Women Festivals: हिन्दू धर्म में तीज के अवसर पर व्रत, पूजा, मेहंदी, झूला, लोकगीत, पारंपरिक वस्त्र और विशेष पकवान जैसी परंपराएं निभाई जाती हैं। ये पर्व भारतीय नारी की आस्था, समर्पण, प्रकृति प्रेम और पारिवारिक सुख-समृद्धि की भावना को दर्शाते हैं।
Teej Festival Importance: हिन्दू धर्म में तीज का त्यौहार विशेष रूप से भारतीय महिलाओं के समर्पण, प्रेम, भक्ति और सौंदर्य का उत्सव माना जाता है। राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड जैसे राज्यों में यह पर्व अत्यधिक हर्षोल्लास से मनाया जाता है। प्रकृति, आस्था और दांपत्य सुख के प्रतीक इस पर्व को वर्षभर में अलग-अलग स्वरूपों में मनाया जाता है। आइए, वर्षभर में आने वाली सभी मुख्य तीजों को उनके समय और महत्व को विस्तार से जानते हैं...
तीज पर्व की सूची
हरियाली तीज
कजरी तीज
हरतालिका तीज
रंभा तीज
गणगौर तीज
आखा तीज
मौनी तृतीया
अवियोग तृतीया व्रत
मातंगी तृतीया
वराह तृतीया
1. सावन और भादों की मुख्य तीजे (वर्षा ऋतु के सुहाग पर्व)
हरियाली तीज (छोटी तीज/ श्रावण तीज/ सिंधारा तीज):
समय: श्रावण माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया।
महत्व: यह पर्व भगवान शिव और माता पार्वती के पुनर्मिलन की याद में मनाया जाता है। वर्षा ऋतु की हरियाली के बीच महिलाएं हरे वस्त्र, हरी चूड़ियां पहनती हैं, हाथों में मेहंदी रचाती हैं और झूला झूलते हुए लोकगीत गाती हैं।
विशेष परंपरा: बेटियों के मायके से 'सिंधारा' (वस्त्र, घेवर, मिठाई, चूड़ियां व मेहंदी) भेजा जाता है।
कजरी तीज (बड़ी तीज/ सातूड़ी तीज/ बूढ़ी तीज):
समय: भाद्रपद (भादों) माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया (हरियाली तीज के 15 दिन बाद)।
महत्व: सुहागिन महिलाएं पति की लंबी आयु और संतान सुख के लिए यह निर्जला व्रत रखती हैं।
विशेष परंपरा: इस दिन नीमड़ी माता की पूजा की जाती है और सत्तू के पकवानों का भोग लगाकर चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद व्रत खोला जाता है।
हरतालिका तीज
समय: भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया।
महत्व: यह सभी तीजों में सबसे कठिन और महत्वपूर्ण व्रत माना जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, माता पार्वती की सखियां उन्हें हरण करके घने जंगल में ले गई थीं, जहां उन्होंने बालू (रेत) का शिवलिंग बनाकर कठिन तपस्या की थी।
विशेष परंपरा: महिलाएं और कुंवारी कन्याएं 24 घंटे का निर्जला व्रत रखती हैं और रातभर जागरण कर बालू के शिव-पार्वती जी की पूजा करती हैं।
2. ज्येष्ठ मास की विशेष तीज (सौंदर्य और रूप पर्व)
रंभा तीज (रंभा तृतीया):
समय: ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया।
महत्व: यह व्रत अप्सरा रंभा, माता पार्वती और धन की देवी लक्ष्मी जी को समर्पित है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान निकले 14 रत्नों में से एक अति सुंदर अप्सरा 'रम्भा' भी थीं। रम्भा को सौंदर्य और यौवन का प्रतीक माना जाता है। उन्होंने ही सबसे पहले सौभाग्य और शाश्वत सुंदरता पाने के लिए यह व्रत किया था, जिसके कारण इसका नाम 'रम्भा तीज' पड़ा।
विशेष परंपरा: महिलाएं और कन्याएं उत्तम रूप, सौंदर्य, आकर्षण, आरोग्यता और सुखी दांपत्य जीवन की प्राप्ति के लिए यह व्रत रखती हैं। इसमें चंदन, अक्षत और ताजे फूलों से विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।
3. वसंत और ग्रीष्म ऋतु की मुख्य तीजे (उत्सव व समृद्धि पर्व)
गणगौर तृतीया (गणगौर तीज):
समय: चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया।
महत्व: मुख्य रूप से राजस्थान, मध्य प्रदेश और मालवा क्षेत्र में मनाया जाने वाला यह पर्व माता पार्वती (गौरा) और भगवान शिव (ईसर जी) की पूजा के लिए समर्पित है।
विशेष परंपरा: होलिका दहन के अगले दिन से शुरू होने वाला यह उत्सव 16 दिनों तक चलता है और अंतिम दिन तृतीया पर मूर्तियों के जल विसर्जन के साथ समाप्त होता है। सुहागिनें अखंड सौभाग्य और कुंवारी कन्याएं मनचाहा वर पाने के लिए यह व्रत रखती हैं।
आखा तीज (अक्षय तृतीया)
समय: वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया।
महत्व: 'अक्षय' का अर्थ है जिसका कभी क्षय न हो। यह दिन बिना किसी पंचांग को देखे स्वतः सिद्ध अबूझ शुभ मुहूर्त माना जाता है।
विशेष परंपरा: इस दिन विवाह, नए व्यापार का शुभारंभ, सोना-चांदी या संपत्ति की खरीदारी और दान-पुण्य करना अत्यंत शुभ और अक्षय फलदायी माना जाता है। इस दिन भगवान परशुराम जी की जयंती भी मनाई जाती है।