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Chaturmas 2025: चातुर्मास में कौन संभालेगा दुनिया का कार्यभार, कैसे होगा जगत का संचालन?

JeevanjaliPublished by:
नीरज पटेल
सार

Chaturmas Puja Niyam: देवशयनी एकादशी से भगवान विष्णु चार महीने के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं, जिसे चातुर्मास कहा जाता है। इस अवधि में अक्सर लोगों के मन में सवाल उठता है कि जब जगत के पालनहार ही निद्रा में चले जाते हैं, तो दुनिया का कार्यभार कौन संभालता है और जगत का संचालन कैसे होता है? आइये जानते हैं...

चातुर्मास में कौन संभालेगा दुनिया का कार्यभार, कैसे होगा जगत का संचालन?
Chaturmas 2025 Importance: हिन्दू धर्म का प्रमुख पर्व देवशयनी एकादशी (Devshayani Ekadashi) से भगवान विष्णु चार महीने के लिए पाताल लोक में सोने के लिए चले जाते हैं, जिसे चातुर्मास के नाम से जाना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब भगवान विष्णु (Bhagwan Vishnu) योगनिद्रा में होते हैं, तो सृष्टि का कार्यभार भगवान शिव (Bhagwan Shiv) संभालते हैं। यह अवधि भगवान शिव को समर्पित होती है। इसीलिए सावन का महीना भगवान शिव की पूजा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

मान्यता है कि इन चार महीनों में भगवान शिव पृथ्वीलोक पर निवास करते हैं और संसार की गतिविधियों का संचालन करते हैं। यही कारण है कि इस दौरान भगवान शिव की पूजा विशेष रूप से फलदायी मानी जाती है। भक्त इस समय भगवान शिव की उपासना करके उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। देवशयनी एकादशी से भगवान शिव को जगत के संचालन का दायित्व सौंपा जाता है, लेकिन अन्य देवी-देवता भी इसमें अपनी भूमिका निभाते रहते हैं। देवी लक्ष्मी भी इस दौरान पूजनीय होती हैं और सृष्टि का संतुलन बनाए रखने में अपना योगदान देती हैं।

चातुर्मास की अवधि आध्यात्मिक विकास और आत्म-शुद्धि के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण मानी जाती है। भगवान विष्णु के शयन काल को प्रतीकात्मक रूप से देखा जाता है, जिसका अर्थ है कि यह समय बाहरी गतिविधियों से हटकर आंतरिक साधना, तपस्या और भक्ति पर ध्यान केंद्रित करने का है। इस दौरान विवाह, गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य वर्जित होते हैं, ताकि लोग अधिक से अधिक समय धार्मिक कार्यों और आत्म-चिंतन में लगा सकें।

कौन-कौन संभालता है सृष्टि का कार्यभार

  1. कुछ मान्यताओं के अनुसार, चातुर्मास के दौरान भगवान विष्णु योगनिद्रा में होते हैं, और सृष्टि का संचालन भगवान शिव के हाथों में आ जाता है। इन चार महीनों में अन्य प्रमुख देवता भी अपनी-अपनी भूमिका निभाते हैं। भगवान शिव मुख्य रूप से सृष्टि का संचालन और जीवों के कल्याण का कार्यभार संभालते हैं।
  2. चातुर्मास के दूसरे महीने भाद्रपद में भगवान श्री कृष्ण का जन्मोत्सव (जन्माष्टमी) और भगवान गणेश का जन्मोत्सव (गणेश चतुर्थी) मनाया जाता है। इस दौरान इन देवताओं की विशेष पूजा की जाती है तो इन दिनों में भगवान श्री कृष्ण और भगवान गणेश संसार का कार्यभार संभालते हैं। 
  3. तीसरे महीने आश्विन में शारदीय नवरात्रि के दौरान देवी दुर्गा की पूजा होती है, और उन्हें सृष्टि की रक्षा करने वाली माना जाता है। शारदीय नवरात्रि में संसार का कार्यभार संभालने का दायित्व मां दुर्गा संभालती हैं।
  4. चातुर्मास का अंतिम महीना कार्तिक माह, देवी लक्ष्मी को समर्पित होता है, खासकर दीपावली के दौरान उनकी विशेष पूजा की जाती है। फिर मां लक्ष्मी देवउठनी एकादशी तक पृथ्वी का कार्यभार संभालती हैं।

चतुर्मास का महत्व

माना जाता है कि भगवान विष्णु के शयनकाल में भगवान शिव ही मुख्य रूप से सृष्टि का संचालन करते हैं, जबकि अन्य देवी-देवता भी अपनी-अपनी भूमिका निभाते हुए सृष्टि के संतुलन को बनाए रखते हैं। यह अवधि आध्यात्मिक साधना, तप और दान-पुण्य के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसलिए सभी भक्त चतुर्मास में भोलेनाथ के साथ-साथ अन्य देवी-देवताओं की पूजा करते हैं और उनका आर्शीवाद प्राप्त करते हैं। ताकि लोगों के अपने जीवन में ज्यादा परेशानियों का सामना न करना पड़े।

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