facebook pixel
विज्ञापन
Home  dharm  festivals  radhashtami 2026 par bhoolkar bhi na kare ye galtiyan janiye is dauran kya kare aur kya na kare

Radhashtami 2026: राधाष्टमी पर भूलकर भी न करें ये गलतियां, जानें इस दौरान क्या करें और क्या न करें

जीवांजलि, धर्म डेस्कPublished by:
Shakshi
सार

Radhashtami 2026:Radhashtami 2026: राधाष्टमी के दिन पूजा करने से पहले स्नान करना जरूरी माना जाता है। बिना स्नान किए पूजा स्थल पर जाना या भगवान को स्पर्श करना धार्मिक दृष्टि से उचित नहीं माना जाता। सुबह उठकर स्नान करें और इसके बाद ही पूजा की तैयारी करें।

Radhashtami
Radhashtami 2026: राधाष्टमी का पर्व श्रीराधा रानी की भक्ति और आराधना के लिए विशेष माना जाता है। इस दिन भक्त व्रत रखते हैं, राधा-कृष्ण की पूजा करते हैं और राधा रानी का स्मरण करते हैं। धार्मिक मान्यताओं में इस दिन कुछ कार्यों को शुभ माना गया है, वहीं कुछ ऐसे काम भी बताए गए हैं, जिन्हें व्रत और पूजा के दौरान करने से बचना चाहिए। क्या आपको पता है कि राधाष्टमी पर किन गलतियों से बचना चाहिए और इस दिन क्या करना शुभ माना जाता है? आइए जानते हैं।

पूजा में रखें शुद्धता का ध्यान

राधाष्टमी के दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनने की परंपरा है। पूजा स्थल की साफ-सफाई करने के बाद राधा-कृष्ण की प्रतिमा या तस्वीर को स्थापित कर विधि-विधान से पूजा करनी चाहिए। धार्मिक मान्यता के अनुसार पूजा के दौरान मन और घर की शुद्धता का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

बिना स्नान पूजा न करें

राधाष्टमी के दिन पूजा करने से पहले स्नान करना जरूरी माना जाता है। बिना स्नान किए पूजा स्थल पर जाना या भगवान को स्पर्श करना धार्मिक दृष्टि से उचित नहीं माना जाता। सुबह उठकर स्नान करें और इसके बाद ही पूजा की तैयारी करें।

पूजा में बासी फूल न चढ़ाएं

राधा रानी को पूजा में ताजे और साफ फूल अर्पित करने की परंपरा है, इसलिए पूजा के लिए पहले से रखे मुरझाए या बासी फूलों का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए। फूल अर्पित करते समय श्रद्धा और स्वच्छता का ध्यान रखें।

व्रत में इन बातों का रखें ध्यान

राधाष्टमी पर कई भक्त उपवास रखते हैं। व्रत रखने वाले लोगों को अपनी क्षमता के अनुसार ही उपवास करना चाहिए। निर्जला व्रत सभी के लिए आवश्यक नहीं है। स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होने पर बिना भोजन-पानी के व्रत रखने के बजाय फलाहार या सात्विक भोजन का विकल्प अपनाया जा सकता है।

तामसिक भोजन से बचें

राधाष्टमी के दिन सात्विक भोजन करने की परंपरा है। व्रत रखने वाले भक्तों को मांसाहार, शराब और अन्य तामसिक चीजों से दूर रहना चाहिए। प्याज-लहसुन आदि को लेकर अलग-अलग परिवारों और परंपराओं में नियम हो सकते हैं, इसलिए अपनी धार्मिक परंपरा के अनुसार आहार रखें।

 

राधा अष्टमी

किसी का अपमान न करें

राधाष्टमी को भक्ति और प्रेम का पर्व माना जाता है। इसलिए इस दिन किसी से झगड़ा करना, कटु शब्द बोलना या किसी का अपमान करने से बचना चाहिए। पूजा-पाठ के साथ व्यवहार में भी शालीनता और संयम रखने की बात धार्मिक मान्यताओं में कही गई है।

क्रोध और विवाद से बचें

राधाष्टमी के दिन घर में शांतिपूर्ण वातावरण बनाए रखना अच्छा माना जाता है। छोटी-छोटी बातों पर क्रोध करना या परिवार के सदस्यों के साथ विवाद करने से बचें। इस दिन राधा-कृष्ण का स्मरण, भजन और मंत्र जाप करना भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है।

राधा-कृष्ण की पूजा करें

राधाष्टमी पर राधा रानी के साथ श्रीकृष्ण की पूजा करने की परंपरा है। सुबह या दोपहर के समय पूजा की तैयारी कर राधा-कृष्ण को स्नान, वस्त्र, फूल और भोग अर्पित किए जा सकते हैं। इसके बाद धूप-दीप जलाकर आरती करें और राधा रानी का स्मरण करें।

राधा नाम का जाप करें

इस दिन राधा रानी के नाम का जाप करना भी शुभ माना जाता है। भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार ‘राधा’, ‘राधे-राधे’ या राधा-कृष्ण के मंत्र का जाप कर सकते हैं। भजन-कीर्तन और भगवान का स्मरण करने से पूजा का वातावरण भक्तिमय बनता है।

जरूरतमंदों की मदद करें

राधाष्टमी पर दान-पुण्य करने की भी परंपरा है। अपनी सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन, वस्त्र या अन्य आवश्यक वस्तुएं दान की जा सकती हैं। गौ सेवा और जरूरतमंदों की सहायता को भी धार्मिक दृष्टि से पुण्यकारी माना जाता है।

पूजा में दिखावे से बचें

राधाष्टमी की पूजा श्रद्धा से करने की परंपरा है, इसलिए पूजा में अनावश्यक दिखावा करने के बजाय अपनी क्षमता और परिवार की परंपरा के अनुसार पूजा करना चाहिए। पूजा की सामग्री से ज्यादा महत्व श्रद्धा और भक्ति को दिया जाता है।

व्रत खोलते समय रखें ध्यान

जो लोग राधाष्टमी का व्रत रखते हैं, उन्हें व्रत खोलने के समय भी अपनी परंपरा में बताए गए नियमों का पालन करना चाहिए। व्रत के दौरान लंबे समय तक भूखे रहने के बाद अचानक बहुत अधिक भोजन करने से बचें। फलाहार या सात्विक भोजन से व्रत खोलना उचित माना जाता है।


यह भी पढ़ें-

Shivling Parikrama: शिवलिंग की परिक्रमा पूरी क्यों नहीं की जाती? जानें धार्मिक मान्यता और इसका कारण 

Shivling Puja: शिवलिंग पर क्यों चढ़ाया जाता है कच्चा दूध? जानिए धार्मिक महत्व 

Sawan 2026: सावन में शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाने का सही नियम क्या है? जानिए धार्मिक मान्यता 

(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)

धार्मिक कहानियां सुनने और पढ़ने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ें।

WhatsApp Channel