है? आइए जानते हैं...

भगवान विश्वकर्मा को माना जाता है सृष्टि का शिल्पकार

हिंदू धर्म में भगवान विश्वकर्मा को देवताओं का शिल्पकार और वास्तुकार माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, उन्होंने देवताओं के लिए कई भव्य भवन, महल, नगर और दिव्य वस्तुओं का निर्माण किया था। भगवान विश्वकर्मा को निर्माण, शिल्प, वास्तुकला और तकनीकी कौशल का देवता माना जाता है। इसी कारण विश्वकर्मा पूजा के दिन उन सभी चीजों का सम्मान किया जाता है, जिनके माध्यम से निर्माण और कार्य किया जाता है। इनमें औजार, मशीनें, उपकरण और शस्त्र भी शामिल हैं।

औजारों की पूजा क्यों होती है?

धार्मिक मान्यता में काम करने वाले औजारों को केवल लोहे या धातु की वस्तु नहीं माना जाता। इन्हीं के माध्यम से व्यक्ति अपनी मेहनत और कौशल को काम में बदलता है। पुराने समय में कारीगर अपने हथौड़े, छेनी, आरी, औजार और अन्य उपकरणों को बहुत सम्मान देते थे। विश्वकर्मा पूजा के दिन इन्हीं औजारों को साफ करके उनकी पूजा की जाती है। माना जाता है कि जिस साधन से व्यक्ति अपने कार्य को पूरा करता है, उसका सम्मान करना भगवान विश्वकर्मा की आराधना का ही एक रूप है।

शस्त्रों की पूजा की धार्मिक मान्यता

विश्वकर्मा पूजा में शस्त्रों की पूजा की परंपरा भी पुरानी मानी जाती है। धार्मिक कथाओं में भगवान विश्वकर्मा द्वारा देवताओं के लिए दिव्य अस्त्र-शस्त्र तैयार किए जाने का उल्लेख मिलता है। इसलिए शस्त्रों को भी विश्वकर्मा जी की शिल्पकला से जोड़कर देखा जाता है। शस्त्र पूजा के दौरान अस्त्र-शस्त्रों को साफ करके उनका विधि-विधान से पूजन किया जाता है। मान्यता है कि शस्त्र केवल युद्ध का साधन नहीं बल्कि धर्म और रक्षा के लिए इस्तेमाल होने वाला माध्यम भी हैं। इसलिए इनका पूजन करते समय भगवान विश्वकर्मा का स्मरण किया जाता है।

भगवान विश्वकर्मा से जुड़ी हैं दिव्य रचनाएं

पौराणिक मान्यताओं में भगवान विश्वकर्मा को कई दिव्य रचनाओं का निर्माता बताया गया है। उनके द्वारा बनाए गए दिव्य भवनों और नगरों के साथ अस्त्र-शस्त्रों का भी उल्लेख मिलता है। इसी वजह से शिल्प और निर्माण से जुड़े लोगों के लिए विश्वकर्मा पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। कारीगर, इंजीनियर, मशीनों से जुड़े कर्मचारी, कारखानों में काम करने वाले लोग और विभिन्न प्रकार के तकनीकी कार्य करने वाले लोग इस दिन अपने काम के साधनों की पूजा करते हैं।

मशीनों की पूजा की परंपरा भी जुड़ी

समय के साथ काम करने के तरीके बदले तो औजारों का स्वरूप भी बदल गया। पहले जहां कारीगर हाथ से चलने वाले उपकरणों की पूजा करते थे, वहीं आज कारखानों और संस्थानों में बड़ी मशीनों, कंप्यूटर, तकनीकी उपकरण और दूसरे कार्य-साधनों की पूजा की जाती है। इसके पीछे वही धार्मिक भावना मानी जाती है कि कार्य को पूरा करने वाले साधनों का सम्मान किया जाए और भगवान विश्वकर्मा का आशीर्वाद प्राप्त किया जाए। कई स्थानों पर विश्वकर्मा पूजा के दिन मशीनों को बंद रखकर उनकी सफाई और पूजा की जाती है।

पूजा में औजारों को रखा जाता है विशेष स्थान

विश्वकर्मा पूजा के दिन औजारों और मशीनों को साफ करके पूजा स्थल पर रखा जाता है। इसके बाद भगवान विश्वकर्मा का पूजन किया जाता है और औजारों पर रोली, अक्षत, फूल आदि अर्पित किए जाते हैं। कई जगहों पर मशीनों और उपकरणों पर भी तिलक लगाया जाता है। शस्त्रों की पूजा करने वाले लोग उन्हें साफ करके विधि-विधान से पूजन करते हैं। पूजा के दौरान भगवान विश्वकर्मा का स्मरण किया जाता है और कार्य में सफलता तथा साधनों की कुशलता के लिए प्रार्थना की जाती है।

 
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(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)

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