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Raksha Bandhan 2026: रक्षाबंधन पर राखी बांधने के बाद आरती क्यों की जाती है? जानिए धार्मिक महत्व

जीवांजलि, धर्म डेस्कPublished by:
Shakshi
सार

Raksha Bandhan 2026: धार्मिक मान्यता के अनुसार दीपक को शुभता, प्रकाश और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है। जब बहन राखी बांधने के बाद भाई की आरती करती है तो इसके पीछे उसके मंगल और सुखी जीवन की कामना का भाव जुड़ा होता है। 

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Raksha Bandhan 2026: रक्षाबंधन का त्योहार भाई-बहन के प्रेम और स्नेह से जुड़ा है। इस दिन बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती है और उसके सुखी, स्वस्थ व दीर्घायु जीवन की कामना करती है। राखी बांधने के बाद भाई की आरती करने की परंपरा भी कई परिवारों में निभाई जाती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर राखी बांधने के बाद भाई की आरती क्यों की जाती है? क्या आरती केवल एक रस्म है या इसके पीछे कोई धार्मिक मान्यता भी जुड़ी है? आइए जानते हैं रक्षाबंधन पर राखी बांधने के बाद आरती करने का धार्मिक महत्व...

राखी के बाद आरती की परंपरा

रक्षाबंधन के दिन पूजा की थाली सजाकर पहले भगवान की पूजा की जाती है और इसके बाद बहन अपने भाई को राखी बांधती है। राखी बांधने के बाद भाई की आरती उतारने की परंपरा है। आरती में दीपक जलाकर भाई के सामने उसे घुमाया जाता है। हिंदू धार्मिक परंपरा में आरती का विशेष महत्व माना गया है। पूजा के दौरान आरती भगवान के प्रति श्रद्धा और भक्ति प्रकट करने का एक माध्यम है। इसी भाव के साथ रक्षाबंधन पर बहन अपने भाई की आरती करती है।

आरती का धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यता के अनुसार दीपक को शुभता, प्रकाश और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है। जब बहन राखी बांधने के बाद भाई की आरती करती है तो इसके पीछे उसके मंगल और सुखी जीवन की कामना का भाव जुड़ा होता है। आरती के दौरान दीपक भाई के सामने घुमाया जाता है। मान्यता है कि इस तरह बहन अपने भाई के जीवन में सुख-समृद्धि और शुभता की कामना करती है। आरती को भगवान के प्रति समर्पण और प्रार्थना से भी जोड़ा जाता है, इसलिए इस अवसर पर भाई की आरती करना धार्मिक रूप से शुभ माना जाता है।

भाई की लंबी उम्र की कामना

रक्षाबंधन पर बहन भाई की कलाई पर राखी बांधकर उसकी रक्षा और मंगल की कामना करती है। इसके बाद आरती करते समय भी भाई के स्वस्थ और दीर्घायु होने की प्रार्थना की जाती है। परंपरा के अनुसार आरती के बाद भाई के माथे पर तिलक लगाया जाता है और मिठाई खिलाई जाती है। इसके बाद भाई अपनी बहन को उपहार देता है और उसकी रक्षा का संकल्प लेता है। इस तरह राखी बांधने, तिलक और आरती की रस्में एक-दूसरे से जुड़ी हुई मानी जाती हैं।

आरती में दीपक क्यों जलाया जाता है?

हिंदू धर्म में दीपक को अत्यंत पवित्र माना गया है। पूजा-पाठ में दीप प्रज्वलित करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। धार्मिक मान्यता में प्रकाश को अंधकार दूर करने वाला और शुभता का प्रतीक माना जाता है। रक्षाबंधन पर भाई की आरती में भी दीपक का इस्तेमाल इसी धार्मिक भाव के साथ किया जाता है। बहन दीपक से भाई की आरती उतारकर उसके जीवन में सुख और शुभता की कामना करती है।

आरती से पहले तिलक की परंपरा

रक्षाबंधन की पूजा विधि में भाई को तिलक लगाने का भी विशेष महत्व माना जाता है। बहन भाई के माथे पर रोली या कुमकुम से तिलक लगाती है। इसके बाद भाई की कलाई पर राखी बांधी जाती है और फिर आरती उतारी जाती है। तिलक को शुभता और मंगल का प्रतीक माना जाता है। इसलिए रक्षाबंधन के अवसर पर तिलक, राखी और आरती तीनों को महत्वपूर्ण धार्मिक परंपराओं के रूप में देखा जाता है।

आरती के बाद क्यों खिलाई जाती है मिठाई?

राखी बांधने और आरती करने के बाद भाई को मिठाई खिलाने की परंपरा भी है। धार्मिक अवसरों पर मिठाई या प्रसाद का विशेष महत्व माना जाता है। रक्षाबंधन पर बहन भाई का मुंह मीठा कराती है और भाई भी बहन को मिठाई खिलाता है। इसके बाद भाई अपनी बहन को उपहार देता है। कई परिवारों में भाई-बहन एक-दूसरे का आशीर्वाद लेते हैं और साथ में भगवान से परिवार की सुख-शांति की प्रार्थना करते हैं।

आरती से जुड़ी मान्यता

रक्षाबंधन पर भाई की आरती करने की परंपरा को केवल भाई के सम्मान से नहीं, बल्कि उसके मंगल की कामना से भी जोड़ा जाता है। बहन जिस तरह भगवान की आरती करके उनके प्रति श्रद्धा प्रकट करती है, उसी तरह भाई की आरती करते समय उसके अच्छे स्वास्थ्य, सुख और दीर्घायु की कामना करती है। इसी वजह से रक्षाबंधन की पूजा में राखी बांधने के बाद आरती करने की परंपरा को महत्वपूर्ण माना गया है। यह रस्म आज भी कई घरों में पूरे श्रद्धा भाव के साथ निभाई जाती है।


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(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)

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