Chandragrahan 2026: साल 2026 का चंद्र ग्रहण सिर्फ़ एक खगोलीय घटना नहीं है यह अपने घर और मन की शांति को सुरक्षित रखने का भी समय है।
Chandragrahan 2026: साल 2026 का चंद्र ग्रहण सिर्फ़ एक खगोलीय घटना नहीं है यह अपने घर और मन की शांति को सुरक्षित रखने का भी समय है। ग्रहण खत्म होने के बाद कुछ आसान लेकिन असरदार उपाय करके आप अपने घर में सकारात्मक ऊर्जा बनाए रख सकते हैं और नकारात्मक प्रभावों को दूर कर सकते हैं। ये छोटे-छोटे कदम यह सुनिश्चित करने में मदद कर सकते हैं कि आपका दिन शुभ और शांतिपूर्ण रहे। आइए जानें कि ग्रहण खत्म होने के बाद क्या करना चाहिए और किन खास सावधानियों का पालन करना चाहिए।
साल का आखिरी चंद्र ग्रहण कब है?
साल का आखिरी चंद्र ग्रहण श्रावण महीने की पूर्णिमा को लगेगा। यह ग्रहण सावन महीने के समापन का भी प्रतीक होगा। यह 28 अगस्त को होगा, जिस दौरान चंद्रमा लाल रंग का दिखाई देगा।
चंद्र ग्रहण किस समय शुरू होगा?
साल का आखिरी चंद्र ग्रहण सुबह 08:04 मिनट शुरू होगा और सुबह 11:22 मिनट तक चलेगा। यह सुबह 09:43 मिनट अपनी चरम तीव्रता पर होगा।
क्या यह चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई देगा?
साल का आखिरी चंद्र ग्रहण 28 अगस्त, 2026 को होगा। यह भारत से दिखाई नहीं देगा।
यह चंद्र ग्रहण कहाँ दिखाई देगा?
साल का यह आखिरी चंद्र ग्रहण यूरोप, उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका और अफ्रीका के कुछ हिस्सों में दिखाई देगा।
चंद्र ग्रहण के बाद करने योग्य महत्वपूर्ण कार्य
परंपरा के अनुसार, ग्रहण खत्म होने के बाद पहला कदम स्नान करना है। ग्रहण के दौरान पहने गए कपड़ों को बदलना उचित माना जाता है क्योंकि उन्हें अशुद्ध माना जाता है।
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यदि संभव हो तो ग्रहण के दौरान पहने गए कपड़ों को किसी जरूरतमंद व्यक्ति को दान कर दें। यदि दान करना संभव न हो तो उन्हें दोबारा इस्तेमाल करने से पहले अच्छी तरह धो लें।
ग्रहण के बाद पवित्र नदी तालाब या समुद्र में स्नान करना बहुत शुभ माना जाता है। यदि ऐसा संभव न हो तो घर पर नहाने के पानी में गंगाजल मिलाना भी फायदेमंद माना जाता है।
भले ही ग्रहण देर रात खत्म हो, स्नान करना ही सबसे अच्छा उपाय माना जाता है। यदि किसी कारणवश आप स्नान नहीं कर पाते हैं, तो कम से कम साफ कपड़े जरूर बदल लें। ग्रहण के बाद दान-पुण्य करने से विशेष आध्यात्मिक लाभ मिलता है। अपनी क्षमता के अनुसार चंद्रमा से जुड़ी चीज़ों जैसे चावल, चीनी, सफ़ेद कपड़े या चांदी का दान करना शुभ माना जाता है।
सूतक काल खत्म होने के बाद पूजा-स्थल की सफ़ाई करें। अपने आराध्य देव को शुद्ध जल या गंगाजल से स्नान कराएं, पूजा-पाठ करें और पूरे घर में गंगाजल छिड़कें।
नकारात्मकता को दूर करने के लिए रसोईघर की अच्छी तरह सफ़ाई करना भी उचित माना जाता है।
ग्रहण के बाद केवल ताज़ा बना हुआ भोजन ही करें। अगर पहले से बने भोजन में तुलसी का पत्ता डाला गया था तो उसे खाया जा सकता है; वरना, उसे फेंक देना ही सबसे अच्छा माना जाता है।
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।