Govardhan Puja 2026: दिवाली के अगले दिन गोवर्धन पूजा का पर्व मनाया जाता है। हिंदू धर्म में इस दिन का विशेष महत्व है। मान्यता है कि गोवर्धन पूजा करने से भगवान श्रीकृष्ण की कृपा प्राप्त होती है और घर-परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है। इस दिन गोबर से गोवर्धन पर्वत बनाकर पूजा की जाती है और भगवान को अन्नकूट का भोग लगाया जाता है। हालांकि, पूजा के दौरान कुछ नियमों का ध्यान रखना भी जरूरी माना गया है। ऐसे में क्या आपको पता है कि गोवर्धन पूजा के दिन कौन-सी गलतियां करने से बचना चाहिए और पूजा की सही विधि क्या है? आइए जानते हैं इससे जुड़े जरूरी नियम और धार्मिक महत्व।
गोवर्धन पूजा में इन गलतियों से बचें
गोवर्धन पूजा के दिन साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए। मान्यता है कि पूजा स्थल और घर को गंदा नहीं रखना चाहिए। इस दिन गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाकर विधि-विधान से पूजा करनी चाहिए। पूजा के दौरान जल्दबाजी करने या बिना श्रद्धा के रस्में निभाने से बचना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान श्रीकृष्ण का स्मरण करते हुए पूजा करना शुभ माना जाता है।
गोवर्धन पर्वत की पूजा अधूरी न छोड़ें
गोवर्धन पूजा के दिन गोबर से गोवर्धन पर्वत बनाने की परंपरा है। इसे भगवान श्रीकृष्ण के गोवर्धन स्वरूप का प्रतीक माना जाता है। पूजा करते समय पर्वत की आकृति को बीच में छोड़ने के बजाय विधिपूर्वक तैयार करना चाहिए। इसके बाद रोली, अक्षत, फूल, दीपक और नैवेद्य अर्पित करके पूजा करनी चाहिए। मान्यता है कि गोवर्धन पर्वत की पूजा करने से भगवान श्रीकृष्ण की कृपा प्राप्त होती है।
अन्नकूट का भोग लगाना न भूलें
गोवर्धन पूजा पर भगवान श्रीकृष्ण को अन्नकूट का भोग लगाने की परंपरा है। इसमें अलग-अलग प्रकार के पकवान, सब्जियां और मौसमी व्यंजन शामिल किए जाते हैं। धार्मिक मान्यता है कि भगवान को अन्नकूट का भोग लगाने से अन्न और धन की कमी नहीं होती। इस दिन भोग लगाते समय शुद्धता का ध्यान रखना चाहिए। बिना भगवान को भोग लगाए प्रसाद ग्रहण करने से बचना चाहिए।
गाय की पूजा का है विशेष महत्व
गोवर्धन पूजा पर गाय की पूजा करना भी बेहद शुभ माना जाता है। हिंदू धर्म में गाय को पूजनीय और माता का दर्जा दिया गया है। इस दिन गाय को स्नान कराकर उसके माथे पर तिलक लगाया जाता है और फूल-माला पहनाई जाती है। इसके बाद गाय को गुड़ और हरा चारा खिलाने की परंपरा है। हालांकि, गाय की पूजा करते समय उसे परेशान नहीं करना चाहिए और न ही उसके साथ किसी तरह का दुर्व्यवहार करना चाहिए।
गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा के नियम
इस दिन गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा करने का भी विशेष महत्व है। मान्यता है कि गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा करने से भगवान श्रीकृष्ण का आशीर्वाद मिलता है। परिक्रमा करते समय मन में श्रद्धा और भक्ति का भाव रखना चाहिए। कई श्रद्धालु नंगे पैर परिक्रमा करते हैं। परिक्रमा के दौरान किसी का अपमान करने, गंदगी फैलाने या रास्ते में बाधा डालने से बचना चाहिए।
क्यों की जाती है गोवर्धन पूजा?
पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों को इंद्र देव की पूजा के बजाय गोवर्धन पर्वत और प्रकृति की पूजा करने का संदेश दिया था। इससे क्रोधित होकर इंद्र देव ने ब्रज में मूसलाधार बारिश शुरू कर दी। तब भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी छोटी उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठा लिया और सभी ब्रजवासियों को उसके नीचे आश्रय दिया। सात दिनों तक भगवान ने पर्वत को उठाए रखा और सभी की रक्षा की। इसके बाद इंद्र देव को अपनी गलती का एहसास हुआ और उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण से क्षमा मांगी। तभी से गोवर्धन पूजा की परंपरा चली आ रही है। इस दिन प्रकृति, गौमाता और भगवान श्रीकृष्ण के प्रति आभार व्यक्त किया जाता है।
गोवर्धन पूजा का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गोवर्धन पूजा करने से परिवार में सुख-शांति और समृद्धि आती है। यह पर्व हमें प्रकृति और पशुओं के संरक्षण का संदेश भी देता है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करने, अन्नकूट का भोग लगाने और जरूरतमंदों को भोजन कराने का विशेष महत्व माना जाता है।
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(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)