Dhanteras Puja Muhurt : धनतेरस का त्योहार छोटी दिवाली से एक दिन पहले मनाया जाता है। यह पांच दिनों तक चलने वाले उत्सव का पहला दिन होता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को 'समुद्र मंथन' के दौरान भगवान धन्वंतरि प्रकट हुए थे जिनके हाथों में अमृत का कलश था। इसी कारण इस दिन अच्छे स्वास्थ्य और रोग-मुक्त जीवन की कामना के साथ उनकी पूजा की जाती है। इस दिन देवी लक्ष्मी की पूजा का भी विशेष महत्व है। इस दिन 'प्रदोष काल' में पूजा-पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि धनतेरस पर प्रदोष काल में पूजा करना इतना शुभ क्यों माना जाता है? यदि नहीं, तो आइए इस लेख में हम आपको विस्तार से बताते हैं।
धनतेरस 2026: तिथि और समय
त्रयोदशी तिथि का आरंभ: 6 नवंबर, सुबह 10:30 बजे
त्रयोदशी तिथि की समाप्ति: 7 नवंबर, सुबह 10:47 बजे
वैदिक पंचांग के अनुसार, धनतेरस का त्योहार 6 नवंबर को मनाया जाएगा।
धनतेरस 2026: शुभ मुहूर्त
धनतेरस पूजा मुहूर्त: शाम 6:19 बजे से रात 8:17 बजे तक
प्रदोष काल: शाम 5:49 बजे से रात 8:23 बजे तक
वृषभ काल: शाम 6:19 बजे से रात 8:17 बजे तक
धनतेरस 2026: खरीदारी के लिए शुभ समय
धनतेरस के दिन, आप सुबह 10:30 बजे के बाद पूरे दिन कभी भी खरीदारी कर सकते हैं।
प्रदोष काल में पूजा क्यों की जाती है?
सूर्यास्त के ठीक बाद के समय को 'प्रदोष काल' कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी समय धन की देवी, माता लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और लोगों के घरों में प्रवेश करती हैं। इससे घर में स्थायी सुख, समृद्धि और धन का वास होता है। यही कारण है कि धनतेरस के दिन 'प्रदोष काल' में पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार 'समुद्र मंथन' के दौरान कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को शाम के समय भगवान धन्वंतरि अमृत का कलश लेकर प्रकट हुए थे। इसीलिए प्रदोष काल में की गई पूजा को बहुत फलदायी माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस शुभ समय में पूजा-पाठ करने से भक्त को सकारात्मक फल मिलते हैं और उनके जीवन में कभी धन की कमी नहीं होती।
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(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)