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Dahi Handi Festival: कृष्ण जन्माष्टमी के बाद क्यों मनाया जाता है दही हांडी का उत्सव, जानें नियम और परंपरा

जीवांजलि धर्म डेस्कPublished by:
नीरज के. पटेल
सार

Dahi Handi Tradition: दही हांडी केवल मनोरंजन या प्रतियोगिता का उत्सव नहीं है, बल्कि यह भगवान कृष्ण की बाल लीलाओं और उनकी चंचलता से जुड़ी धार्मिक परंपरा है। 
 

Dahi Handi Tradition
Krishna Makhan Leela: भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव देशभर में बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। जन्माष्टमी के अगले दिन कई जगहों पर दही हांडी का उत्सव मनाने की परंपरा है। इसे खासतौर पर महाराष्ट्र, गुजरात और उत्तर भारत के कई हिस्सों में धूमधाम से मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान कृष्ण को बचपन से ही माखन और दही बहुत पसंद था। वह अपने मित्रों के साथ मिलकर घरों में रखी मटकी से दही और माखन निकालकर खाया करते थे। इसी बाल लीला की याद में दही हांडी उत्सव मनाया जाता है।

पौराणिक कथाओं के अनुसार, गोकुल में माता यशोदा भगवान कृष्ण के लिए माखन और दही मटकी में रखती थीं। कृष्ण अपने सखाओं के साथ मिलकर ऊंचाई पर लटकी मटकी को फोड़कर माखन निकाल लेते थे। कई बार गोकुल की महिलाएं कृष्ण की इस शरारत से परेशान होकर शिकायत भी करती थीं। भगवान कृष्ण की इसी मनमोहक बाल लीला को दही हांडी उत्सव के रूप में आज भी याद किया जाता है।

दही हांडी में क्या होता है?

दही हांडी के दिन एक मिट्टी की मटकी में दही, माखन, मिश्री और अन्य सामग्री रखी जाती है। इसके बाद मटकी को रस्सी की मदद से काफी ऊंचाई पर बांधा जाता है। युवाओं की टोली, जिसे गोविंदा पथक कहा जाता है, मानव पिरामिड बनाकर मटकी तक पहुंचती है और उसे फोड़ने का प्रयास करती है। मटकी फोड़ने के बाद दही और अन्य सामग्री लोगों के बीच प्रसाद के रूप में बांटी जाती है।

दही हांडी के प्रमुख नियम और परंपरा

दही हांडी उत्सव में टीम भावना और एकता को विशेष महत्व दिया जाता है। गोविंदा एक-दूसरे के कंधों पर चढ़कर पिरामिड बनाते हैं और सबसे ऊपर मौजूद सदस्य मटकी फोड़ता है। कई स्थानों पर मटकी काफी ऊंचाई पर बांधी जाती है, इसलिए सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा जाता है। आयोजन के दौरान प्रतिभागियों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त व्यवस्था करना जरूरी माना जाता है। कई जगहों पर दही हांडी प्रतियोगिता भी आयोजित की जाती है, जिसमें विजेता टीम को पुरस्कार दिया जाता है।

उत्सव में भक्ति और उल्लास का संगम

दही हांडी केवल मनोरंजन या प्रतियोगिता का उत्सव नहीं है, बल्कि यह भगवान कृष्ण की बाल लीलाओं और उनकी चंचलता से जुड़ी धार्मिक परंपरा है। इस दिन मंदिरों और आयोजन स्थलों पर भजन-कीर्तन होते हैं। लोग कृष्ण के जयकारे लगाते हैं और एक-दूसरे को उत्सव की शुभकामनाएं देते हैं। इस तरह दही हांडी का पर्व भगवान श्रीकृष्ण के प्रति श्रद्धा, प्रेम, उत्साह और सामूहिक एकता का संदेश देता है।

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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।

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