Om Chanting: ओम को भारतीय आध्यात्मिक परंपरा में बेहद पवित्र ध्वनि माना गया है। पूजा-पाठ, ध्यान और योग के दौरान इसका उच्चारण करने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। माना जाता है कि ओम का उच्चारण मन को एकाग्र करने और वातावरण में सकारात्मकता का अनुभव कराने में सहायक होता है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ओम का जाप कितनी देर तक करना चाहिए? क्या इसे बोलने का भी कोई सही तरीका और समय होता है? अगर आप भी ओम का उच्चारण करते हैं या इसे ध्यान का हिस्सा बनाना चाहते हैं तो आइए जानते हैं इसके सही समय, विधि और धार्मिक मान्यता के बारे में...
ओम का क्या है महत्व
ओम को हिंदू धर्म में पवित्र और मूल ध्वनि के रूप में माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ओम का संबंध सृष्टि की आदि ध्वनि से माना जाता है। कई धार्मिक ग्रंथों और आध्यात्मिक परंपराओं में इसका उल्लेख मिलता है। ओम को सामान्य तौर पर तीन ध्वनियों से जुड़ा माना जाता है- ‘अ’, ‘उ’ और ‘म’। इन तीनों ध्वनियों का उच्चारण धीरे-धीरे एक साथ मिलकर ओम की ध्वनि बनाता है। इसी वजह से पूजा, ध्यान और मंत्र जाप से पहले ओम का उच्चारण करने की परंपरा है।
कितनी देर करें ओम का उच्चारण
ओम के उच्चारण के लिए कोई एक निश्चित समय सभी लोगों के लिए निर्धारित नहीं माना जाता। शुरुआत करने वाले व्यक्ति के लिए एक बार ओम का उच्चारण लगभग 5 से 10 सेकंड तक करना सहज हो सकता है। इसमें सांस को आराम से लेते हुए बिना जल्दबाजी के ओम की ध्वनि निकाली जाती है। अगर कोई व्यक्ति नियमित रूप से इसका अभ्यास करता है तो अपनी सुविधा के अनुसार उच्चारण की अवधि बढ़ा सकता है। यहां सबसे जरूरी बात यह है कि आवाज निकालने में जबरदस्ती न की जाए और सांस को जरूरत से ज्यादा देर तक रोकने की कोशिश न की जाए।
कैसे करें ओम का सही उच्चारण
ओम का उच्चारण करने के लिए सबसे पहले शांत जगह पर आराम से बैठ जाएं। पीठ सीधी रखें और शरीर को सहज अवस्था में रखें। इसके बाद आंखें बंद करके कुछ क्षण सामान्य सांस लें। अब धीरे-धीरे गहरी सांस लें और सांस छोड़ते हुए ओम का उच्चारण करें। इसमें ‘अ’ की ध्वनि से शुरुआत करते हुए ‘उ’ और अंत में ‘म’ की ध्वनि पर ध्यान दिया जाता है। कोशिश करें कि पूरी प्रक्रिया आराम से हो और आवाज न तो बहुत तेज हो और न ही इतनी धीमी कि खुद को सुनाई न दे। उच्चारण पूरा होने के बाद कुछ क्षण शांत बैठना भी इस अभ्यास का हिस्सा माना जाता है। इससे व्यक्ति अपने ध्यान को उस ध्वनि पर केंद्रित कर सकता है।
सुबह का समय माना जाता है अच्छा
धार्मिक और योग परंपराओं में सुबह का समय ध्यान और मंत्र जाप के लिए विशेष माना जाता है। सुबह उठकर दैनिक कार्यों से निवृत्त होने के बाद शांत स्थान पर बैठकर ओम का उच्चारण किया जा सकता है। सुबह के समय वातावरण अपेक्षाकृत शांत रहता है, इसलिए ध्यान लगाने में आसानी हो सकती है। हालांकि, अगर सुबह समय नहीं मिल पाता है तो दिन में किसी शांत समय पर भी इसका अभ्यास किया जा सकता है।
पूजा से पहले भी कर सकते हैं जाप
कई लोग पूजा-पाठ शुरू करने से पहले ओम का उच्चारण करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, किसी मंत्र या पूजा की शुरुआत ओम से करना शुभ माना जाता है। घर के मंदिर में पूजा करने से पहले कुछ बार ओम का उच्चारण करके मन को पूजा में लगाने की परंपरा भी कई परिवारों में देखने को मिलती है। इसका उद्देश्य मन को बाहरी गतिविधियों से हटाकर पूजा और आराधना की ओर केंद्रित करना माना जाता है।
ध्यान के दौरान ओम का जाप
ओम का उच्चारण ध्यान के साथ भी किया जाता है। ध्यान करते समय बार-बार ओम बोलने के बजाय व्यक्ति अपनी सांस और ध्वनि पर ध्यान केंद्रित कर सकता है। एक आसान तरीका यह है कि कुछ मिनट शांत बैठकर धीरे-धीरे सांस लें और हर बार सांस छोड़ते समय ओम का उच्चारण करें। इस दौरान मन को दूसरी बातों में भटकने से रोकने के बजाय धीरे से वापस ओम की ध्वनि पर लाने का प्रयास किया जाता है।
कितनी बार करें ओम का जाप
ओम का उच्चारण कितनी बार करना चाहिए, इसके लिए भी कोई एक संख्या सभी के लिए जरूरी नहीं मानी जाती। शुरुआत में 5, 7 या 11 बार ओम का उच्चारण किया जा सकता है। नियमित अभ्यास करने वाले लोग अपनी सुविधा और साधना की परंपरा के अनुसार संख्या बढ़ा सकते हैं। यहां संख्या से ज्यादा जरूरी उच्चारण का सही तरीका और एकाग्रता मानी जाती है। बहुत ज्यादा देर तक करने की कोशिश करने के बजाय कम समय तक सही तरीके से अभ्यास करना बेहतर है।
किन बातों का रखें ध्यान
ओम का उच्चारण करते समय शरीर पर अनावश्यक दबाव नहीं डालना चाहिए। सांस रोकने या बहुत तेज आवाज में जाप करने की जरूरत नहीं है। अगर गले में असहजता महसूस हो तो अभ्यास रोक देना चाहिए। इसी तरह, शुरुआत में बहुत लंबे समय तक उच्चारण करने की कोशिश करने के बजाय कुछ मिनट से शुरुआत करना आसान रहता है। धीरे-धीरे अभ्यास बढ़ाया जा सकता है।
धार्मिक मान्यता क्या कहती है
धार्मिक मान्यता में ओम को पवित्र मंत्र माना गया है। इसे भगवान के स्मरण, ध्यान और आध्यात्मिक साधना से जोड़ा जाता है। उपनिषदों और योग परंपरा में भी ओम के ध्यान का विशेष महत्व बताया गया है। इसी कारण मंदिरों, पूजा स्थलों और ध्यान की परंपराओं में ओम की ध्वनि सुनाई देती है। हालांकि, अलग-अलग संप्रदायों और साधना पद्धतियों में इसके उच्चारण और जाप की विधि अलग हो सकती है।
ओम का उच्चारण करने का सही समय
अगर आप ओम का उच्चारण शुरू करना चाहते हैं तो सुबह का शांत समय अच्छा विकल्प हो सकता है। इसके अलावा पूजा से पहले, ध्यान के दौरान या रात में सोने से पहले भी अपनी सुविधा के अनुसार इसका अभ्यास किया जा सकता है। सबसे जरूरी है कि इसे शांत मन और सहज तरीके से किया जाए। ओम के उच्चारण के लिए कोई जल्दबाजी नहीं होती। कुछ मिनट का नियमित अभ्यास भी पर्याप्त हो सकता है, बशर्ते उच्चारण आराम से और सही तरीके से किया जाए।
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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय, पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।)